भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार सरिता कोमातिरेड्डी बोलीं — विविधता पर किसी एक पार्टी का एकाधिकार नहीं
सारांश
मुख्य बातें
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स को चुनौती दे रहीं भारतीय-अमेरिकी रिपब्लिकन उम्मीदवार सरिता कोमातिरेड्डी ने कहा है कि विविधता किसी एक राजनीतिक दल की बपौती नहीं है। 27 अक्टूबर 2026 को द न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक विस्तृत प्रोफाइल में उन्होंने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की भारतीय-अमेरिकी पत्नी उषा वेंस का उल्लेख करते हुए कहा कि वह इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि रिपब्लिकन पार्टी भी विविधता को स्वीकार करती है।
मुख्य घटनाक्रम
42 वर्षीय कोमातिरेड्डी भारतीय प्रवासियों की बेटी हैं और स्वयं को 'एक प्रवासी परिवार की संतान' बताती हैं। अखबार के अनुसार उनका चुनाव प्रचार मुख्यतः अपराध के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और संघीय अभियोजक (फेडरल प्रॉसिक्यूटर) के रूप में अपने अनुभव पर केंद्रित है। वह योग्यता आधारित व्यवस्था में दृढ़ विश्वास रखती हैं।
कोमातिरेड्डी ने हार्वर्ड लॉ स्कूल से शिक्षा प्राप्त की है। इसके बाद उन्होंने अमेरिका की अपीलीय अदालत में ब्रेट एम. कवानाघ के साथ लॉ क्लर्क के रूप में, न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट में संघीय अभियोजक के रूप में और ड्रग एन्फोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य किया।
चुनाव प्रचार और धनराशि
द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, कोमातिरेड्डी के अभियान ने 9 अक्टूबर के बाद से — जो 8 अक्टूबर को लेटिशिया जेम्स के साथ हुई बहस के ठीक बाद का समय है — 10 लाख डॉलर से अधिक की धनराशि जुटाई है। इससे उन्हें टीवी विज्ञापनों पर जेम्स के अभियान से अधिक खर्च करने की क्षमता मिली है, जो उनके प्रचार की रफ्तार का संकेत देता है।
सोमवार को कोमातिरेड्डी ने पूर्व न्यूयॉर्क यांकीज खिलाड़ी मार्क टेक्सीरा का समर्थन हासिल होने की घोषणा की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, 'मुझे पूर्व न्यूयॉर्क यांकीज खिलाड़ी मार्क टेक्सीरा का समर्थन मिलने पर गर्व है। वह वर्ल्ड सीरीज चैंपियन, तीन बार ऑल-स्टार और पाँच बार गोल्ड ग्लव विजेता रहे हैं... न्यूयॉर्क को अधिक सुरक्षित बनाने के हमारे अभियान में उनका साथ मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है।'
पूर्व न्यूयॉर्क पुलिस आयुक्त रेमंड डब्ल्यू. केली और न्यूयॉर्क के पूर्व अमेरिकी अटॉर्नी रिचर्ड डोनोह्यू ने भी कोमातिरेड्डी का समर्थन किया है। डोनोह्यू ने उन्हें 'सबसे जटिल और चुनौतीपूर्ण मामलों के लिए भरोसेमंद अधिकारी' बताया।
सर्वेक्षण और चुनावी स्थिति
द न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा उद्धृत सिएना पोल के अनुसार, कोमातिरेड्डी 13 प्रतिशत अंकों से पीछे चल रही थीं — जेम्स को 52% और कोमातिरेड्डी को 39% समर्थन मिला। इसके अलावा, 70% से अधिक संभावित मतदाताओं ने बताया कि उन्होंने कोमातिरेड्डी का नाम पहले कभी नहीं सुना था, जो उनकी पहचान की चुनौती को उजागर करता है।
हालाँकि, कोमातिरेड्डी के अपने अभियान के लिए 12 से 14 अक्टूबर के बीच ऑनमैसेज द्वारा कराए गए एक आंतरिक सर्वेक्षण में तस्वीर कुछ अलग दिखी। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार इस सर्वेक्षण में जेम्स को 50.7% और कोमातिरेड्डी को 44.7% समर्थन मिला — यानी अंतर काफी कम।
नीतिगत रुख और आलोचना
कोमातिरेड्डी अटॉर्नी जनरल कार्यालय में आपराधिक मामलों की पैरवी करने वाले वकीलों की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़ाना चाहती हैं। फिलहाल वहाँ करीब 700 वकीलों में से 100 से कम आपराधिक मामलों पर काम कर रहे हैं।
आलोचकों का कहना है कि यह प्रस्ताव अटॉर्नी जनरल कार्यालय की वास्तविक भूमिका को नज़रअंदाज़ करता है। जेम्स का समर्थन करने वाले डेमोक्रेट नेता मीका लैशर ने कहा कि इस कार्यालय की कानूनी शक्तियाँ मूलतः दीवानी (सिविल) मामलों से जुड़ी हैं।
क्या होगा आगे
यह चुनाव न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिहाज़ से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कोमातिरेड्डी की उम्मीदवारी यह सवाल खड़ा करती है कि क्या भारतीय मूल के मतदाता और प्रवासी समुदाय पारंपरिक रूप से डेमोक्रेटिक गढ़ रहे न्यूयॉर्क में रिपब्लिकन पार्टी की ओर झुक सकते हैं। आने वाले हफ्तों में उनकी बढ़ती धन-जुटान और नए समर्थन इस दौड़ को और रोचक बना सकते हैं।