27 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गंगा कटाव संकट: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की दिल्ली यात्रा, मालदा-मुर्शिदाबाद में लाखों प्रभावित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गंगा कटाव संकट: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की दिल्ली यात्रा, मालदा-मुर्शिदाबाद में लाखों प्रभावित

सारांश

गंगा कटाव अब महज मौसमी आपदा नहीं — मालदा, मुर्शिदाबाद और नादिया में यह एक स्थायी विकासात्मक संकट बन चुका है। 40 लाख से अधिक प्रभावित लोग और ₹16,083 करोड़ का नुकसान बताता है कि 2018 का समझौता कागज़ पर ही रह गया।

मुख्य बातें

27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने गंगा कटाव पर अंतरराज्यीय समन्वय बैठक बुलाई।
पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी ने नदी तट कटाव को सरकार की प्राथमिकता बताया; मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने मालदा का निरीक्षण किया।
2021-2023 के बीच पश्चिम बंगाल में बाढ़ से ₹16,083 करोड़ से अधिक का नुकसान, 40 लाख से अधिक लोग प्रभावित, 188 मौतें — जल शक्ति मंत्रालय के राज्यसभा उत्तर के अनुसार।
तारानगर गाँव में अकेले 120 से अधिक परिवार कटाव के कारण बेघर, रिपोर्टों के अनुसार।
पश्चिम बंगाल, जल संसाधन एजेंसी और NHPC के बीच 2018 का कटाव-रोधी समझौता अब तक पूरी तरह लागू नहीं।
फरक्का बैराज और राजमहल (झारखंड) के पास गाद जमाव को मालदा में बाढ़ और कटाव से जोड़ा गया; विशेषज्ञों में इसकी भूमिका को लेकर मतभेद।

गंगा नदी के तटीय कटाव की विकराल होती समस्या अब पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है। 27 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन विभाग द्वारा आयोजित एक अहम बैठक में बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को प्रभावित करने वाले निचले गंगा क्षेत्र में नदी तट के कटाव के स्थायी समाधान और राज्यों के बीच समन्वय पर चर्चा की जा रही है। इस बैठक से पहले रविवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने मालदा के प्रभावित इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया।

मालदा और मुर्शिदाबाद: संकट की तस्वीर

मालदा, मुर्शिदाबाद और नादिया जिले सबसे गंभीर खतरे में हैं। मालदा में दशकों से लगातार भूस्खलन जारी है और हर मानसून में गंगा बड़े पैमाने पर मिट्टी के कटाव से इन जिलों के भूगोल को बदल देती है। इससे खेत, घर, स्कूल, मंदिर और सड़कें — सब कुछ खतरे में पड़ जाता है।

मुर्शिदाबाद के लालगोला क्षेत्र से मिली रिपोर्टों के अनुसार, बढ़ते कटाव के कारण पूरी बस्तियाँ विस्थापन के कगार पर हैं। रिपोर्टों में कहा गया है कि अकेले तारानगर गाँव में लंबे समय तक चले कटाव के कारण 120 से अधिक परिवार अपने घर गँवा चुके हैं — यह आँकड़ा नदी किनारे बसे समुदायों की व्यापक त्रासदी का प्रतीक है।

आर्थिक और मानवीय नुकसान

राज्यसभा में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा दिए गए उत्तर के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच पश्चिम बंगाल में बाढ़ से कुल नुकसान ₹16,083 करोड़ से अधिक रहा, जिससे 40 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए और 188 लोगों की मृत्यु हुई। यह मौसमी आपदा अब एक दीर्घकालिक मानवीय और विकासात्मक संकट का रूप ले चुकी है।

2018 के समझौते पर अमल नहीं

रिपोर्टों में मुख्यमंत्री अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि नदी तट कटाव से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार, संबंधित जल संसाधन एजेंसी और राष्ट्रीय जलविद्युत निगम लिमिटेड (NHPC) के बीच 2018 में हुआ समझौता अब तक पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है। इसीलिए वे एक कारगर योजना और राज्यों के बीच समन्वय की माँग कर रहे हैं।

गाद और फरक्का की भूमिका

राज्य के अधिकारियों ने पड़ोसी झारखंड के राजमहल के पास भारी गाद जमाव की ओर इशारा किया है और इसे मालदा में बाढ़ व कटाव से जोड़ा है। इससे पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड को शामिल करते हुए गाद निकालने और अंतरराज्यीय समन्वय पर चर्चा शुरू हो गई है।

फरक्का बैराज अक्सर कटाव पर होने वाली चर्चा के केंद्र में रहता है। विभिन्न अध्ययनों और रिपोर्टों ने गाद की गति और नदी के व्यवहार में बदलाव को मालदा और मुर्शिदाबाद के कुछ हिस्सों में तीव्र कटाव से जोड़ा है। हालाँकि, विशेषज्ञों के बीच प्राकृतिक नदी प्रक्रियाओं की तुलना में इसकी भूमिका की सीमा को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

आगे क्या होगा

आधिकारिक टिप्पणियों के अनुसार, बंगाल के जलोढ़ मैदानों में बहने वाली गंगा एक 'घुमावदार नदी' है जो अत्यधिक गतिशील है। मानसून में भारी जल प्रवाह से किनारे कमजोर होते हैं और बाद में जलभराव से भूस्खलन होता है। बाढ़, गाद और नदी-मार्ग परिवर्तन का यह चक्र कृषि भूमि, बस्तियों और सार्वजनिक अवसंरचना को लगातार नष्ट कर रहा है। दिल्ली में आयोजित इस बैठक के नतीजे और अंतरराज्यीय समन्वय की रूपरेखा से तय होगा कि तीनों राज्यों में नदी तट पर बसे लाखों लोगों को कब तक राहत मिल पाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि मालदा और मुर्शिदाबाद में हर मानसून हजारों परिवार सब कुछ खो देते हैं। ₹16,083 करोड़ का नुकसान और 188 मौतें तीन वर्षों के आँकड़े हैं — असली कीमत विस्थापित पीढ़ियों और नष्ट हुई कृषि भूमि में कहीं अधिक है। फरक्का की भूमिका पर विशेषज्ञों की असहमति भी चिंताजनक है, क्योंकि बिना वैज्ञानिक सहमति के कोई भी स्थायी समाधान अधूरा रहेगा। असली परीक्षा यह है कि 27 अक्टूबर की यह बैठक एक और घोषणा बनती है या 2018 की विफलता से सबक लेकर ठोस कार्यान्वयन तंत्र खड़ा करती है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा कटाव से पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक प्रभावित जिले कौन से हैं?
मालदा, मुर्शिदाबाद और नादिया जिले सबसे गंभीर खतरे में हैं। हर मानसून में गंगा-पद्मा नदी प्रणाली के किनारे भूस्खलन से खेत, घर, सड़कें और स्कूल नष्ट हो जाते हैं।
27 अक्टूबर 2026 की दिल्ली बैठक का उद्देश्य क्या है?
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन विभाग ने यह बैठक निचले गंगा क्षेत्र में नदी तट कटाव के स्थायी समाधान और बिहार, झारखंड व पश्चिम बंगाल के बीच समन्वय के लिए बुलाई है। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी इस यात्रा में स्थायी हल की उम्मीद लेकर पहुँचे हैं।
2018 का कटाव-रोधी समझौता क्या था और यह लागू क्यों नहीं हुआ?
पश्चिम बंगाल सरकार, संबंधित जल संसाधन एजेंसी और NHPC के बीच 2018 में नदी तट कटाव रोकने के लिए एक समझौता हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार, यह समझौता आठ वर्षों बाद भी पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है, जिसके कारण मुख्यमंत्री अधिकारी अंतरराज्यीय समन्वय और प्रभावी कार्यान्वयन की माँग कर रहे हैं।
2021-2023 के बीच पश्चिम बंगाल में बाढ़ से कितना नुकसान हुआ?
राज्यसभा में जल शक्ति मंत्रालय द्वारा दिए गए उत्तर के अनुसार, 2021 से 2023 के बीच पश्चिम बंगाल में बाढ़ से ₹16,083 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ, 40 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए और 188 लोगों की मृत्यु हुई।
फरक्का बैराज का गंगा कटाव से क्या संबंध है?
विभिन्न अध्ययनों और रिपोर्टों ने फरक्का बैराज के कारण गाद की गति और नदी के व्यवहार में बदलाव को मालदा व मुर्शिदाबाद में तीव्र कटाव से जोड़ा है। हालाँकि, विशेषज्ञों के बीच प्राकृतिक नदी प्रक्रियाओं की तुलना में इसकी भूमिका की सीमा को लेकर अभी भी मतभेद हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 1 साल पहले
  6. 1 साल पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले