23 अक्टूबर 2026
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गौशालाओं में गोवंश की मौत पर केशव मौर्य सख्त: बदायूं के दो बीडीओ पर अनुशासनिक कार्रवाई, कासगंज का बीडीओ निलंबित

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गौशालाओं में गोवंश की मौत पर केशव मौर्य सख्त: बदायूं के दो बीडीओ पर अनुशासनिक कार्रवाई, कासगंज का बीडीओ निलंबित

सारांश

उत्तर प्रदेश में गौशालाओं में गोवंश की मौत पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखी कार्रवाई की है। बदायूं में क्षमता से चार गुना अधिक पशु रखने और रेड अलर्ट के बावजूद व्यवस्था न करने पर दो बीडीओ पर अनुशासनिक प्रक्रिया शुरू हुई, जबकि कासगंज का एक बीडीओ कथित वीडियो प्रकरण में निलंबित।

मुख्य बातें

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 23 अक्टूबर 2026 को गौशालाओं में गोवंश की मौत पर तीन बीडीओ के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए।
बदायूं की अभिगांव गौशाला में 20 गोवंश की मौत; निर्धारित क्षमता 100 के विरुद्ध 428 गोवंश रखे गए थे — बीडीओ राकेश कुमार निराला पर कार्रवाई।
बदायूं के सालारपुर विकास खंड में 14 गोवंश की मौत; बीडीओ नितिन कुमार पर भी अनुशासनिक कार्रवाई।
कासगंज के पटियाली विकास खंड के बीडीओ संजीव कुमार कथित वीडियो प्रकरण में निलंबित , मुख्यालय से संबद्ध।
संयुक्त विकास आयुक्त, बरेली मंडल को बदायूं मामले में जाँच अधिकारी नामित किया गया।
ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को समस्त गौशालाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रदेश की गौशालाओं में गोवंश की मौत और देखभाल में बरती जा रही लापरवाही पर 23 अक्टूबर 2026 को कड़ा रुख अपनाते हुए तीन खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए। बदायूं जिले के दो बीडीओ के खिलाफ अनुशासनिक प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि कासगंज जिले के पटियाली विकास खंड के बीडीओ संजीव कुमार को एक कथित वीडियो प्रकरण में प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता के संकेत मिलने पर तत्काल निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया।

बदायूं में दो बीडीओ पर अनुशासनिक कार्रवाई

उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से शुक्रवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, बदायूं के म्याऊं विकास खंड की अभिगांव गौशाला में 20 गोवंश की मौत के मामले में बीडीओ राकेश कुमार निराला को प्रथमदृष्टया जिम्मेदार पाया गया है। उक्त गौशाला की निर्धारित क्षमता मात्र 100 गोवंश की थी, जबकि वहाँ 428 गोवंश संरक्षित किए गए थे — अर्थात क्षमता से चार गुना से भी अधिक।

विज्ञप्ति के अनुसार, जिले में पहले से रेड अलर्ट जारी होने के बावजूद न तो अस्थायी व्यवस्था की गई और न ही अतिरिक्त शेड का निर्माण कराया गया — जिसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत अनुशासनिक कार्रवाई आरंभ की गई है। संयुक्त विकास आयुक्त, बरेली मंडल को इस मामले में जाँच अधिकारी नामित किया गया है।

इसी प्रकार, बदायूं के सालारपुर विकास खंड के बीडीओ नितिन कुमार के विरुद्ध गौशाला में 14 गोवंश की मौत और लापरवाही के आरोप में भी अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है।

कासगंज बीडीओ का निलंबन — कथित वीडियो प्रकरण

कासगंज जिले के पटियाली विकास खंड के बीडीओ संजीव कुमार से संबंधित एक कथित वीडियो सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वतः संज्ञान लिया। मामले में प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता के संकेत मिलने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। विज्ञप्ति में कथित वीडियो की विस्तृत प्रकृति का उल्लेख नहीं किया गया है।

सरकार की प्राथमिकता और निर्देश

उपमुख्यमंत्री मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की समस्त गौशालाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ भी अव्यवस्था, अनियमितता, संसाधनों की कमी या गोवंश की देखभाल में लापरवाही पाई जाए, वहाँ संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि गौशालाओं में चारा, पानी, पर्याप्त शेड, स्वच्छता और पशुओं की समुचित देखभाल सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मौर्य ने यह भी कहा कि लापरवाही, अनियमितता, भ्रष्टाचार या नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।

आम जनता और गोवंश पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सरकारी गौशालाओं में क्षमता से अधिक पशुओं के रखे जाने की समस्या कोई नई नहीं है। आलोचकों का कहना है कि केवल अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है — बुनियादी ढाँचे और बजट आवंटन में भी सुधार की जरूरत है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में हजारों सरकारी व निजी गौशालाएँ संचालित हैं, और संसाधनों की कमी एक पुरानी शिकायत रही है।

क्या होगा आगे

बरेली मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त के नेतृत्व में जाँच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। निलंबित बीडीओ संजीव कुमार के मामले में भी अलग जाँच अपेक्षित है। उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रदेशभर की गौशालाओं में स्थलीय निरीक्षण अभियान तेज होने की संभावना है, और आने वाले हफ्तों में और भी अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि रेड अलर्ट जारी होने के बाद भी ऊपर के स्तर पर क्यों कोई हस्तक्षेप नहीं हुआ। बदायूं की गौशाला में क्षमता से चार गुना अधिक पशु रखे जाने की स्थिति रातोंरात नहीं बनती — यह महीनों की प्रशासनिक विफलता है जो केवल एक बीडीओ की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। उत्तर प्रदेश में गौशालाओं के बजट आवंटन और बुनियादी ढाँचे पर व्यापक ऑडिट के बिना यह कार्रवाई महज दिखावटी सख्ती बन सकती है। जब तक क्षमता विस्तार और संसाधन आवंटन की प्रणालीगत खामियाँ दूर नहीं होतीं, अगली मौतें और अगली कार्रवाइयाँ भी तय हैं।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केशव मौर्य ने गौशाला मामले में क्या कार्रवाई की?
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 23 अक्टूबर 2026 को तीन बीडीओ के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए — बदायूं के दो बीडीओ (राकेश कुमार निराला और नितिन कुमार) पर अनुशासनिक कार्रवाई और कासगंज के बीडीओ संजीव कुमार को निलंबित किया। साथ ही ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को प्रदेशभर की गौशालाओं की नियमित निगरानी के निर्देश दिए।
बदायूं की अभिगांव गौशाला में क्या हुआ था?
बदायूं के म्याऊं विकास खंड की अभिगांव गौशाला में 20 गोवंश की मौत हो गई। गौशाला की निर्धारित क्षमता 100 गोवंश की थी, जबकि वहाँ 428 गोवंश रखे गए थे। जिले में रेड अलर्ट जारी होने के बावजूद अस्थायी व्यवस्था और अतिरिक्त शेड नहीं बनाए गए।
कासगंज के बीडीओ संजीव कुमार को क्यों निलंबित किया गया?
कासगंज के पटियाली विकास खंड के बीडीओ संजीव कुमार से संबंधित एक कथित वीडियो सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री मौर्य ने स्वतः संज्ञान लिया। मामले में प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता के संकेत मिलने पर उन्हें तत्काल निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
गौशाला मामले में जाँच कौन करेगा?
बदायूं के म्याऊं विकास खंड के मामले में संयुक्त विकास आयुक्त, बरेली मंडल को जाँच अधिकारी नामित किया गया है। अनुशासनिक कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत की जा रही है।
उत्तर प्रदेश में गौशालाओं की निगरानी के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को प्रदेश की सभी गौशालाओं की नियमित निगरानी और स्थलीय निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जहाँ भी लापरवाही, अनियमितता या संसाधनों की कमी पाई जाए, वहाँ संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई का आदेश दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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