गुजरात चतुर्भुज सुरक्षा ग्रिड: CM भूपेंद्र पटेल ने सीमा पर 360° निगरानी और समन्वित कार्रवाई का आदेश दिया
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बुधवार, 30 सितंबर 2026 को गांधीनगर में 'गुजरात चतुर्भुज सुरक्षा ग्रिड' की उच्चस्तरीय बैठक में राज्य के सीमा सुरक्षा ढाँचे की व्यापक समीक्षा की। बैठक में घुसपैठ, नशीले पदार्थों की तस्करी, आर्थिक अपराधों और अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध निगरानी को और पुख्ता करने तथा सभी एजेंसियों के बीच समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया।
चतुर्भुज सुरक्षा ग्रिड क्या है
गुजरात चतुर्भुज सुरक्षा ग्रिड चार स्तंभों पर आधारित एक एकीकृत सुरक्षा ढाँचा है — सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय एजेंसियाँ, राज्य एवं जिला प्रशासन, और नागरिक भागीदारी। इस अवधारणा को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सीमावर्ती जिले भुज में आयोजित एक बैठक में प्रस्तुत किया था।
बैठक में सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा तंत्र को 'वन बॉर्डर-वन पिक्चर-वन चेन ऑफ एक्शन' के सिद्धांत के तहत एकीकृत करने पर विस्तृत चर्चा हुई, जिससे निरंतर निगरानी और सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर त्वरित समन्वित प्रतिक्रिया संभव हो सके।
बैठक के मुख्य एजेंडा बिंदु
बैठक में सीमा सुरक्षा से जुड़े छह प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया — घुसपैठ, मादक पदार्थों की तस्करी, जनसंख्या संतुलन, आर्थिक अपराध, अवैध अतिक्रमण, और विभिन्न एजेंसियों के बीच समयबद्ध हस्तक्षेप। अधिकारियों ने ऐसे मामलों में समन्वित प्रतिक्रिया के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने पर विचार-विमर्श किया जहाँ एकाधिक एजेंसियों की भूमिका आवश्यक होती है।
गौरतलब है कि गुजरात की सीमा पाकिस्तान से लगती है और यह राज्य लंबे समय से तस्करी मार्गों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब केंद्र सरकार सीमावर्ती राज्यों में सुरक्षा ढाँचे को नए सिरे से व्यवस्थित करने पर जोर दे रही है।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के निर्देश
मुख्यमंत्री पटेल ने केंद्रीय एजेंसियों और राज्य पुलिस प्रशासन के बीच मौजूदा समन्वय की सराहना करते हुए सभी विभागों में 360 डिग्री निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ, मादक पदार्थों की तस्करी और अतिक्रमण में संलिप्त लोगों को यह संदेश दिया जाना चाहिए कि गुजरात में ऐसी किसी भी गतिविधि के लिए कोई स्थान नहीं है और इन्हें किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री संघवी ने संबंधित विभागों को उनके कार्यों के लिए बधाई देते हुए इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा जिम्मेदारियाँ सामान्य प्रशासनिक कार्यों से भिन्न प्रकृति की हैं। उन्होंने समयबद्ध और परिणामोन्मुखी कार्रवाई के लिए समर्पित एवं प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती का आग्रह किया और केंद्र तथा राज्य की एजेंसियों से एकीकृत दृष्टिकोण के साथ काम करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान निर्बाध रूप से जारी रहे।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी, मुख्य सचिव एमके दास, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कुमार, संबंधित विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सीमावर्ती जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक भी बैठक में शामिल हुए।
आगे की राह
चतुर्भुज सुरक्षा ग्रिड की इस समीक्षा बैठक के बाद अब अपेक्षा है कि सीमावर्ती जिलों में एजेंसियों के बीच तालमेल और अधिक सुदृढ़ होगा तथा 'वन बॉर्डर-वन पिक्चर' के सिद्धांत को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए ठोस कार्य योजना तैयार की जाएगी। यह ढाँचा गुजरात सरकार की दीर्घकालिक सीमा प्रबंधन रणनीति की आधारशिला बनने की ओर अग्रसर है।