गोवा क्राइम ब्रांच का मापुसा बस टर्मिनल पर छापा: 10.754 किलो गांजा जब्त, एक नाबालिग समेत दो हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
गोवा क्राइम ब्रांच ने 26 सितंबर 2026 को बरदेज के मापुसा इंटर-स्टेट बस टर्मिनल पर की गई छापेमारी में 10.754 किलोग्राम गांजा जब्त किया और दो संदिग्धों को हिरासत में लिया, जिनमें 17 वर्षीय एक नाबालिग भी शामिल है। जब्त मादक पदार्थ की अनुमानित बाज़ार कीमत ₹10,50,000 बताई जा रही है। यह कार्रवाई ड्रग तस्करी के विरुद्ध क्राइम ब्रांच के चल रहे अभियान का हिस्सा है।
छापेमारी का घटनाक्रम
क्राइम ब्रांच की विशेष टीम ने शुक्रवार शाम 6:19 बजे से रात 9:25 बजे के बीच मापुसा बस टर्मिनल पर नशीले पदार्थों के खिलाफ सघन तलाशी अभियान चलाया। टीम का नेतृत्व पुलिस इंस्पेक्टर विकास डेकर ने किया, जिनके साथ असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर श्रीराम सालगांवकर और पुलिस कॉन्स्टेबल रितेश किनालकर, रूपेश गायकवाड़, प्रकाश उत्कुरी, करिश्मा गुडेगेरी तथा श्रीकृष्ण मडकर शामिल थे।
आरोपियों की पहचान
हिरासत में लिए गए पहले आरोपी की पहचान गोकुला जेना (आयु 24 वर्ष, निवासी देउला, लक्ष्मण नाथ रोड, बालेश्वर, ओडिशा — पिन 756032) के रूप में हुई है। दूसरा आरोपी 17 वर्षीय नाबालिग है, जो ओडिशा के जिला भद्रक के डागरपाड़ा, पुलिस थाना नागुआन (पिन 756112) का निवासी बताया जाता है। दोनों को रंगे हाथों पकड़ा गया।
जब्ती का विवरण
तलाशी के दौरान दोनों आरोपियों के शोल्डर बैग और हैंड ट्रॉली में हरे रंग के फूल एवं फल युक्त पौधे के हिस्से छिपाए गए पाए गए, जिनके गांजा होने का संदेह है। कुल जब्त मादक सामग्री का वजन 10.754 किलोग्राम है और इसकी अनुमानित कीमत ₹10,50,000 आँकी गई है। इन सामानों को सर्च एवं जब्ती पंचनामा के तहत विधिवत ज़ब्त किया गया है।
कानूनी कार्रवाई और जाँच
यह मामला क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्स्टेंसेज़ (NDPS) एक्ट, 1985 की धारा 22(बी)(ii)(बी) के तहत दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जाँच पुलिस इंस्पेक्टर विकास डेकर कर रहे हैं, जो फिलहाल पुलिस अधीक्षक क्राइम का प्रभार भी संभाल रहे हैं। पुलिस उपाधीक्षक (क्राइम) जीवबा दलवी और पुलिस अधीक्षक (क्राइम) राहुल गुप्ता, आईपीएस इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।
आगे की दिशा
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब गोवा में ड्रग तस्करी के मार्गों पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नज़र है। नाबालिग आरोपी की संलिप्तता इस मामले को संवेदनशील बनाती है और जाँच एजेंसियाँ तस्करी के व्यापक नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।