26 सितंबर 2026
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ग्लोबल साउथ को नियम बनाने होंगे: UNGA81 में विक्रम मिस्री का G77 को आह्वान

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ग्लोबल साउथ को नियम बनाने होंगे: UNGA81 में विक्रम मिस्री का G77 को आह्वान

सारांश

UNGA81 में भारत ने ग्लोबल साउथ के लिए बड़ा संदेश दिया — विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने G77 की 50वीं बैठक में कहा कि विकासशील देशों को अब नियम पालने की नहीं, नियम गढ़ने की भूमिका निभानी होगी। UNSC सुधार और AI-आधारित विकास पर भी भारत ने अपना पक्ष स्पष्ट किया।

मुख्य बातें

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में G77 की 50वीं सालाना बैठक में भारत का राष्ट्रीय बयान दिया।
मिस्री ने ग्लोबल साउथ को 'नियम मानने वाले' से 'नियम बनाने वाले' की भूमिका में आने का आह्वान किया।
UNSC में विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व को मजबूत किए बिना सच्चा बहुपक्षवाद असंभव — मिस्री।
UN की डिप्टी सेक्रेटरी-जनरल अमीना जे.
मोहम्मद से मुलाकात में AI और सतत विकास पर चर्चा।
भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल को समावेशी विकास के उदाहरण के रूप में पेश किया।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र (UNGA81) के दौरान 'ग्रुप ऑफ 77' (G77) के विदेश मंत्रियों की 50वीं सालाना बैठक में भारत का राष्ट्रीय बयान दिया। इस बैठक का केंद्रीय विषय 'ग्लोबल साउथ और बहुपक्षवाद का भविष्य' था। मिस्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकासशील देशों को अब केवल वैश्विक नियमों का पालन करने वाली भूमिका से बाहर निकलकर उन नियमों को गढ़ने की जिम्मेदारी उठानी होगी।

मुख्य आह्वान: नियम-निर्माता बनो

मिस्री ने अपने बयान में कहा कि ग्लोबल साउथ को 'नियम मानने वालों' से 'नियम बनाने वालों' की भूमिका में आना होगा। उन्होंने इसके लिए सभी विकासशील देशों को सामूहिक और समन्वित प्रयास करने की अपील की। यह आह्वान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक व्यवस्था में शक्ति-संतुलन को लेकर बहस तेज हो रही है और विकासशील देश अपनी आवाज को बड़े मंचों पर मजबूती से उठाने की माँग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि G77 में अब 130 से अधिक देश शामिल हैं और यह संयुक्त राष्ट्र में विकासशील देशों का सबसे बड़ा गठबंधन है। मिस्री ने जोर दिया कि यही मंच विकासशील देशों की एकजुट आवाज का प्रतिनिधित्व करता है और आज की भू-राजनीतिक परिस्थितियों में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार की माँग

विदेश सचिव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में तत्काल सुधार की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जब तक UNSC में विकासशील देशों की आवाज और प्रतिनिधित्व मजबूत नहीं होगा, तब तक सच्चा और समावेशी बहुपक्षवाद संभव नहीं है। यह भारत की उस दीर्घकालिक माँग की पुनरावृत्ति है जिसमें वह UNSC में स्थायी सदस्यता सहित व्यापक संस्थागत सुधार की पैरवी करता आया है।

उन्होंने लोगों पर केंद्रित और विकास-उन्मुख बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाने में G77 की भूमिका को निरंतर अहम बताया और कहा कि इस मंच को और अधिक प्रभावी ढंग से अपनी सामूहिक शक्ति का उपयोग करना चाहिए।

UN डिप्टी सेक्रेटरी-जनरल से मुलाकात: AI और विकास पर चर्चा

UNGA81 के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने संयुक्त राष्ट्र की डिप्टी सेक्रेटरी-जनरल अमीना जे. मोहम्मद से मुलाकात की। इस बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सतत विकास में उभरते अवसरों पर गहन चर्चा हुई।

मिस्री ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में भारत के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत किस प्रकार सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए समावेशी, सुलभ और मानव-केंद्रित AI तकनीक विकसित करने की दिशा में कार्यरत है। भारत का UPI और Aadhaar-आधारित DPI मॉडल पहले से ही कई विकासशील देशों के लिए अनुकरणीय बन चुका है।

UN तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने पर बल

मिस्री ने संयुक्त राष्ट्र के तंत्रों — जिनमें उसकी कंट्री टीमें भी शामिल हैं — को और अधिक कुशल एवं जवाबदेह बनाने की जरूरत पर भी बल दिया। उनका तर्क था कि जमीनी स्तर पर विकास कार्यों को तेजी से लागू करने के लिए UN की परिचालन क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है।

यह ऐसे समय में आया है जब विकासशील देश वैश्विक वित्तीय संस्थाओं और बहुपक्षीय मंचों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की माँग को लेकर एकजुट हो रहे हैं। भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता उसकी 'ग्लोबल साउथ की आवाज' बनने की व्यापक नीति का हिस्सा है जिसे 2023 की G20 अध्यक्षता के दौरान भी प्रमुखता से उभारा गया था।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि G77 जैसे 130 से अधिक देशों के विविध हितों वाले गठबंधन में एकमत नीति-निर्माण कितना व्यावहारिक है। भारत 2023 की G20 अध्यक्षता के बाद से खुद को ग्लोबल साउथ का प्रवक्ता बता रहा है, लेकिन इस दावे को चीन, ब्राज़ील जैसे बड़े विकासशील देश भी करते हैं — और उनके बीच हित टकराव कोई छुपी बात नहीं। UNSC सुधार की माँग दशकों पुरानी है और हर UNGA सत्र में दोहराई जाती है; बिना ठोस राजनयिक गठबंधन के यह माँग प्रतीकात्मक बयानबाज़ी से आगे नहीं जाती। DPI और AI पर भारत का जोर सही दिशा में है, लेकिन इसके क्रियान्वयन की गति और पहुँच की पड़ताल ज़रूरी है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विक्रम मिस्री ने G77 की बैठक में क्या कहा?
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में G77 की 50वीं सालाना बैठक में कहा कि ग्लोबल साउथ को अब 'नियम मानने वालों' से 'नियम बनाने वालों' की भूमिका में आना होगा। उन्होंने सभी विकासशील देशों से इसके लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की।
G77 क्या है और इसमें कितने देश हैं?
ग्रुप ऑफ 77 (G77) संयुक्त राष्ट्र में विकासशील देशों का सबसे बड़ा गठबंधन है, जिसमें अब 130 से अधिक देश शामिल हैं। यह मंच बहुपक्षीय मंचों पर विकासशील देशों की सामूहिक आवाज को एकजुट करता है।
भारत UNSC सुधार की माँग क्यों करता है?
भारत का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मौजूदा संरचना दुनिया की वर्तमान वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करती। मिस्री ने कहा कि जब तक UNSC में विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व और आवाज मजबूत नहीं होगी, तब तक सच्चा बहुपक्षवाद संभव नहीं है।
मिस्री ने UN डिप्टी सेक्रेटरी-जनरल से किन विषयों पर बात की?
विदेश सचिव मिस्री ने UN की डिप्टी सेक्रेटरी-जनरल अमीना जे. मोहम्मद के साथ AI और सतत विकास में उभरते अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) मॉडल और मानव-केंद्रित AI तकनीक विकसित करने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
UNGA81 में भारत की कूटनीतिक भागीदारी क्यों महत्वपूर्ण है?
UNGA81 में भारत की सक्रियता उसकी 'ग्लोबल साउथ की आवाज' बनने की व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसे 2023 की G20 अध्यक्षता के दौरान भी प्रमुखता से उभारा गया था। G77 जैसे मंचों पर भारत का नेतृत्व विकासशील देशों के हितों को वैश्विक नीति-निर्माण में शामिल कराने की कोशिश को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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