गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट ने लूथरा बंधुओं को दो सप्ताह में सरेंडर का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को गोवा के अरपोरा स्थित 'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइटक्लब अग्निकांड मामले में सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता की अपीलें खारिज करते हुए तीनों को दो सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। 6 दिसंबर 2025 की रात इस नाइटक्लब में भड़की आग में 25 लोगों की जान जा चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें तीनों आरोपियों की जमानत रद्द की गई थी। इससे पहले गोवा के मापुसा की अतिरिक्त सत्र अदालत ने अजय गुप्ता को 23 मार्च और सौरभ लूथरा व गौरव लूथरा को 1 अप्रैल को जमानत दी थी।
गोवा सरकार ने इस निर्णय को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी। 19 अगस्त को जस्टिस नीला गोखले ने राज्य की अपील स्वीकार करते हुए तीनों की जमानत रद्द कर दी। इसके बाद आरोपियों ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया, किंतु शीर्ष अदालत ने उनकी अपीलें ठुकरा दीं।
हादसे की पृष्ठभूमि
पुलिस जाँच के अनुसार, 6 दिसंबर 2025 की रात उत्तरी गोवा के अरपोरा स्थित इस नाइटक्लब में बिना वैध सुरक्षा मंजूरी के एक इनडोर फायर शो आयोजित किया गया था। जाँचकर्ताओं के अनुसार, क्लब के पास पर्याप्त अग्निशमन उपकरण भी नहीं थे और वह वैध ट्रेड लाइसेंस के बिना संचालित हो रहा था।
गौरतलब है कि आग लगने के कुछ घंटों बाद ही सौरभ और गौरव लूथरा के थाईलैंड भाग जाने की सूचना सामने आई थी। बाद में दोनों को थाईलैंड से डिपोर्ट कर गोवा पुलिस ने गिरफ्तार किया।
आरोप और कानूनी दायरा
आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत गैर-इरादतन हत्या, जीवन को खतरे में डालने वाले कृत्य और अग्नि-संबंधी लापरवाही समेत कई धाराओं में मामला दर्ज है। क्लब के अन्य साझेदारों, मैनेजर, इवेंट आयोजकों और कर्मचारियों को भी इस मामले में आरोपी बनाया गया है।
सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश
शीर्ष अदालत ने ट्रायल कोर्ट से आरोप तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का भी आग्रह किया है। यह निर्देश इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका इस मामले में विलंब को स्वीकार्य नहीं मानती, विशेष रूप से जब 25 परिवार न्याय की प्रतीक्षा में हैं।
आगे क्या होगा
तीनों आरोपियों को अब दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा। ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होने के बाद मुकदमे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। यह मामला देशभर में नाइटक्लब और सार्वजनिक स्थलों पर अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर एक बड़े नीतिगत बहस की ओर इशारा करता है।