28 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026: नावों को मिलेगी विशिष्ट पंजीकरण संख्या, घाटों पर सुरक्षा अनिवार्य

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026: नावों को मिलेगी विशिष्ट पंजीकरण संख्या, घाटों पर सुरक्षा अनिवार्य

सारांश

उत्तर प्रदेश में नदी परिवहन अब सिर्फ़ परंपरा नहीं — एक विनियमित क्षेत्र बनने की राह पर है। योगी सरकार की प्रस्तावित अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026 नावों को विशिष्ट पंजीकरण संख्या, घाटों पर अनिवार्य सुरक्षा उपकरण और नाविकों के लिए कल्याण निधि देने का खाका खींचती है — 2002 के पुराने नियमों की जगह एक आधुनिक ढाँचा।

मुख्य बातें

योगी सरकार प्रस्तावित अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026 के तहत उत्तर प्रदेश में नदी परिवहन की नई नियामक व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है।
यंत्रचालित जलयानों को 10 अंकों/अक्षरों और गैर-यांत्रिक जलयानों को 12 अंकों/अक्षरों की विशिष्ट पंजीकरण संख्या दी जाएगी।
जल परिवहन राजस्व से राज्य विकास निधि और जिला स्तर पर जिला कल्याण निधि गठित की जाएगी।
घाटों पर स्थायी प्रकाश व्यवस्था, लाइफ बॉय, गोताखोर और आपातकालीन बचाव नाव ( 1:10 अनुपात ) अनिवार्य होगी।
नाव दुर्घटना रोकथाम हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित होगी।
नियमावली लागू होने पर पहले से चल रहे जलयानों को नए मानकों के अनुसार ढालने के लिए 90 दिन का समय मिलेगा।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार प्रस्तावित अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026 के तहत नदी आधारित परिवहन को सुरक्षित और व्यवस्थित करने की दिशा में एक व्यापक नियामक ढाँचा तैयार कर रही है। इस नियमावली के अंतर्गत यंत्रचालित जलयानों को 10 अंकों या अक्षरों तथा गैर-यांत्रिक जलयानों को 12 अंकों या अक्षरों की विशिष्ट पंजीकरण संख्या दी जाएगी। 28 अक्टूबर 2026 को यूपी परिवहन विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार यह नई व्यवस्था गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती, गंडक और बेतवा सहित प्रदेश की प्रमुख नदियों में संचालित जलयानों पर लागू होगी।

नियमावली में क्या है खास

प्रस्तावित नियमावली में कुल 16 अध्याय हैं। पहले 14 अध्याय यंत्रचालित जलयानों से संबंधित हैं, 15वाँ अध्याय गैर-यांत्रिक जलयानों के लिए है, जबकि 16वें अध्याय में दोनों प्रकार के जलयानों पर लागू सामान्य प्रावधान शामिल हैं। यह नियमावली भारत सरकार के अंतर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021 के अनुरूप तैयार की जा रही है और उत्तर प्रदेश के वर्ष 2002 के नियमों का स्थान लेगी।

नियमावली लागू होने के बाद पहले से संचालित जलयानों को नए मानकों के अनुसार ढालने के लिए 90 दिन का समय दिया जाएगा। किसी भी असंगति की स्थिति में केंद्रीय अधिनियम के प्रावधान मान्य होंगे।

पंजीकरण और सर्वेक्षण की व्यवस्था

यंत्रचालित जलयानों के पंजीकरण के लिए प्रत्येक जिले में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) को पंजीकरण अधिकारी नामित करने का प्रावधान है। गैर-यांत्रिक जलयानों के लिए जिला स्तर पर मोटरयान निरीक्षक और तहसील स्तर पर सहायक मोटरयान निरीक्षक नामांकन प्राधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।

जलयानों के सर्वेक्षण और मूल्यांकन की जिम्मेदारी राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौवहन संस्थान (NINI), पटना को सौंपी गई है। गौरतलब है कि यह विशिष्ट पंजीकरण संख्या जलयानों की पहचान सुनिश्चित करने, संचालन संबंधी जानकारी व्यवस्थित रखने और नियामक निगरानी को मज़बूत करने में सहायक होगी।

वित्तीय निधियाँ और नाविक कल्याण

नियमावली में जल परिवहन से प्राप्त शुल्क और जुर्माने के माध्यम से यंत्रचालित जलयानों के लिए राज्य विकास निधि गठित करने की व्यवस्था है। गैर-यांत्रिक जलयानों से जुड़ी गतिविधियों के लिए जिला स्तर पर जिला कल्याण निधि बनाई जाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार नदी पर्यटन और माल ढुलाई को आर्थिक विकास के नए स्रोत के रूप में देख रही है। इन निधियों का उद्देश्य नाविकों के कल्याण के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना और क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास को सुनिश्चित करना बताया गया है।

घाटों पर सुरक्षा के नए मानक

यात्रियों की सुरक्षा के लिए घाटों पर स्थायी प्रकाश व्यवस्था, साइनबोर्ड, लाइफ बॉय और गोताखोरों की उपलब्धता अनिवार्य करने का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक यात्रा से पूर्व यात्रियों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देना भी अनिवार्य होगा।

नावों में यात्रियों की निर्धारित क्षमता से 10 प्रतिशत अधिक लाइफ जैकेट, 10 मीटर की रस्सी और प्राथमिक उपचार पेटी उपलब्ध रखना अनिवार्य होगा। आपातकालीन बचाव नावों की व्यवस्था 1:10 के अनुपात में रखी जाएगी।

प्रशासनिक जवाबदेही का ढाँचा

नाव दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति गठित की जाएगी। घाटों के पट्टे, रख-रखाव, संचालन और सुरक्षा की जिम्मेदारियाँ स्थानीय निकायों, विकास प्राधिकरणों और जिला समितियों के माध्यम से निर्धारित होंगी।

नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन से यात्रियों का भरोसा बढ़ाने, दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करने और नदी आधारित आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की उम्मीद जताई जा रही है। आने वाले महीनों में इस नियमावली के लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश की नदियों में जल परिवहन की तस्वीर काफ़ी हद तक बदल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की ज़मीनी क्षमता का है — राज्य में हज़ारों अनौपचारिक नाविक हैं जो दशकों से बिना किसी दस्तावेज़ के काम कर रहे हैं। 90 दिन की संक्रमण अवधि उन नाविकों के लिए पर्याप्त है या नहीं, यह देखना होगा जिनके पास न बैंक खाता है, न कागज़ात। इसके अलावा, NINI पटना को सर्वेक्षण की जिम्मेदारी देने से भौगोलिक दूरी की बाधा आ सकती है — उत्तर प्रदेश की नदियों पर हज़ारों जलयानों का मूल्यांकन एक बाहरी संस्था कितनी तेज़ी से कर पाएगी, यह अनुत्तरित है। नियमावली 2002 के नियमों की जगह लेती है, लेकिन पुराने नियमों के कमज़ोर अनुपालन के कारणों की पड़ताल किए बिना नया ढाँचा भी उन्हीं राहों पर चल सकता है।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026 क्या है?
यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तावित नई नियामक व्यवस्था है जो राज्य की नदियों में चलने वाले यंत्रचालित और गैर-यांत्रिक जलयानों के पंजीकरण, सुरक्षा मानकों और घाट प्रबंधन को नियंत्रित करेगी। यह भारत सरकार के अंतर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021 के अनुरूप है और 2002 के पुराने नियमों की जगह लेगी।
नई नियमावली में नावों को कौन-सी पंजीकरण संख्या दी जाएगी?
यंत्रचालित जलयानों को 10 अंकों या अक्षरों की और गैर-यांत्रिक जलयानों को 12 अंकों या अक्षरों की विशिष्ट पंजीकरण संख्या दी जाएगी। इससे जलयानों की पहचान और नियामक निगरानी सुनिश्चित होगी।
घाटों पर सुरक्षा के लिए क्या प्रावधान किए गए हैं?
घाटों पर स्थायी प्रकाश व्यवस्था, साइनबोर्ड, लाइफ बॉय और गोताखोरों की उपलब्धता अनिवार्य होगी। नावों में यात्री क्षमता से 10 प्रतिशत अधिक लाइफ जैकेट, 10 मीटर की रस्सी और प्राथमिक उपचार पेटी रखना भी ज़रूरी होगा। आपातकालीन बचाव नावें 1:10 के अनुपात में तैनात रहेंगी।
नाविकों के कल्याण के लिए क्या प्रावधान हैं?
गैर-यांत्रिक जलयानों से जुड़ी गतिविधियों के लिए जिला स्तर पर जिला कल्याण निधि बनाई जाएगी, जबकि यंत्रचालित जलयानों के लिए राज्य विकास निधि गठित होगी। ये निधियाँ जल परिवहन से प्राप्त शुल्क और जुर्माने से भरी जाएंगी।
पहले से संचालित जलयानों को नए नियमों के अनुरूप ढलने के लिए कितना समय मिलेगा?
नियमावली लागू होने के बाद पहले से चल रहे जलयानों को नए मानकों के अनुसार बदलाव करने के लिए 90 दिन का समय दिया जाएगा। इस अवधि के बाद नए नियमों का पालन न करने पर नियामक कार्रवाई हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 5 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले