अशोक गहलोत का भजनलाल शर्मा को जवाब: बेटे ने सरकारी आवास में निवास नहीं किया
सारांश
Key Takeaways
- अशोक गहलोत ने भजनलाल शर्मा की बातों का जवाब दिया।
- गहलोत के बेटे ने सरकारी आवास में निवास नहीं किया।
- गहलोत ने शासन से जुड़े मुद्दों पर चिंता व्यक्त की।
- गहलोत ने सलाहकार टीम की आलोचना की।
- राजनीति में परिवार के सदस्यों की भागीदारी को सही ठहराया।
जयपुर, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की टिप्पणियों का तीखा जवाब देते हुए कहा कि उनके बेटे ने कभी भी मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास में निवास नहीं किया। वह स्वतंत्र रूप से एक किराए के मकान में रहते थे।
गहलोत ने सीएम भजनलाल की टिप्पणियों पर कहा कि मुख्यमंत्री को कांग्रेस पार्टी के आंतरिक मामलों पर अटकलें लगाने के बजाय शासन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जयपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी बातों पर कौन ध्यान दे रहा है, यह आपकी चिंता का विषय नहीं है। यह हमारे आंतरिक मामले हैं। आपको अपनी सरकार से जुड़े सवालों के उत्तर देने चाहिए।
यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब रविवार को जमवारामगढ़ में एक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने गहलोत पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आजकल दिल्ली में कोई भी उन पर ध्यान नहीं दे रहा है और जिन लोगों की उन्होंने कभी आलोचना की थी, वे अब प्रभावशाली पदों पर हैं। गहलोत ने इन टिप्पणियों को खारिज कर दिया और विपक्ष के सवालों पर सरकार की प्रतिक्रियाओं पर संदेह व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि जरा उन सवालों को देखिए जो हम उठा रहे हैं और उन जवाबों को देखिए जो दिए जा रहे हैं। मैं कुछ खास पूछता हूं और उन्हें एकदम अलग जवाब मिलते हैं। उनके जवाब तो मुझे भी समझ नहीं आते। मुख्यमंत्री की सलाहकार टीम की आलोचना करते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि खराब सलाह से सरकार की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री को स्वयं उत्तरों की समीक्षा करनी चाहिए और अपने आस-पास के सलाहकारों के बारे में पुनर्विचार करना चाहिए।
अपनी पिछली टिप्पणियों पर सफाई देते हुए गहलोत ने कहा कि शासन से परिवार के सदस्यों को दूर रखने वाले उनके बयान का गलत अर्थ निकाला जा रहा है। मैंने कभी यह नहीं कहा कि परिवार के सदस्य राजनीति से दूर रहना चाहिए। मैंने बस इतना कहा था कि उन्हें सरकारी कार्यों से दूर रखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिवार के सदस्यों का राजनीति में आना गलत नहीं है। गहलोत ने कहा कि बेटों, बेटियों या रिश्तेदारों को राजनीति में आगे आना चाहिए। उनकी भागीदारी से वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ मिल सकता है और अगली पीढ़ी मजबूत हो सकती है।
इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ने शासन से जुड़े कई मुद्दों को भी उठाया, जिनमें राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के चुनावों में देरी और कॉलेज-विश्वविद्यालयों में छात्र संघ चुनावों का न होना शामिल है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि चुनाव क्यों नहीं हो रहे हैं? क्या आप युवाओं को प्रोत्साहित नहीं करना चाहते? यह घटनाक्रम दुर्भाग्यपूर्ण हैं। गहलोत ने मुख्यमंत्री से प्रशासन पर मजबूत पकड़ बनाने का आग्रह किया।
उन्होंने आगे कहा कि आप एक भले इंसान हैं। कृपया कमान संभालें, व्यवस्था पर लगाम कसें और अपनी सलाहकार टीम की समीक्षा करें। जनता की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं, और सरकार को इसका उचित जवाब देना ही होगा।