गंगा कटाव संकट: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की दिल्ली यात्रा, मालदा-मुर्शिदाबाद में लाखों प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
गंगा नदी के तटीय कटाव की विकराल होती समस्या अब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है। 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन विभाग द्वारा आयोजित एक अहम बैठक में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को प्रभावित करने वाले निचले गंगा क्षेत्र में नदी तट के कटाव के स्थायी समाधान और राज्यों के बीच समन्वय पर चर्चा की जा रही है। इस बैठक से पहले रविवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने मालदा के प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया।
मालदा और मुर्शिदाबाद: संकट की तस्वीर
मालदा, मुर्शिदाबाद और नादिया जिले सबसे गंभीर खतरे में हैं। मालदा में दशकों से लगातार भूस्खलन जारी है और हर मानसून में गंगा बड़े पैमाने पर मिट्टी के कटाव से इन जिलों के भूगोल को बदल देती है। इससे खेत, घर, स्कूल, मंदिर और सड़कें — सब कुछ खतरे में पड़ जाता है।
मुर्शिदाबाद के लालगोला क्षेत्र से मिली रिपोर्टों के अनुसार, बढ़ते कटाव के कारण पूरी बस्तियाँ विस्थापन के कगार पर हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि अकेले तारानगर गाँव में लंबे समय तक चले कटाव के कारण 120 से अधिक परिवार अपने घर गँवा चुके हैं — यह आँकड़ा नदी किनारे बसे समुदायों की व्यापक त्रासदी का प्रतीक है।
आर्थिक और मानवीय नुकसान
राज्यसभा में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा दिए गए उत्तर के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच पश्चिम बंगाल में बाढ़ से कुल नुकसान ₹16,083 करोड़ से अधिक रहा, जिससे 40 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए और 188 लोगों की मृत्यु हुई। यह मौसमी आपदा अब एक दीर्घकालिक मानवीय और विकासात्मक संकट का रूप ले चुकी है।
2018 के समझौते पर अमल नहीं
रिपोर्टों में मुख्यमंत्री अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि नदी तट कटाव से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार, संबंधित जल संसाधन एजेंसी और राष्ट्रीय जलविद्युत निगम लिमिटेड (NHPC) के बीच 2018 में हुआ समझौता अब तक पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है। इसीलिए वे एक कारगर योजना और राज्यों के बीच समन्वय की माँग कर रहे हैं।
गाद और फरक्का की भूमिका
राज्य के अधिकारियों ने पड़ोसी झारखंड के राजमहल के पास भारी गाद जमाव की ओर इशारा किया है और इसे मालदा में बाढ़ व कटाव से जोड़ा है। इससे पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड को शामिल करते हुए गाद निकालने और अंतरराज्यीय समन्वय पर चर्चा शुरू हो गई है।
फरक्का बैराज अक्सर कटाव पर होने वाली चर्चा के केंद्र में रहता है। विभिन्न अध्ययनों और रिपोर्टों ने गाद की गति और नदी के व्यवहार में बदलाव को मालदा और मुर्शिदाबाद के कुछ हिस्सों में तीव्र कटाव से जोड़ा है। हालाँकि, विशेषज्ञों के बीच प्राकृतिक नदी प्रक्रियाओं की तुलना में इसकी भूमिका की सीमा को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
आगे क्या होगा
आधिकारिक टिप्पणियों के अनुसार, बंगाल के जलोढ़ मैदानों में बहने वाली गंगा एक 'घुमावदार नदी' है जो अत्यधिक गतिशील है। मानसून में भारी जल प्रवाह से किनारे कमजोर होते हैं और बाद में जलभराव से भूस्खलन होता है। बाढ़, गाद और नदी-मार्ग परिवर्तन का यह चक्र कृषि भूमि, बस्तियों और सार्वजनिक अवसंरचना को लगातार नष्ट कर रहा है। दिल्ली में आयोजित इस बैठक के नतीजे और अंतरराज्यीय समन्वय की रूपरेखा से तय होगा कि तीनों राज्यों में नदी तट पर बसे लाखों लोगों को कब तक राहत मिल पाएगी।