गढ़चिरौली में माओवादियों की गुप्त हथियार फैक्ट्री ध्वस्त, लेथ मशीन-जनरेटर समेत भारी सामग्री बरामद
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में 23 मई को पुलिस ने पोमके–बिनागुंडा क्षेत्र के घने जंगलों में माओवादियों की कथित गुप्त हथियार निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया और जमीन के नीचे छिपाई गई भारी मात्रा में तकनीकी सामग्री बरामद कर मौके पर ही नष्ट कर दी। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई माओवादी नेटवर्क की हथियार निर्माण क्षमता पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार मानी जा रही है।
ऑपरेशन की पृष्ठभूमि
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान 'ऑपरेशन अंतिम प्रहार' के तहत हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों की पूछताछ से मिली गोपनीय जानकारी पर आधारित था। पूछताछ में खुलासा हुआ कि माओवादी संगठन जंगल क्षेत्रों में ज़मीन के नीचे हथियार बनाने और विस्फोटक सामग्री संग्रहीत करने का काम करते थे। इन सामग्रियों का उपयोग कथित तौर पर नक्सल सप्ताह, चुनाव और अन्य संवेदनशील अवसरों पर सुरक्षाबलों पर हमले के लिए किया जाता था।
सर्च ऑपरेशन और बरामदगी
सूचना मिलते ही गढ़चिरौली पुलिस ने पोमके–बिनागुंडा के जंगलों में विशेष सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटों तक चले इस अभियान में सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी कर संदिग्ध स्थानों की गहन जाँच की। तलाशी के दौरान जवानों को ज़मीन के भीतर दबाकर रखी गई बड़ी मात्रा में सामग्री मिली।
बरामद सामान में लेथ मशीन, 12 बोर पाइप, बीजीएल पाइप, इन्वर्टर, जनरेटर, बैटरी, ग्राइंडिंग मशीन, ड्रिलिंग मशीन, जिग सॉ मशीन, प्रेशर पंप, सोलर पैनल और अन्य उपकरण शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इन मशीनों का उपयोग हथियार निर्माण और माओवादी गतिविधियों को संचालित करने के लिए किया जाता था। इसके अतिरिक्त बड़ी मात्रा में माओवादी साहित्य भी ज़मीन के नीचे से बरामद किया गया।
सामग्री को मौके पर नष्ट किया
सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने बरामद सभी सामग्री और साहित्य को घटनास्थल पर ही नष्ट कर दिया। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से माओवादी संगठन की स्थानीय हथियार आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर नुकसान पहुँचा है।
पुलिस अधीक्षक की प्रतिक्रिया
यह पूरा अभियान गढ़चिरौली पुलिस अधीक्षक एम. रमेश के मार्गदर्शन में संचालित किया गया। उन्होंने अभियान में शामिल जवानों की सराहना करते हुए कहा कि जिले में माओवाद के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस का घोषित लक्ष्य जंगलों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को पूरी तरह निष्क्रिय करना और क्षेत्र में स्थायी शांति एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
आगे क्या
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब गढ़चिरौली में माओवाद-विरोधी अभियान पिछले कुछ महीनों में तेज़ हुआ है। गौरतलब है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली खुफिया जानकारी का यह पहला बड़ा परिणाम है, और विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले हफ्तों में इसी तरह के और ऑपरेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।