17 अगस्त 2026
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यूपी में राशन वितरण से बिचौलिए बाहर: सीएम योगी ने गिनाए ई-पॉस व्यवस्था के फायदे, ₹500 करोड़ से बनेंगे अन्नपूर्णा भवन

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यूपी में राशन वितरण से बिचौलिए बाहर: सीएम योगी ने गिनाए ई-पॉस व्यवस्था के फायदे, ₹500 करोड़ से बनेंगे अन्नपूर्णा भवन

सारांश

यूपी में राशन वितरण की कहानी बदल रही है — ई-पॉस मशीन, सीधी डिलीवरी और अब फीडबैक प्रणाली से बिचौलियों का युग खत्म हुआ। सीएम योगी ने 15 करोड़ लाभार्थियों और ₹500 करोड़ के अन्नपूर्णा भवन की घोषणा के साथ स्पष्ट किया कि तकनीक ही पारदर्शिता की असली गारंटी है।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 17 अगस्त को लखनऊ में ई-पॉस आधारित उचित दर विक्रेता फीडबैक प्रणाली का शुभारंभ किया।
2017 से ई-पॉस मशीन और एफसीआई गोदाम से सीधे दुकान तक डिलीवरी से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई।
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत प्रदेश के करीब 15 करोड़ लोगों को निशुल्क राशन मिल रहा है।
उचित दर की दुकानों को अन्नपूर्णा भवन के रूप में विकसित करने के लिए ₹500 करोड़ का बजट प्रावधान।
करीब 2 करोड़ परिवारों को निशुल्क रसोई गैस और 1.53 करोड़ परिवारों को निशुल्क बिजली कनेक्शन दिए गए।
ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1.60 करोड़ बच्चों को स्कूल बैग, यूनिफॉर्म और अन्य सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार, 17 अगस्त को लखनऊ में सिंगल स्टेज डोर-स्टेप डिलीवरी के अंतर्गत ई-पॉस आधारित उचित दर विक्रेता फीडबैक प्रणाली के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में राशन वितरण से बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2017 से लागू ई-पॉस मशीन और एफसीआई गोदाम से सीधे कोटे की दुकान तक राशन पहुँचाने की व्यवस्था ने न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित की है, बल्कि उचित दर विक्रेताओं — जिन्हें कोटेदार भी कहा जाता है — की सामाजिक प्रतिष्ठा भी बहाल की है।

ई-पॉस व्यवस्था: कैसे बदली राशन की तस्वीर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि 2017 से पहले राशन शासन स्तर से ही नहीं पहुँचता था, और इसकी सज़ा उचित दर विक्रेताओं को भुगतनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि गलती किसी और की होती थी, लेकिन बदनामी कोटेदार के हिस्से आती थी — उस समय उनकी पहचान और सम्मान दोनों संकट में थे।

ई-पॉस मशीन की स्थापना के बाद भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदाम से सीधे उचित दर की दुकान तक राशन पहुँचाने की व्यवस्था लागू की गई। इस एकल-चरण डोर-स्टेप डिलीवरी मॉडल ने बिचौलियों की पूरी श्रृंखला को खत्म कर दिया और कोटेदारों को मिलने वाला कमीशन भी बढ़ाया।

फीडबैक प्रणाली: जवाबदेही का नया ढाँचा

नई ई-पॉस आधारित फीडबैक प्रणाली के ज़रिए उचित दर विक्रेता अपनी समस्याएँ और सुझाव सीधे शासन तक पहुँचा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से राशन वितरण में जवाबदेही तय की गई है और यह प्रणाली व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाएगी।

यह ऐसे समय में आया है जब प्रदेश सरकार राशन वितरण के डिजिटलीकरण को अगले स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि ई-पॉस मशीनों के ज़रिए लाभार्थियों की बायोमेट्रिक पहचान पहले से ही अनिवार्य है।

अन्नपूर्णा भवन: ₹500 करोड़ का प्रावधान

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर प्रदेश में उचित दर की दुकानों को अन्नपूर्णा भवन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके लिए राज्य सरकार ने ₹500 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। इन भवनों में राशन वितरण के साथ-साथ भंडारण की सुविधा भी होगी। उनका कहना था कि सरकार का उद्देश्य इन दुकानों को केवल राशन वितरण केंद्र नहीं, बल्कि सुविधायुक्त और सम्मानजनक संस्थान बनाना है।

15 करोड़ लाभार्थी, 2 करोड़ गैस कनेक्शन

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत प्रदेश के करीब 15 करोड़ लोग निशुल्क राशन प्राप्त कर रहे हैं। निराश्रित और दिव्यांगजनों तक भी राशन पहुँचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

इसके अलावा, प्रदेश में करीब 2 करोड़ परिवारों को निशुल्क रसोई गैस कनेक्शन और 1.53 करोड़ परिवारों को निशुल्क बिजली कनेक्शन दिए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब व्यवस्था में पारदर्शिता आती है तो गरीब, किसान, महिला और वंचित वर्ग को योजनाओं का सीधा लाभ मिलता है — तभी वास्तविक परिवर्तन दिखाई देता है।

शिक्षा क्षेत्र में बदलाव का उल्लेख

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राशन व्यवस्था के साथ-साथ बेसिक शिक्षा में हुए सुधारों का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से परिषदीय स्कूलों में बेहतर फर्श, बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय और फर्नीचर जैसी बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। करीब 1.60 करोड़ बच्चों को स्कूल बैग, यूनिफॉर्म, स्वेटर और अन्य सुविधाएँ दी जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि किसी राज्य की प्रगति केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि ज़मीन पर दिखाई देने वाले परिणामों से तय होती है। आगे सरकार का ध्यान इन व्यवस्थाओं को और मज़बूत करने पर रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि फीडबैक प्रणाली केवल औपचारिकता न बने — कोटेदारों की शिकायतें वास्तव में नीतिगत सुधारों में तब्दील हों। ₹500 करोड़ के अन्नपूर्णा भवन की घोषणा महत्वाकांक्षी है, परंतु इसके क्रियान्वयन की समयसीमा और जवाबदेही तंत्र अभी स्पष्ट नहीं है। गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में डिजिटलीकरण के बावजूद लाभार्थियों के बायोमेट्रिक सत्यापन में विफलता की शिकायतें आती रही हैं। बिना स्वतंत्र ऑडिट के, 15 करोड़ लाभार्थियों के दावे को परखना मुश्किल रहेगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उत्तर प्रदेश में ई-पॉस आधारित राशन वितरण व्यवस्था क्या है?
ई-पॉस (इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल) मशीन आधारित व्यवस्था 2017 में शुरू की गई थी, जिसके तहत लाभार्थियों की बायोमेट्रिक पहचान के बाद राशन दिया जाता है। इसके साथ एफसीआई गोदाम से सीधे उचित दर की दुकान तक राशन पहुँचाने की सिंगल स्टेज डिलीवरी व्यवस्था लागू की गई, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई।
अन्नपूर्णा भवन योजना क्या है और इसके लिए कितना बजट है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में उचित दर की दुकानों को अन्नपूर्णा भवन के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके लिए राज्य सरकार ने ₹500 करोड़ का प्रावधान किया है। इन भवनों में राशन वितरण के साथ-साथ भंडारण की सुविधा भी होगी।
यूपी में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से कितने लोग लाभान्वित हो रहे हैं?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, इस योजना के तहत उत्तर प्रदेश में करीब 15 करोड़ लोगों को निशुल्क राशन मिल रहा है। निराश्रित और दिव्यांगजनों तक भी राशन पहुँचाने की विशेष व्यवस्था की गई है।
ई-पॉस फीडबैक प्रणाली से उचित दर विक्रेताओं को क्या फायदा होगा?
नई फीडबैक प्रणाली के ज़रिए उचित दर विक्रेता अपनी समस्याएँ और सुझाव सीधे शासन तक पहुँचा सकेंगे। इससे उनकी शिकायतों का त्वरित निपटारा संभव होगा और व्यवस्था में जवाबदेही और बढ़ेगी।
2017 से पहले और बाद में यूपी की राशन व्यवस्था में क्या फर्क आया?
2017 से पहले राशन शासन स्तर से ही नहीं पहुँचता था और बिचौलियों का बोलबाला था — गरीबों के राशन कार्ड प्रभावशाली लोगों के पास रहते थे। 2017 के बाद ई-पॉस मशीन, बायोमेट्रिक सत्यापन और सीधी डिलीवरी से पारदर्शिता आई और कोटेदारों का कमीशन व सामाजिक प्रतिष्ठा दोनों बढ़े।
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