गाईघाटा एनकाउंटर: नाबालिग दुष्कर्म-हत्या आरोपी प्रहलाद दास ढेर, पीड़िता के परिजनों ने कहा — 'पुलिस ने सही किया'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना जिले के गाईघाटा में 27 अक्टूबर 2026 को एक नाबालिग के दुष्कर्म और हत्या के आरोपी प्रहलाद दास का पुलिस एनकाउंटर में निधन हो गया। सूत्रों के अनुसार, दास को घटनास्थल पर सीन रीकंस्ट्रक्शन के लिए ले जाया गया था, जहाँ उसने एस्कॉर्ट कर रहे एक पुलिसकर्मी की सर्विस गन छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर गोलियाँ चलाईं। जवाबी फायरिंग में गंभीर रूप से घायल दास को पास के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।
घटनाक्रम: कैसे हुआ एनकाउंटर
मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात आरोपी प्रहलाद दास को क्राइम स्पॉट पर सीन रीकंस्ट्रक्शन के लिए ले जाया गया। अचानक दास ने पुलिस एस्कॉर्ट में शामिल एक अधिकारी की बंदूक छीन ली और पुलिसकर्मियों पर गोलियाँ चला दीं। जवाब में पुलिसकर्मियों ने भी फायरिंग की, जिसमें दास गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे नज़दीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
पीड़िता की कहानी: 24 अक्टूबर की वह रात
घटना की शुरुआत 24 अक्टूबर 2026 की रात से हुई, जब 17 वर्षीया पीड़िता अपने परिवार के साथ घर के पास एक सांगीतिक कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। परिवार के सदस्यों के अनुसार, आधी रात के आसपास लड़की के मोबाइल पर एक कॉल आया, जिसके बाद वह कार्यक्रम स्थल से चली गई और वापस नहीं लौटी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद परिजनों ने उसे खोजना शुरू किया, लेकिन रात भर कोई सुराग नहीं मिला। रविवार सुबह उसका शव एक रिश्तेदार के घर के पास मिला। परिवार के आरोपों के आधार पर पुलिस ने पड़ोसी और रिश्तेदार प्रहलाद दास को पहले पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, फिर गिरफ्तार कर लिया।
पीड़िता के परिजनों की प्रतिक्रिया
मृतक पीड़िता के पिता ने मंगलवार सुबह पत्रकारों से कहा, 'हमें अपनी बेटी वापस नहीं मिलेगी, लेकिन पुलिस ने सही काम किया है।' उन्होंने आगे कहा कि जो जानकारी उन्हें मिली है, उसके अनुसार आरोपी ने पुलिसकर्मी की बंदूक छीनकर भागने की कोशिश की और पुलिस पर गोलियाँ भी चलाईं। पिता ने कहा, 'पुलिस ने सही किया और जवाबी फायरिंग में आरोपी मारा गया — वह ऐसे ही अंत का हकदार था।'
पीड़ित परिवार की एक महिला पड़ोसी ने भी पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा, 'आरोपी ने 17 वर्षीय नाबालिग के साथ जो किया, वह दया से भी परे जुर्म था। जुर्म करने के बाद भी उसने पुलिसकर्मी की बंदूक छीनकर भागने की कोशिश की — इसलिए उसके साथ जो हुआ, वह बिल्कुल सही था।' एक अन्य वरिष्ठ नागरिक पड़ोसी ने कहा कि पुलिस हिरासत में दास का व्यवहार बताता है कि उसे अपने जघन्य अपराध का कोई पछतावा नहीं था।
व्यापक संदर्भ: बंगाल में ऐसे मामले
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराध के मामलों पर जनता की नज़र बनी हुई है। गौरतलब है कि नाबालिगों के खिलाफ यौन हिंसा के मामलों में पुलिस एनकाउंटर के परिणाम और उनकी परिस्थितियाँ अक्सर न्यायिक जाँच का विषय बनती हैं। मानवाधिकार संगठन आमतौर पर ऐसे एनकाउंटर की स्वतंत्र जाँच की माँग करते हैं, भले ही आरोपी के खिलाफ अपराध कितना ही गंभीर क्यों न हो। पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रेस वक्तव्य नहीं आया है।
आगे क्या होगा
पुलिस एनकाउंटर की परिस्थितियों की जाँच मानक प्रक्रिया के तहत अपेक्षित है। नॉर्थ 24 परगना जिला पुलिस से आधिकारिक बयान का इंतज़ार है। पीड़िता के परिजन न्याय प्रक्रिया की उम्मीद लगाए बैठे हैं, हालाँकि मुख्य आरोपी के निधन से आपराधिक मुकदमे की दिशा अब बदल गई है। आने वाले दिनों में मजिस्ट्रेट जाँच और फोरेंसिक रिपोर्ट इस पूरे मामले की तस्वीर और स्पष्ट करेंगी।