26 सितंबर 2026
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गोवा क्राइम ब्रांच का मापुसा बस टर्मिनल पर छापा: 10.754 किलो गांजा जब्त, एक नाबालिग समेत दो हिरासत में

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गोवा क्राइम ब्रांच का मापुसा बस टर्मिनल पर छापा: 10.754 किलो गांजा जब्त, एक नाबालिग समेत दो हिरासत में

सारांश

गोवा क्राइम ब्रांच ने शुक्रवार शाम मापुसा बस टर्मिनल पर छापेमारी कर ₹10.5 लाख का 10.754 किलो गांजा जब्त किया। ओडिशा के दो युवकों — जिनमें एक 17 वर्षीय नाबालिग — को रंगे हाथों दबोचा गया। NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज।

मुख्य बातें

गोवा क्राइम ब्रांच ने 26 सितंबर 2026 को मापुसा इंटर-स्टेट बस टर्मिनल पर छापा मारकर 10.754 किलोग्राम गांजा जब्त किया।
जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत ₹10,50,000 बताई जा रही है।
हिरासत में लिए गए दो आरोपियों में से एक 24 वर्षीय गोकुला जेना (ओडिशा) और दूसरा 17 वर्षीय नाबालिग (जिला भद्रक, ओडिशा) है।
मादक पदार्थ शोल्डर बैग और हैंड ट्रॉली में छिपाकर रखे गए थे।
मामला NDPS एक्ट, 1985 की धारा 22(बी)(ii)(बी) के तहत दर्ज; जाँच पुलिस इंस्पेक्टर विकास डेकर कर रहे हैं।
पुलिस अधीक्षक (क्राइम) राहुल गुप्ता, आईपीएस मामले की देखरेख में हैं।

गोवा क्राइम ब्रांच ने 26 सितंबर 2026 को बरदेज के मापुसा इंटर-स्टेट बस टर्मिनल पर की गई छापेमारी में 10.754 किलोग्राम गांजा जब्त किया और दो संदिग्धों को हिरासत में लिया, जिनमें 17 वर्षीय एक नाबालिग भी शामिल है। जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित बाज़ार कीमत ₹10,50,000 बताई जा रही है। यह कार्रवाई ड्रग तस्करी के विरुद्ध क्राइम ब्रांच के चल रहे अभियान का हिस्सा है।

छापेमारी का घटनाक्रम

क्राइम ब्रांच की विशेष टीम ने शुक्रवार शाम 6:19 बजे से रात 9:25 बजे के बीच मापुसा बस टर्मिनल पर नशीले पदार्थों के खिलाफ सघन तलाशी अभियान चलाया। टीम का नेतृत्व पुलिस इंस्पेक्टर विकास डेकर ने किया, जिनके साथ असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर श्रीराम सालगांवकर और पुलिस कॉन्स्टेबल रितेश किनालकर, रूपेश गायकवाड़, प्रकाश उत्कुरी, करिश्मा गुडेगेरी तथा श्रीकृष्ण मडकर शामिल थे।

आरोपियों की पहचान

हिरासत में लिए गए पहले आरोपी की पहचान गोकुला जेना (आयु 24 वर्ष, निवासी देउला, लक्ष्मण नाथ रोड, बालेश्वर, ओडिशा — पिन 756032) के रूप में हुई है। दूसरा आरोपी 17 वर्षीय नाबालिग है, जो ओडिशा के जिला भद्रक के डागरपाड़ा, पुलिस थाना नागुआन (पिन 756112) का निवासी बताया जाता है। दोनों को रंगे हाथों पकड़ा गया।

जब्ती का विवरण

तलाशी के दौरान दोनों आरोपियों के शोल्डर बैग और हैंड ट्रॉली में हरे रंग के फूल एवं फल युक्त पौधे के हिस्से छिपाए गए पाए गए, जिनके गांजा होने का संदेह है। कुल जब्त मादक सामग्री का वजन 10.754 किलोग्राम है और इसकी अनुमानित कीमत ₹10,50,000 आँकी गई है। इन सामानों को सर्च एवं जब्ती पंचनामा के तहत विधिवत ज़ब्त किया गया है।

कानूनी कार्रवाई और जाँच

यह मामला क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंसेज़ (NDPS) एक्ट, 1985 की धारा 22(बी)(ii)(बी) के तहत दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जाँच पुलिस इंस्पेक्टर विकास डेकर कर रहे हैं, जो फिलहाल पुलिस अधीक्षक क्राइम का प्रभार भी संभाल रहे हैं। पुलिस उपाधीक्षक (क्राइम) जीवबा दलवी और पुलिस अधीक्षक (क्राइम) राहुल गुप्ता, आईपीएस इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।

आगे की दिशा

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब गोवा में ड्रग तस्करी के मार्गों पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नज़र है। नाबालिग आरोपी की संलिप्तता इस मामले को संवेदनशील बनाती है और जाँच एजेंसियाँ तस्करी के व्यापक नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर ज़रूरी भी; असली परीक्षा यह है कि क्या ये छापे महज़ आँकड़े बनकर रह जाते हैं या तस्करी नेटवर्क की जड़ें काटते हैं।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवा क्राइम ब्रांच ने मापुसा में कितना गांजा जब्त किया?
गोवा क्राइम ब्रांच ने मापुसा इंटर-स्टेट बस टर्मिनल पर छापेमारी के दौरान 10.754 किलोग्राम गांजा जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹10,50,000 है। यह सामग्री शोल्डर बैग और हैंड ट्रॉली में छिपाकर रखी गई थी।
मापुसा ड्रग केस में कौन-कौन गिरफ्तार हुए हैं?
हिरासत में लिए गए दो आरोपियों में से एक 24 वर्षीय गोकुला जेना (ओडिशा के बालेश्वर ज़िले का निवासी) और दूसरा 17 वर्षीय नाबालिग (ओडिशा के भद्रक ज़िले का निवासी) है। दोनों को रंगे हाथों पकड़ा गया।
इस मामले में कौन सी धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है?
यह मामला नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंसेज़ (NDPS) एक्ट, 1985 की धारा 22(बी)(ii)(बी) के तहत क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। मामले की जाँच पुलिस इंस्पेक्टर विकास डेकर कर रहे हैं।
इस छापेमारी में शामिल अधिकारी कौन थे?
छापेमारी का नेतृत्व पुलिस इंस्पेक्टर विकास डेकर ने किया। उनके साथ ASI श्रीराम सालगांवकर और कॉन्स्टेबल रितेश किनालकर, रूपेश गायकवाड़, प्रकाश उत्कुरी, करिश्मा गुडेगेरी व श्रीकृष्ण मडकर शामिल थे। पुलिस उपाधीक्षक जीवबा दलवी और पुलिस अधीक्षक (क्राइम) राहुल गुप्ता, आईपीएस मामले की निगरानी कर रहे हैं।
नाबालिग की गिरफ्तारी इस मामले को कैसे प्रभावित करती है?
नाबालिग आरोपी के मामले में जाँच किशोर न्याय (बाल देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम के प्रावधानों के तहत भी होगी। इससे यह सवाल उठता है कि तस्करी नेटवर्क युवाओं और नाबालिगों को वाहक के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, और जाँच एजेंसियों का ध्यान असली सरगनाओं तक पहुँचने पर होगा।
राष्ट्र प्रेस
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