गिरिराज सिंह और प्रह्लाद जोशी का विपक्षी रैली पर हमला: 'देश संविधान से चलेगा, किसी की जुबान से नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और प्रह्लाद जोशी ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित विपक्षी रैली पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समूचे विपक्ष को निशाने पर लिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दोनों वरिष्ठ नेताओं ने रैली की उपस्थिति और विपक्ष की संवैधानिक प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए।
गिरिराज सिंह का तंज — 'गुब्बारे की हवा निकल चुकी है'
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि रैली में लाखों लोगों के पहुँचने का दावा किया गया था, लेकिन वास्तविक उपस्थिति अपेक्षा से कहीं कम रही। उन्होंने कहा, 'राहुल गांधी के गुब्बारे की हवा निकल चुकी है।' उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि रैली में 20 दलों के शामिल होने का दावा किया जा रहा था।
सिंह ने विपक्ष पर सीधा प्रहार करते हुए पूछा, 'देश संविधान से चलेगा या किसी की जुबान से? यह राजतंत्र है या लोकतंत्र?' उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में संविधान और कानून ही सर्वोच्च हैं।
गृहयुद्ध और युवा राष्ट्रवाद पर आरोप-प्रत्यारोप
गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया कि विपक्ष देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करना चाहता है। उन्होंने दावा किया कि देश का युवा स्वामी विवेकानंद के मार्ग पर चलते हुए राष्ट्रवाद का ध्वज थामे आगे बढ़ रहा है और उसने आतंकवाद को नकार दिया है।
उन्होंने विपक्ष की 'वोट चोरी' संबंधी शिकायतों को भी खारिज किया। सिंह ने कहा कि विपक्षी दल कई राज्यों में लंबे समय से सत्ता से बाहर हैं और अगर उन्हें वाकई वोट चोरी का यकीन है, तो जहाँ उनकी सरकारें हैं, वहाँ से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनके अनुसार, 'वोट चोरी नहीं हुई — लोगों ने इन्हें वोट देना बंद कर दिया है।'
ममता बनर्जी पर सीधा हमला
तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश बनाना चाहती थीं, लेकिन अब बंगाल की जनता उनसे 'एक-एक पाई का हिसाब' लेगी। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई जब रैली में ममता बनर्जी और राहुल गांधी एक ही मंच पर दिखे।
प्रह्लाद जोशी — '1975 का आपातकाल याद दिलाया'
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि विपक्ष पहले मॉक पार्लियामेंट और अब रैली आयोजित कर रहा है, जबकि जनता उन्हें लगातार चुनावों में हराती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन्हीं नेताओं ने 1975 में आपातकाल लगाया था, पूरे तंत्र को कमज़ोर किया था और मीडिया पर पाबंदी थोपी थी — और आज वही लोग लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं।
जोशी ने संवैधानिक संस्थाओं का बचाव करते हुए कहा कि केरल में इसी चुनाव आयोग ने चुनाव कराए थे और जीत मिलने पर विपक्ष ने उसका स्वागत किया था। तमिलनाडु और झारखंड समेत कई राज्यों में विपक्ष की सरकारें हैं — यदि संस्थाएँ पक्षपाती होतीं, तो यह कैसे संभव होता?
राहुल गांधी पर व्यक्तिगत कटाक्ष
प्रह्लाद जोशी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी पर्याप्त मेहनत नहीं करते। उन्होंने कहा कि गांधी लंबे समय तक 'मॉक प्रधानमंत्री' बनकर ही रहेंगे और यदि वे इससे संतुष्ट हैं, तो उन्हें इसी भूमिका में रहने दिया जाए।
जोशी ने रैली की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाया — उन्होंने याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और TMC ने अलग-अलग चुनाव लड़े थे और उस समय गांधी ने ममता सरकार पर आरोप लगाए थे। अब हार के बाद दोनों एक ही मंच पर हैं — यह विपक्षी एकजुटता की असल तस्वीर है।
गौरतलब है कि यह रैली ऐसे समय में हुई जब विपक्षी गठजोड़ चुनाव परिणामों को लेकर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में भाजपा और विपक्ष के बीच यह वैचारिक टकराव और तीखा होने की संभावना है।