गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर तीखा वार: 'वोट चोरी हुई तो LOP पद से इस्तीफा क्यों नहीं?'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने 12 अक्टूबर 2026 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कड़ा हमला बोला, उनकी हालिया प्रेस वार्ता को 'झूठ का पुलिंदा' करार देते हुए चुनौती दी कि यदि चुनाव में वास्तव में वोट चुराए गए थे, तो वे विपक्ष के नेता (एलओपी) का पद तत्काल छोड़ें। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच संवैधानिक मुद्दों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
मुख्य आरोप और चुनौती
गिरिराज सिंह ने कहा, 'वे एक हाथ में संविधान पकड़े हुए हैं और उसे खत्म करने की बात कर रहे हैं। अगर वोट चुराए गए थे, तो वे विपक्ष के नेता कैसे बने हुए हैं?' उन्होंने आगे कहा कि बिहार में चुनाव आयोग ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव से सबूत माँगे थे, परंतु कोई प्रमाण नहीं दिया गया। मंत्री ने दिल्ली और महाराष्ट्र में भी यही सवाल दोहराया।
संसदीय संख्याबल पर सवाल
गिरिराज सिंह ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने एक मार्च के दौरान दावा किया था कि उनके साथ 300 सांसद हैं, और अब वे 200 अधिकारियों के समर्थन का दावा कर रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यपूर्वक कहा, 'उनके अपने शशि थरूर भी उनके साथ नहीं थे।' उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष के पास इतना संख्याबल है, तो सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव क्यों नहीं लाया जाता।
कांग्रेस पर व्यापक निशाना
केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस उम्र में उनसे ऐसे बर्ताव की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस एक कांग्रेस सांसद पर लगे यौन शोषण के आरोपों पर चुप है। गिरिराज सिंह ने दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन चुनावों और हाल के चार उपचुनावों के नतीजों का हवाला देते हुए दावा किया कि देश के युवा कांग्रेस के साथ नहीं हैं।
AAP पर भी हमला
गिरिराज सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) को भी निशाने पर लिया और कहा कि दिल्ली में हाल की घटनाओं में AAP के कार्यकर्ता शामिल थे। उन्होंने कहा कि मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर भी किसी ने जवाब नहीं दिया, जिससे 'सबकी पोल खुल गई।' उन्होंने 'सीजेपी' नामक संगठन का भी उल्लेख किया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्ष संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के मुद्दे पर सत्तारूढ़ दल पर दबाव बना रहा है। BJP का पलटवार यह दर्शाता है कि दोनों पक्ष आगामी राजनीतिक मौसम से पहले जनमत को प्रभावित करने की कोशिश में हैं। आने वाले दिनों में इस बहस के और तेज होने की संभावना है।