6 अक्टूबर 2026
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निर्मला सीतारमण ने स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन से की मुलाकात, द्विपक्षीय निवेश संधि और विज्ञान सहयोग पर बनी सहमति

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निर्मला सीतारमण ने स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन से की मुलाकात, द्विपक्षीय निवेश संधि और विज्ञान सहयोग पर बनी सहमति

सारांश

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन की नई दिल्ली में मुलाकात ने भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को नई दिशा दी — BIT वार्ता आगे बढ़ी, विज्ञान-प्रौद्योगिकी सहयोग को संस्थागत रूप मिला और स्विट्जरलैंड ने 45 मिलियन CHF की प्रतिबद्धता जताई।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन से मुलाकात की।
भारत-स्विट्जरलैंड द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर जारी बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
स्विट्जरलैंड ने संयुक्त अनुसंधान ढाँचे के लिए 45 मिलियन स्विस फ्रैंक (CHF) आवंटित किए।
जितेंद्र सिंह ने स्विस राष्ट्रपति से मिलकर इंडो-स्विस रिसर्च फ्रेमवर्क (ISRF) और जॉइंट साइंटिफिक बोर्ड की प्रगति की समीक्षा की।
AI, क्वांटम प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, ब्लू इकोनॉमी और बायो-इकोनॉमी में सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा हुई।

केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन के साथ उच्चस्तरीय बैठक की, जिसमें दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT), व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग को नई गति देने पर गहन चर्चा हुई। वित्त मंत्रालय ने एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में साझा हितों से जुड़े व्यापक मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

द्विपक्षीय निवेश संधि पर केंद्रित बातचीत

बैठक में भारत-स्विट्जरलैंड द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर जारी वार्ता को आगे बढ़ाने को विशेष प्राथमिकता दी गई। दोनों पक्षों का मानना है कि इस समझौते के लागू होने से दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और आर्थिक साझेदारी को ठोस संस्थागत आधार मिलेगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत वैश्विक निवेशकों के लिए एक विश्वसनीय गंतव्य के रूप में अपनी पहचान मज़बूत कर रहा है।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में सहयोग

वित्त मंत्री की बैठक से पहले, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन से मुलाकात की। इस बैठक में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में दीर्घकालिक और संरचित सहयोग की रूपरेखा तय करने पर सहमति बनी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में अंतरविषयक और मिशन-मोड दृष्टिकोण अपना रहा है, जिसमें विभिन्न मंत्रालयों और विशेषज्ञों को एक साझे मंच पर लाया जा रहा है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जैव प्रौद्योगिकी, वैक्सीन विकास, जीनोम सीक्वेंसिंग, क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और गहरे समुद्री अनुसंधान में भारत की प्रगति साझा की।

ब्लू और बायो-इकोनॉमी में उभरती संभावनाएँ

बैठक में ब्लू इकोनॉमी और बायो-इकोनॉमी जैसे उभरते क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के ज़रिए नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देना चाहता है। उन्होंने इंडो-स्विस रिसर्च फ्रेमवर्क (ISRF) और इंडो-स्विस जॉइंट साइंटिफिक बोर्ड की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के वैज्ञानिक सहयोग को रणनीतिक और दीर्घकालिक आधार मिलेगा।

स्विट्जरलैंड की ओर से 45 मिलियन CHF की प्रतिबद्धता

स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन ने कहा कि स्विट्जरलैंड भारत को तेजी से उभरती वैश्विक अनुसंधान एवं विकास शक्ति के रूप में देखता है और शिक्षा, अनुसंधान तथा नवाचार में भारत का दीर्घकालिक साझेदार बनना चाहता है। उन्होंने घोषणा की कि स्विट्जरलैंड ने इस साझेदारी को मज़बूत करने के लिए 45 मिलियन स्विस फ्रैंक (CHF) की अतिरिक्त राशि आवंटित की है और उम्मीद जताई कि भारत भी इसी प्रकार की वित्तीय प्रतिबद्धता दिखाएगा, ताकि संयुक्त अनुसंधान ढाँचे को और मज़बूती मिले।

आगे का रास्ता

गौरतलब है कि स्विट्जरलैंड यूरोप के उन देशों में शामिल है जो भारत में तकनीकी निवेश और फार्मा अनुसंधान में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। BIT के संपन्न होने पर दोनों देशों के निजी क्षेत्र को निवेश सुरक्षा का एक मज़बूत कानूनी ढाँचा मिलेगा। दोनों देशों के बीच यह उच्चस्तरीय संवाद द्विपक्षीय संबंधों को आर्थिक और वैज्ञानिक दोनों मोर्चों पर नई ऊँचाई देने का संकेत देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पारदर्शिता की दृष्टि से एक अधूरा संदेश है। स्विट्जरलैंड का 45 मिलियन CHF का आवंटन ठोस है, मगर भारतीय पक्ष की समकक्ष वित्तीय प्रतिबद्धता अभी तक अस्पष्ट है — यह असमानता ISRF जैसे फ्रेमवर्क की दीर्घकालिक व्यवहार्यता पर सवाल खड़े करती है। AI और क्वांटम जैसे संवेदनशील तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार के साथ डेटा संप्रभुता और तकनीकी हस्तांतरण की शर्तें स्पष्ट होना ज़रूरी होगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निर्मला सीतारमण और स्विस राष्ट्रपति की बैठक में मुख्य रूप से किन विषयों पर चर्चा हुई?
बैठक में भारत-स्विट्जरलैंड द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) पर जारी वार्ता को आगे बढ़ाने, निवेश प्रवाह बढ़ाने और आर्थिक साझेदारी को नई गति देने पर चर्चा हुई। साथ ही विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को दीर्घकालिक स्वरूप देने पर भी सहमति बनी।
भारत-स्विट्जरलैंड द्विपक्षीय निवेश संधि (BIT) क्या है और इसका क्या महत्व है?
BIT एक कानूनी समझौता है जो दोनों देशों के निवेशकों को एक-दूसरे के बाज़ार में निवेश की सुरक्षा प्रदान करता है। इसके लागू होने पर निवेश प्रवाह में वृद्धि की उम्मीद है और यह भारत में स्विस कंपनियों तथा स्विट्जरलैंड में भारतीय निवेश के लिए एक मज़बूत कानूनी ढाँचा तैयार करेगा।
स्विट्जरलैंड ने भारत के साथ अनुसंधान सहयोग के लिए कितनी राशि आवंटित की है?
स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन ने बताया कि स्विट्जरलैंड ने संयुक्त अनुसंधान ढाँचे को मज़बूत करने के लिए 45 मिलियन स्विस फ्रैंक (CHF) की अतिरिक्त राशि आवंटित की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत भी इसी प्रकार की वित्तीय प्रतिबद्धता दिखाएगा।
डॉ. जितेंद्र सिंह और स्विस राष्ट्रपति की बैठक में किन प्रौद्योगिकी क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया?
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), जैव प्रौद्योगिकी, वैक्सीन विकास, जीनोम सीक्वेंसिंग, क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान, गहरे समुद्री अनुसंधान, ब्लू इकोनॉमी और बायो-इकोनॉमी जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। इंडो-स्विस रिसर्च फ्रेमवर्क (ISRF) और जॉइंट साइंटिफिक बोर्ड की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
भारत और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिक सहयोग का संस्थागत ढाँचा क्या है?
दोनों देशों के बीच इंडो-स्विस रिसर्च फ्रेमवर्क (ISRF) और इंडो-स्विस जॉइंट साइंटिफिक बोर्ड मौजूद हैं, जो वैज्ञानिक सहयोग को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक आधार प्रदान करते हैं। इन ढाँचों को और मज़बूत करने पर 6 अक्टूबर 2026 की बैठकों में सहमति बनी।
राष्ट्र प्रेस
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