28 अक्टूबर 2026
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गोमती नदी में एक लाख फिंगरलिंग्स छोड़े गए, 'फिश रिवर रैंचिंग प्रोग्राम 2026-27' से मत्स्य पालन को बढ़ावा

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गोमती नदी में एक लाख फिंगरलिंग्स छोड़े गए, 'फिश रिवर रैंचिंग प्रोग्राम 2026-27' से मत्स्य पालन को बढ़ावा

सारांश

गोमती नदी में एक लाख फिंगरलिंग्स छोड़ने के साथ उत्तर प्रदेश ने 'फिश रिवर रैंचिंग प्रोग्राम 2026-27' की शुरुआत की। यह पहल जलीय पारिस्थितिकी बहाल करने और निषाद समेत मत्स्य पालन समुदायों की आजीविका सुदृढ़ करने की दिशा में राज्य सरकार का ठोस कदम है।

मुख्य बातें

28 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में गोमती नदी में एक लाख फिंगरलिंग्स प्रवाहित किए गए।
कार्यक्रम 'फिश रिवर रैंचिंग प्रोग्राम 2026-27' के अंतर्गत लक्ष्मण पार्क के निकट आयोजित हुआ।
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मत्स्य मंत्री डॉ.
संजय कुमार निषाद कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
पहल का उद्देश्य जलीय पारिस्थितिकी का संतुलन बनाए रखना और मत्स्य पालन समुदायों की आय बढ़ाना है।
राज्यभर में नाव संचालकों को बीमा कवर देने की योजना भी घोषित की गई।
राज्य की अन्य नदियों में भी इसी अभियान के तहत फिंगरलिंग्स छोड़े जाने की योजना है।

लखनऊ में 28 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार के 'फिश रिवर रैंचिंग प्रोग्राम 2026-27' के अंतर्गत गोमती नदी में मछलियों के एक लाख बच्चों (फिंगरलिंग्स) को प्रवाहित किया गया। लक्ष्मण पार्क के निकट आयोजित इस कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद की उपस्थिति में यह पहल संपन्न हुई। इस कदम का उद्देश्य जलीय पारिस्थितिकी का संतुलन बहाल करना, नदी में मछलियों का संरक्षण सुनिश्चित करना और मत्स्य पालन पर आश्रित समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ बनाना है।

कार्यक्रम का विवरण

लक्ष्मण पार्क के पास गोमती नदी के तट पर आयोजित इस समारोह में दोनों वरिष्ठ मंत्रियों ने स्वयं फिंगरलिंग्स को नदी में छोड़ा। यह कार्यक्रम केंद्र सरकार की नदी मत्स्य संरक्षण योजना के अनुरूप संचालित हो रहा है और राज्य की विभिन्न नदियों में इसी तर्ज पर अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस वर्ष के कार्यक्रम का दायरा पिछले वर्षों की तुलना में व्यापक है।

मंत्रियों की प्रतिक्रिया

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस महत्वाकांक्षी योजना को ज़मीन पर उतारा है। पाठक ने कहा कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश की नदियों में फिंगरलिंग्स छोड़ना अत्यंत आवश्यक है।

पाठक ने पिछली सरकारों पर इस दिशा में पर्याप्त ध्यान न देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि डॉ. निषाद ने निषाद समुदाय के हितों के लिए निरंतर प्रयास किए हैं और मत्स्य पालन क्षेत्र में रोज़गार व आय बढ़ाने के लिए काम किया है।

मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी का आभार जताते हुए कहा कि बीते 70 वर्षों में पूर्व की सरकारों ने नदी मत्स्य संरक्षण पर समुचित ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि इस अभियान का मूल लक्ष्य जलीय जीवन को बनाए रखना, मछुआरों की आय बढ़ाना और रोज़गार के नए अवसर सृजित करना है।

आजीविका और बीमा सुरक्षा

उप मुख्यमंत्री पाठक ने इस अवसर पर यह भी बताया कि राज्यभर में नाव संचालकों को बीमा कवर उपलब्ध कराना सरकार की एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है। उनके अनुसार, नाव चलाकर जीविका अर्जित करने वाले लोगों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए यह बीमा योजना लागू की जा रही है। गौरतलब है कि यह समुदाय अब तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की परिधि से काफी हद तक बाहर रहा है।

राजनीतिक संदर्भ

कार्यक्रम के मौके पर उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर पाठक ने कहा कि बेहतर चुनाव प्रबंधन के कारण भारतीय जनता पार्टी (BJP) चुनावों में सफलता अर्जित कर रही है। उन्होंने समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद विपक्षी दल साख बचाने के लिए निराधार बयान देते हैं।

आगे की राह

इस पहल के तहत राज्य की अन्य नदियों में भी फिंगरलिंग्स छोड़े जाने की योजना है। मत्स्य विभाग के अनुसार, इस अभियान से दीर्घकालिक रूप से नदियों में मछलियों का घनत्व बढ़ेगा, जिससे मत्स्य पालन पर निर्भर समुदायों को सीधा लाभ मिलेगा। यह देखा जाएगा कि नदी पारिस्थितिकी पर यह हस्तक्षेप किस हद तक स्थायी प्रभाव छोड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गोमती जैसी प्रदूषित नदी में इनके टिकने की दर पर कोई स्वतंत्र डेटा सार्वजनिक नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या यह कार्यक्रम जल-गुणवत्ता सुधार से समन्वित है — क्योंकि बिना स्वच्छ जल के फिंगरलिंग्स छोड़ना दीर्घकालिक समाधान नहीं है। राज्य सरकार की नाव-संचालक बीमा योजना एक सकारात्मक कदम है, परंतु उसके क्रियान्वयन और लाभार्थियों की वास्तविक संख्या का ब्यौरा अभी तक सामने नहीं आया है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फिश रिवर रैंचिंग प्रोग्राम 2026-27 क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार की एक योजना है जिसके तहत राज्य की नदियों में मछलियों के बच्चों (फिंगरलिंग्स) को छोड़कर जलीय पारिस्थितिकी का संतुलन बनाए रखा जाता है। इसका उद्देश्य मछलियों का संरक्षण करना, मत्स्य पालन पर निर्भर समुदायों की आय बढ़ाना और रोज़गार के नए अवसर पैदा करना है।
गोमती नदी में कितने फिंगरलिंग्स छोड़े गए और कहाँ?
28 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के लक्ष्मण पार्क के निकट गोमती नदी में एक लाख फिंगरलिंग्स प्रवाहित किए गए। यह कार्यक्रम उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
इस पहल से मत्स्य पालन समुदाय को क्या लाभ होगा?
मत्स्य मंत्री डॉ. निषाद के अनुसार नदियों में फिंगरलिंग्स छोड़ने से मछलियों का घनत्व बढ़ेगा, जिससे मछुआरों को अधिक मत्स्य उत्पादन और बेहतर आमदनी मिल सकेगी। इसके अलावा नाव संचालकों को बीमा कवर देने की घोषणा से उन्हें आर्थिक सुरक्षा भी मिलेगी।
क्या यह अभियान केवल गोमती नदी तक सीमित है?
नहीं, मत्स्य विभाग के अनुसार इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश की विभिन्न नदियों में फिंगरलिंग्स छोड़े जा रहे हैं। गोमती में लखनऊ कार्यक्रम इस व्यापक राज्यस्तरीय अभियान की एक कड़ी है।
नाव संचालकों को बीमा कवर कब से मिलेगा?
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने राज्यभर के नाव संचालकों को बीमा कवर उपलब्ध कराने की घोषणा की है, हालाँकि क्रियान्वयन की सटीक समय-सीमा और लाभार्थियों की संख्या का विस्तृत ब्यौरा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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