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ग्रुप ऑफ 77 की 50वीं बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री का आह्वान: ग्लोबल साउथ बने 'रूल शेपर्स'

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ग्रुप ऑफ 77 की 50वीं बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री का आह्वान: ग्लोबल साउथ बने 'रूल शेपर्स'

सारांश

न्यूयॉर्क में जी77 की 50वीं बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ संदेश दिया — ग्लोबल साउथ अब नियम मानने वाला नहीं, नियम बनाने वाला बनेगा। यूएनएससी सुधार की माँग के साथ भारत ने एक बार फिर विकासशील देशों के नेतृत्व का दावा पेश किया।

मुख्य बातें

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में जी77 की 50वीं वार्षिक बैठक में भारत का पक्ष रखा।
बैठक का विषय 'ग्लोबल साउथ और बहुपक्षवाद का भविष्य' था।
मिस्री ने ग्लोबल साउथ को 'रूल टेकर्स' से 'रूल शेपर्स' बनाने के लिए सामूहिक प्रयास का आह्वान किया।
यूएनएससी सुधार और विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की तत्काल ज़रूरत रेखांकित की गई।
ग्रुप ऑफ 77 की स्थापना 15 जून 1964 को हुई थी; अब इसमें 134 सदस्य देश हैं और भारत संस्थापक सदस्य है।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र के समानांतर आयोजित ग्रुप ऑफ 77 (जी77) की विदेश मंत्री-स्तरीय 50वीं वार्षिक बैठक में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने विकास-उन्मुख बहुपक्षवाद को सशक्त करने और ग्लोबल साउथ की वैश्विक भूमिका को विस्तार देने की ज़रूरत पर बल दिया।

बैठक का विषय और भारत का रुख

इस वर्ष की बैठक का केंद्रीय विषय 'ग्लोबल साउथ और बहुपक्षवाद का भविष्य' था। मिस्री ने जन-केंद्रित और विकास-उन्मुख बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाने में जी77 की निरंतर प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह संगठन विकासशील देशों की सामूहिक आकांक्षाओं का सबसे प्रभावशाली मंच बना हुआ है।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बैठक की जानकारी साझा की और मिस्री की पोस्ट को री-शेयर किया।

यूएनएससी सुधार की माँग

मिस्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की तत्काल आवश्यकता को भी दृढ़ता से उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि विकासशील देशों की आवाज़ और प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किए बिना वैश्विक शासन व्यवस्था में न्यायसंगत भागीदारी संभव नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर यूएनएससी की संरचना और वीटो प्रणाली को लेकर व्यापक बहस जारी है।

'रूल टेकर्स' से 'रूल शेपर्स' तक

भारत की ग्लोबल साउथ नीति को स्पष्ट करते हुए मिस्री ने ग्लोबल साउथ के देशों को 'रूल टेकर्स' (नियम मानने वालों) की बजाय 'रूल शेपर्स' (नियम बनाने वालों) की भूमिका में लाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। गौरतलब है कि भारत पिछले कुछ वर्षों से जी20 और अन्य मंचों पर ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करने की कोशिश में है, और यह बयान उसी रणनीतिक दिशा की अगली कड़ी है।

ग्रुप ऑफ 77: पृष्ठभूमि और महत्व

ग्रुप ऑफ 77 संयुक्त राष्ट्र में विकासशील देशों का सबसे बड़ा अंतर-सरकारी गठबंधन है। इसकी स्थापना 15 जून 1964 को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) के दौरान 77 संस्थापक देशों ने की थी। भारत इसके संस्थापक सदस्यों में से एक है।

समय के साथ इस गठबंधन का विस्तार हुआ और अब इसमें 134 सदस्य देश शामिल हैं, हालाँकि ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए इसका मूल नाम बरकरार रखा गया है। 10 से 25 अक्टूबर 1967 को अल्जीयर्स (अल्जीरिया) में हुई पहली मंत्री-स्तरीय बैठक में 'अल्जीयर्स चार्टर' को अपनाया गया था। तब से एक स्थायी संस्थागत ढाँचे का विकास हुआ, जिसके तहत जिनेवा, नैरोबी, पेरिस, रोम, वियना और वाशिंगटन डी.सी. में इसके चैप्टर व संपर्क कार्यालय स्थापित हैं।

आगे की राह

यूएनजीए के इस सत्र में भारत के सक्रिय कूटनीतिक रुख से स्पष्ट है कि नई दिल्ली ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंचों पर और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में प्रतिबद्ध है। आने वाले महीनों में यूएनएससी सुधार पर होने वाली बातचीत में भारत की यह स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ स्थायी सीट के दावेदार खुद आपस में प्रतिस्पर्धी हैं। भारत का यह रुख कूटनीतिक रूप से सशक्त है, पर जब तक वीटो-धारी देश सुधार की मेज़ पर नहीं बैठते, यह एक नैतिक स्थिति से अधिक कुछ नहीं बन पाती।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रुप ऑफ 77 (जी77) की 50वीं बैठक कहाँ और किस विषय पर हुई?
यह बैठक 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में यूएनजीए के 81वें सत्र के समानांतर आयोजित हुई। इसका विषय 'ग्लोबल साउथ और बहुपक्षवाद का भविष्य' था।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने जी77 बैठक में क्या कहा?
मिस्री ने जन-केंद्रित और विकास-उन्मुख बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने में जी77 की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने ग्लोबल साउथ को 'रूल टेकर्स' से 'रूल शेपर्स' की भूमिका में लाने और यूएनएससी में सुधार की माँग की।
ग्रुप ऑफ 77 क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
ग्रुप ऑफ 77 संयुक्त राष्ट्र में विकासशील देशों का सबसे बड़ा अंतर-सरकारी गठबंधन है। इसकी स्थापना 15 जून 1964 को जिनेवा में 77 संस्थापक देशों ने की थी; अब इसमें 134 सदस्य देश हैं और भारत संस्थापक सदस्य है।
भारत यूएनएससी सुधार की माँग क्यों कर रहा है?
भारत का मानना है कि मौजूदा यूएनएससी संरचना विकासशील देशों की आवाज़ और प्रतिनिधित्व को पर्याप्त रूप से नहीं दर्शाती। मिस्री के अनुसार, ग्लोबल साउथ की न्यायसंगत भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए यह सुधार तत्काल ज़रूरी है।
ग्लोबल साउथ को 'रूल शेपर्स' बनाने का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि विकासशील देश अंतरराष्ट्रीय नियमों और नीतियों को केवल स्वीकार करने की बजाय उन्हें बनाने और आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाएँ। भारत इस अवधारणा को जी20 और जी77 जैसे मंचों पर लगातार आगे बढ़ा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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