फारूक अब्दुल्ला के प्रभु राम पर बयान को भाजपा ने बताया हिंदू आस्था पर प्रहार
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के एक वायरल वीडियो को लेकर जम्मू-कश्मीर में सियासी तापमान 21 अक्टूबर 2026 को तेज़ी से बढ़ गया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जम्मू-कश्मीर इकाई ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए अब्दुल्ला के कथित बयान को करोड़ों हिंदुओं की आस्था पर सीधा प्रहार बताया और उनकी कड़ी निंदा की।
क्या था वायरल वीडियो में
भाजपा जम्मू-कश्मीर ने जो वीडियो पोस्ट किया, वह कथित तौर पर हालिया दशहरा कार्यक्रम का है, जिसमें फारूक अब्दुल्ला रामायण के प्रसंग का ज़िक्र कर रहे हैं। वीडियो में वे यह कहते सुनाई देते हैं कि जब प्रभु श्री राम अयोध्या लौटे और माँ ने पूछा कि क्या उन्होंने रावण को मारा, तो भगवान राम का जवाब था — 'माँ, मैंने रावण को नहीं मारा, मैंने 'राम को मारा', उसके क्रोध ने मारा।'
संदर्भ के अनुसार, अब्दुल्ला का मूल आशय यह था कि रावण का वध उसके अहंकार और क्रोध ने किया — एक प्रचलित आध्यात्मिक व्याख्या। हालाँकि, कार्यक्रम के दौरान उनके मुँह से 'रावण को नहीं मारा' की जगह 'मैंने राम को मारा' निकल गया, जिसे भाजपा ने भगवान राम का अपमान बताया है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
जम्मू-कश्मीर भाजपा ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'फारूक अब्दुल्ला द्वारा प्रभु श्री राम पर की गई टिप्पणी अत्यंत अपमानजनक और निंदनीय है। यह हर हिंदू की आस्था पर प्रहार है और किसी भी सनातनी के लिए अस्वीकार्य है।'
पार्टी ने आगे तीखे शब्दों में कहा कि जब एक खास विचारधारा के समर्थकों द्वारा 'सर तन से जुदा' जैसे नारे लगाए जाते हैं, तब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तथाकथित ठेकेदार मौन साध लेते हैं, लेकिन अब उसी जमात से जुड़े एक वरिष्ठ नेता मंच से करोड़ों हिंदुओं के आराध्य पर 'ओछी टिप्पणी' कर रहे हैं।
भाजपा ने सेक्युलर-लिबरल खेमे को सीधे संबोधित करते हुए सवाल उठाया, 'क्या इस पर भी आपकी जुबान खुलेगी, या इस हरकत का भी बचाव किया जाएगा?'
सोशल मीडिया पर बहस
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यह मामला तेज़ी से वायरल हो गया। एक वर्ग का कहना है कि फारूक अब्दुल्ला की जुबान फिसली और उनका इरादा अपमान का नहीं था, जबकि भाजपा समर्थकों ने इसे सुनियोजित बताते हुए माफी की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस और भाजपा के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही ऊँचा है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
गौरतलब है कि फारूक अब्दुल्ला ने अतीत में भी धार्मिक एकता और सांप्रदायिक सद्भाव पर जोर देने वाले बयान दिए हैं। इस दशहरा कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति भी उसी भावना का हिस्सा बताई जा रही है। फिर भी भाजपा के इस हमले के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस इस विवाद पर अपना पक्ष रखती है या नहीं, और क्या यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की स्थानीय राजनीति को और ध्रुवीकृत करता है।