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गाजीपुर चकबंदी विवाद: सपा विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव ने जमीन कब्जे के आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश

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गाजीपुर चकबंदी विवाद: सपा विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव ने जमीन कब्जे के आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश

सारांश

गाजीपुर के सकरा गांव में चकबंदी के दौरान 15-20 बीघा जमीन के चक तीन किलोमीटर दूर हटाए जाने का आरोप है। सपा विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव पर कब्जे के आरोप लगे हैं, जिन्हें उन्होंने राजनीतिक साजिश बताते हुए नई जांच का स्वागत किया। मामला 2022-23 से अदालत में लंबित है।

मुख्य बातें

गाजीपुर के सकरा गांव में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान जमीन के चक बदले जाने का विवाद सामने आया है।
शिकायतकर्ता दुर्गेश यादव के अनुसार 10-15 लोगों की 15-20 बीघा जमीन के चक मूल स्थान से करीब 3 किलोमीटर दूर कर दिए गए।
जंगीपुर से सपा विधायक डॉ.
वीरेंद्र यादव पर जबरन जमीन कब्जे के आरोप लगे हैं, जिन्हें उन्होंने बेबुनियाद और राजनीतिक प्रेरित बताया।
यह मामला साल 2022-23 से बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के न्यायालय में लंबित है।
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला को प्रार्थना पत्र देकर निष्पक्ष जांच की माँग की है।

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के सकरा गांव में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान जमीनों के चक बदले जाने और सड़क किनारे की भूमि पर अवैध निर्माण के आरोपों को लेकर विवाद गहरा गया है। जंगीपुर से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव पर जबरन जमीन कब्जा करने के आरोप लगे हैं, जिन्हें उन्होंने सिरे से नकारते हुए राजनीतिक मंशा से प्रेरित बताया है। यह मामला साल 2022-23 से बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के न्यायालय में लंबित है।

विधायक का पक्ष: आरोप निराधार

मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को सपा विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव ने कहा, 'जो आरोप लगाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद हैं। इसके पीछे साफ तौर पर राजनीतिक मकसद है।' उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी भी नई जांच का स्वागत करते हैं और उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं।

विधायक ने आगे कहा, 'जिला मजिस्ट्रेट और उनसे पहले के जिला मजिस्ट्रेट भी इस मामले की जांच कर चुके हैं। हमारे चकबंदी अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों ने भी इस पूरे मामले को देखा है। उन्हें फिर से जांच करने दीजिए, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है।' इस बयान से स्पष्ट है कि विधायक प्रशासनिक जांच प्रक्रिया पर भरोसा जता रहे हैं।

ग्रामीणों की शिकायत और मुख्य आरोप

शिकायतकर्ता दुर्गेश यादव का आरोप है कि चकबंदी के दौरान 10 से 15 लोगों की लगभग 15 से 20 बीघा जमीन के चक उनकी मूल जगह से करीब तीन किलोमीटर दूर कर दिए गए हैं, जिससे प्रभावित किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। उनका यह भी आरोप है कि सड़क किनारे की कीमती जमीनों पर कब्जे के उद्देश्य से चकों में हेरफेर की गई है।

गौरतलब है कि ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला को प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की माँग की है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में चकबंदी विवाद कई जिलों में भूमि विवादों का प्रमुख कारण बने हुए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

चकबंदी प्रक्रिया, जो मूलतः बिखरी हुई कृषि भूमि को एक स्थान पर समेकित करने के लिए शुरू की जाती है, उत्तर प्रदेश में अक्सर विवादों का केंद्र बनती रही है। सकरा गांव का यह मामला 2022-23 से बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के न्यायालय में लंबित है, जो प्रशासनिक निपटान की धीमी गति को उजागर करता है।

आलोचकों का कहना है कि सड़क किनारे की भूमि, जिसकी बाजार में अधिक कीमत होती है, चकबंदी के दौरान प्रभावशाली लोगों के पक्ष में स्थानांतरित होने के आरोप नए नहीं हैं। यह मामला उन व्यापक सवालों को फिर से उठाता है जो चकबंदी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता से जुड़े हैं।

प्रशासन और आगे की कार्रवाई

जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला को सौंपे गए प्रार्थना पत्र के बाद प्रशासनिक हलचल बढ़ी है। अब तक दो जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा जांच की जा चुकी है, लेकिन मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है। यदि नई जांच के आदेश दिए जाते हैं, तो यह प्रकरण राज्य की चकबंदी नीति और उसके क्रियान्वयन पर नए सवाल खड़े कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो किसानों के हित के लिए बनाई गई थी, अक्सर शक्तिशाली वर्गों के लिए सड़क किनारे की मूल्यवान भूमि हथियाने का माध्यम बन जाती है। दो जिला मजिस्ट्रेटों की जांच के बावजूद मामला तीन वर्षों से अदालत में लटका है — यह न्याय प्रक्रिया की गति पर गंभीर सवाल है। विधायक का जांच का स्वागत करना राजनीतिक रूप से चतुर है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या पीड़ित किसानों को उनकी मूल जमीन वापस मिलती है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाजीपुर चकबंदी विवाद क्या है?
गाजीपुर के सकरा गांव में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान 10-15 किसानों की 15-20 बीघा जमीन के चक उनकी मूल जगह से करीब तीन किलोमीटर दूर कर दिए जाने का आरोप है। इसके साथ ही सड़क किनारे की भूमि पर अवैध निर्माण की कोशिश का भी आरोप लगाया गया है।
सपा विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव पर क्या आरोप हैं?
शिकायतकर्ता दुर्गेश यादव ने जंगीपुर विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव पर सड़क किनारे की कीमती जमीनों पर कब्जे के उद्देश्य से चकों में हेरफेर करवाने का आरोप लगाया है। विधायक ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद और राजनीतिक मंशा से प्रेरित बताते हुए अस्वीकार किया है।
यह मामला कब से विचाराधीन है?
यह मामला साल 2022-23 से बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के न्यायालय में लंबित है। इससे पहले दो जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा भी इस प्रकरण की जांच की जा चुकी है।
ग्रामीणों ने क्या कदम उठाए हैं?
प्रभावित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला को प्रार्थना पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की माँग की है। शिकायतकर्ता दुर्गेश यादव ने विधायक वीरेंद्र यादव पर सीधे आरोप लगाए हैं।
चकबंदी प्रक्रिया में विवाद क्यों होता है?
चकबंदी में बिखरी हुई कृषि भूमि को एक जगह समेकित किया जाता है, लेकिन सड़क किनारे की अधिक मूल्यवान जमीनों के आवंटन में कथित तौर पर हेरफेर के आरोप उत्तर प्रदेश में अक्सर सामने आते हैं। पारदर्शिता की कमी और लंबित न्यायिक प्रक्रिया इस समस्या को और जटिल बनाती है।
राष्ट्र प्रेस
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