गौशालाओं में गोवंश की मौत पर केशव मौर्य सख्त: बदायूं के दो बीडीओ पर अनुशासनिक कार्रवाई, कासगंज का बीडीओ निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रदेश की गौशालाओं में गोवंश की मौत और देखभाल में बरती जा रही लापरवाही पर 23 अक्टूबर 2026 को कड़ा रुख अपनाते हुए तीन खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए। बदायूं जिले के दो बीडीओ के खिलाफ अनुशासनिक प्रक्रिया शुरू की गई है, जबकि कासगंज जिले के पटियाली विकास खंड के बीडीओ संजीव कुमार को एक कथित वीडियो प्रकरण में प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता के संकेत मिलने पर तत्काल निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
बदायूं में दो बीडीओ पर अनुशासनिक कार्रवाई
उपमुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से शुक्रवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, बदायूं के म्याऊं विकास खंड की अभिगांव गौशाला में 20 गोवंश की मौत के मामले में बीडीओ राकेश कुमार निराला को प्रथमदृष्टया जिम्मेदार पाया गया है। उक्त गौशाला की निर्धारित क्षमता मात्र 100 गोवंश की थी, जबकि वहाँ 428 गोवंश संरक्षित किए गए थे — अर्थात क्षमता से चार गुना से भी अधिक।
विज्ञप्ति के अनुसार, जिले में पहले से रेड अलर्ट जारी होने के बावजूद न तो अस्थायी व्यवस्था की गई और न ही अतिरिक्त शेड का निर्माण कराया गया — जिसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना गया है। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत अनुशासनिक कार्रवाई आरंभ की गई है। संयुक्त विकास आयुक्त, बरेली मंडल को इस मामले में जाँच अधिकारी नामित किया गया है।
इसी प्रकार, बदायूं के सालारपुर विकास खंड के बीडीओ नितिन कुमार के विरुद्ध गौशाला में 14 गोवंश की मौत और लापरवाही के आरोप में भी अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई है।
कासगंज बीडीओ का निलंबन — कथित वीडियो प्रकरण
कासगंज जिले के पटियाली विकास खंड के बीडीओ संजीव कुमार से संबंधित एक कथित वीडियो सामने आने के बाद उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वतः संज्ञान लिया। मामले में प्रथमदृष्टया गंभीर अनियमितता के संकेत मिलने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। विज्ञप्ति में कथित वीडियो की विस्तृत प्रकृति का उल्लेख नहीं किया गया है।
सरकार की प्राथमिकता और निर्देश
उपमुख्यमंत्री मौर्य ने ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिए हैं कि प्रदेश की समस्त गौशालाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ भी अव्यवस्था, अनियमितता, संसाधनों की कमी या गोवंश की देखभाल में लापरवाही पाई जाए, वहाँ संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि गौशालाओं में चारा, पानी, पर्याप्त शेड, स्वच्छता और पशुओं की समुचित देखभाल सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मौर्य ने यह भी कहा कि लापरवाही, अनियमितता, भ्रष्टाचार या नियमों के विरुद्ध कार्य करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।
आम जनता और गोवंश पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सरकारी गौशालाओं में क्षमता से अधिक पशुओं के रखे जाने की समस्या कोई नई नहीं है। आलोचकों का कहना है कि केवल अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है — बुनियादी ढाँचे और बजट आवंटन में भी सुधार की जरूरत है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में हजारों सरकारी व निजी गौशालाएँ संचालित हैं, और संसाधनों की कमी एक पुरानी शिकायत रही है।
क्या होगा आगे
बरेली मंडल के संयुक्त विकास आयुक्त के नेतृत्व में जाँच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। निलंबित बीडीओ संजीव कुमार के मामले में भी अलग जाँच अपेक्षित है। उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रदेशभर की गौशालाओं में स्थलीय निरीक्षण अभियान तेज होने की संभावना है, और आने वाले हफ्तों में और भी अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।