4 अक्टूबर 2026
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गिरिराज सिंह का तीखा हमला: राहुल गांधी, खड़गे और अखिलेश यादव पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप

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गिरिराज सिंह का तीखा हमला: राहुल गांधी, खड़गे और अखिलेश यादव पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप

सारांश

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पटना में राहुल गांधी के 'सत्याग्रह' प्लेटफॉर्म, SIR विवाद और अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर एक साथ कई मोर्चों पर विपक्ष को घेरा — केंद्रीय आरोप एक: देश नहीं, वोट बैंक।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 4 अक्टूबर 2026 को पटना में राहुल गांधी , मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप लगाया।
राहुल गांधी के 'सत्याग्रह' डिजिटल प्लेटफॉर्म को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए गिरिराज ने इसे अराजकता फैलाने का औज़ार करार दिया।
SIR अभियान पर गिरिराज ने कहा कि विपक्ष बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को मतदाता बनाना चाहता था।
वायुसेना पायलट अभिनंदन को कांग्रेस द्वारा बधाई न देने पर गिरिराज ने तीखी आलोचना की।
ममता बनर्जी , अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच मुस्लिम वोटों को लेकर खींचतान का आरोप भी लगाया।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 4 अक्टूबर 2026 को पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर जोरदार प्रहार किया। उन्होंने विपक्षी दलों पर वोट बैंक की राजनीति, राजनीतिक अवसरवाद और देश में अराजकता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया।

खड़गे के बयान पर पलटवार

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने हिमाचल प्रदेश में पाँच साल तक सरकार क्यों बनाए रखी और वहाँ से इस्तीफा क्यों नहीं दिलवाया। उन्होंने केरल और तेलंगाना का भी उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस को लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाने हैं, तो उसे अपने स्वयं के राजनीतिक फैसलों का भी जवाब देना होगा।

गिरिराज सिंह ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'मीठी बातें तो गले से उतर जाती हैं लेकिन कड़वी बातें थूक दी जाती हैं। जनता ने आपको नकार दिया है।'

राहुल गांधी के 'सत्याग्रह' प्लेटफॉर्म पर निशाना

राहुल गांधी द्वारा 'सत्याग्रह' नामक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए जाने पर गिरिराज सिंह ने इसे 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्लेटफॉर्म के ज़रिये देश में अराजकता फैलाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों के लिए सत्याग्रह नहीं किया जाता — यह सवाल उठाते हुए उन्होंने राहुल गांधी पर अप्रत्यक्ष रूप से व्यवस्था को अस्थिर करने का आरोप जड़ा।

गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों के बीच गहरी पैठ रखते हैं और विपक्ष चाहे जितने प्रयास करे, गरीबों के दिल से उन्हें नहीं निकाल सकता।

अभिनंदन और कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल

गिरिराज सिंह ने भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस बहादुर सैन्य अधिकारी को कांग्रेस की ओर से बधाई तक नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजराइल के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित कई विश्व नेताओं ने अभिनंदन को बधाई संदेश भेजे, और भारत के प्रधानमंत्री ने भी उनसे सीधी बात की। गिरिराज सिंह ने कांग्रेस की इस चुप्पी को उनकी राजनीतिक प्राथमिकताओं का प्रतीक बताया।

SIR और चुनाव आयोग विवाद पर विपक्ष को घेरा

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर गिरिराज सिंह ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्रवाई से इसलिए आपत्ति है क्योंकि वे बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को भारतीय नागरिक बनाकर उनसे मतदान करवाना चाहते थे। उन्होंने ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें बधाई मिलनी चाहिए क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से कई अवैध घुसपैठियों को मतदाता सूची में दर्ज होने से रोका।

गिरिराज सिंह ने स्पष्ट किया कि यदि किसी वैध मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है, तो उसके लिए निर्धारित कानूनी प्रावधान और शिकायत तंत्र उपलब्ध हैं — विपक्ष को चाहिए कि वह उन्हीं का उपयोग करे, न कि चुनाव आयोग पर निराधार आरोप लगाए।

अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर तंज

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर टिप्पणी करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि राम मंदिर जाने में कोई आश्चर्य नहीं, लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश वोटों के लिए धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग करते हैं। गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि फिलहाल ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और राहुल गांधी के बीच मुस्लिम वोटों को लेकर आपसी खींचतान चल रही है। आगे की राजनीतिक गतिविधियाँ इस बात पर निर्भर करेंगी कि विपक्षी एकता टिकी रहती है या वोट बैंक की यह प्रतिस्पर्धा उन्हें और अलग कर देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनका समय — SIR विवाद चरम पर होने और राहुल गांधी के नए डिजिटल मंच के ठीक बाद — महज संयोग नहीं लगता। BJP की रणनीति स्पष्ट है: विपक्ष की हर गतिविधि को 'वोट बैंक' के लेंस से पेश करना। लेकिन यह कथन एकतरफा है — SIR अभियान को लेकर सिविल सोसाइटी और चुनाव विशेषज्ञों की वैध चिंताओं को इस बहस में जगह नहीं मिल रही। अभिनंदन प्रसंग को फिर उठाना बताता है कि भावनात्मक राष्ट्रवाद अभी भी BJP की सबसे धारदार चुनावी तलवार है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर 'सत्याग्रह' डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिये देश में अराजकता फैलाने का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और विपक्ष देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं और उनकी प्राथमिकता देशहित नहीं, बल्कि वोट बैंक है।
SIR विवाद पर गिरिराज सिंह का क्या रुख है?
गिरिराज सिंह ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान का बचाव करते हुए कहा कि विपक्ष इसलिए परेशान है क्योंकि वह बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को भारतीय नागरिक बनाकर मतदान करवाना चाहता था। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्रवाई को राष्ट्रहित में उचित ठहराया।
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर गिरिराज सिंह ने क्या कहा?
गिरिराज सिंह ने अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर तंज कसते हुए आरोप लगाया कि वे वोटों के लिए धार्मिक प्रतीकों का उपयोग करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश वोटों के लिए टोपी पहनने तक का काम कर सकते हैं।
गिरिराज सिंह ने अभिनंदन का ज़िक्र क्यों किया?
गिरिराज सिंह ने कहा कि वायुसेना पायलट अभिनंदन को कांग्रेस की ओर से कोई बधाई नहीं दी गई, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के नेताओं ने बधाई दी। उन्होंने इसे कांग्रेस की राष्ट्रीय भावनाओं के प्रति उदासीनता का प्रमाण बताया।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस की किन राज्य सरकारों का उदाहरण दिया?
गिरिराज सिंह ने हिमाचल प्रदेश, केरल और तेलंगाना का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाने से पहले अपने इन राज्यों में किए गए फैसलों का भी जवाब दे। उन्होंने कहा कि खड़गे को पहले यह बताना चाहिए कि हिमाचल में पाँच साल सरकार चलाने के बाद इस्तीफा क्यों नहीं दिलवाया।
राष्ट्र प्रेस
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