31 अगस्त 2026
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गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट ने लूथरा बंधुओं को दो सप्ताह में सरेंडर का आदेश दिया

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गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट ने लूथरा बंधुओं को दो सप्ताह में सरेंडर का आदेश दिया

सारांश

गोवा के अरपोरा नाइटक्लब अग्निकांड में 25 मौतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को लूथरा बंधुओं की अपील ठुकराई और दो सप्ताह में सरेंडर का आदेश दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा रद्द की गई जमानत को शीर्ष अदालत ने भी बरकरार रखा।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने सौरभ लूथरा , गौरव लूथरा और अजय गुप्ता की अपीलें खारिज कर दो सप्ताह में सरेंडर का आदेश दिया।
6 दिसंबर 2025 को उत्तरी गोवा के अरपोरा स्थित 'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब में आग से 25 लोगों की मौत हुई थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जमानत रद्द करने के आदेश को बरकरार रखा।
पुलिस जाँच के अनुसार, क्लब के पास वैध सुरक्षा मंजूरी और ट्रेड लाइसेंस नहीं था; बिना सुरक्षा उपायों के इनडोर फायर शो आयोजित किया गया था।
सौरभ और गौरव लूथरा को पहले थाईलैंड से डिपोर्ट कर गिरफ्तार किया गया था।
शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट से आरोप तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया।

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को गोवा के अरपोरा स्थित 'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब अग्निकांड मामले में सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता की अपीलें खारिज करते हुए तीनों को दो सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। 6 दिसंबर 2025 की रात इस नाइटक्लब में भड़की आग में 25 लोगों की जान जा चुकी है।

मुख्य घटनाक्रम

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें तीनों आरोपियों की जमानत रद्द की गई थी। इससे पहले गोवा के मापुसा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने अजय गुप्ता को 23 मार्च और सौरभ लूथरागौरव लूथरा को 1 अप्रैल को जमानत दी थी।

गोवा सरकार ने इस निर्णय को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। 19 अगस्त को जस्टिस नीला गोखले ने राज्य की अपील स्वीकार करते हुए तीनों की जमानत रद्द कर दी। इसके बाद आरोपियों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, किंतु शीर्ष अदालत ने उनकी अपीलें ठुकरा दीं।

हादसे की पृष्ठभूमि

पुलिस जाँच के अनुसार, 6 दिसंबर 2025 की रात उत्तरी गोवा के अरपोरा स्थित इस नाइटक्लब में बिना वैध सुरक्षा मंजूरी के एक इनडोर फायर शो आयोजित किया गया था। जाँचकर्ताओं के अनुसार, क्लब के पास पर्याप्त अग्निशमन उपकरण भी नहीं थे और वह वैध ट्रेड लाइसेंस के बिना संचालित हो रहा था।

गौरतलब है कि आग लगने के कुछ घंटों बाद ही सौरभ और गौरव लूथरा के थाईलैंड भाग जाने की सूचना सामने आई थी। बाद में दोनों को थाईलैंड से डिपोर्ट कर गोवा पुलिस ने गिरफ्तार किया।

आरोप और कानूनी दायरा

आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत गैर-इरादतन हत्या, जीवन को खतरे में डालने वाले कृत्य और अग्नि-संबंधी लापरवाही समेत कई धाराओं में मामला दर्ज है। क्लब के अन्य साझेदारों, मैनेजर, इवेंट आयोजकों और कर्मचारियों को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश

शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट से आरोप तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का भी आग्रह किया है। यह निर्देश इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका इस मामले में विलंब को स्वीकार्य नहीं मानती, विशेष रूप से जब 25 परिवार न्याय की प्रतीक्षा में हैं।

आगे क्या होगा

तीनों आरोपियों को अब दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने के बाद मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह मामला देशभर में नाइटक्लब और सार्वजनिक स्थलों पर अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर एक बड़े नीतिगत बहस की ओर इशारा करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 25 मौतों के बावजूद आरोपी इतने महीनों तक जमानत पर बाहर कैसे रहे। थाईलैंड भागने और डिपोर्ट होने की घटना यह भी दर्शाती है कि प्रारंभिक जाँच में फरार होने के जोखिम को पर्याप्त गंभीरता से नहीं लिया गया। इससे भी बड़ा मुद्दा यह है कि गोवा जैसे पर्यटन-केंद्रित राज्य में नाइटलाइफ प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा नियमों की निगरानी की व्यवस्था कितनी खोखली है — जहाँ बिना लाइसेंस और बिना सुरक्षा उपकरणों के इनडोर फायर शो आयोजित हो सका। ट्रायल में तेजी के निर्देश सही दिशा में हैं, पर जब तक प्रणालीगत जवाबदेही नहीं होगी, ऐसे हादसे दोहराए जाते रहेंगे।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवा नाइटक्लब अग्निकांड में सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता की अपीलें खारिज करते हुए तीनों को दो सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। साथ ही, बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा रद्द की गई इनकी जमानत को भी बरकरार रखा।
'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब में आग कैसे लगी?
पुलिस जाँच के अनुसार, 6 दिसंबर 2025 की रात उत्तरी गोवा के अरपोरा स्थित इस नाइटक्लब में बिना वैध सुरक्षा मंजूरी और पर्याप्त अग्निशमन उपकरणों के एक इनडोर फायर शो आयोजित किया गया, जिसके दौरान आग भड़क गई। क्लब वैध ट्रेड लाइसेंस के बिना भी संचालित हो रहा था।
लूथरा बंधुओं की जमानत क्यों रद्द की गई?
गोवा के मापुसा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने पहले जमानत दी थी, लेकिन गोवा सरकार ने इसे बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। 19 अगस्त को जस्टिस नीला गोखले ने राज्य की अपील स्वीकार कर तीनों की जमानत रद्द कर दी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
लूथरा बंधु थाईलैंड क्यों गए थे और उन्हें कैसे लाया गया?
आग लगने के कुछ घंटों बाद ही सौरभ और गौरव लूथरा के थाईलैंड भाग जाने की बात सामने आई। बाद में दोनों को थाईलैंड से डिपोर्ट किया गया और गोवा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया।
आरोपियों पर कौन-सी धाराओं में मामला दर्ज है?
आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत गैर-इरादतन हत्या, जीवन को खतरे में डालने वाले कृत्य और अग्नि-संबंधी लापरवाही समेत कई धाराओं में मामला दर्ज है। क्लब के साझेदारों, मैनेजर, इवेंट आयोजकों और कर्मचारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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