21 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुजरात में 'माटी मूर्ति मेला-2026': 361 कारीगरों ने 23,542 मिट्टी की गणेश मूर्तियाँ बेचकर ₹5 करोड़ कमाए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुजरात में 'माटी मूर्ति मेला-2026': 361 कारीगरों ने 23,542 मिट्टी की गणेश मूर्तियाँ बेचकर ₹5 करोड़ कमाए

सारांश

गुजरात में 'माटी मूर्ति मेला-2026' सिर्फ एक हस्तशिल्प बाज़ार नहीं था — यह एक दशक की पर्यावरण नीति की परीक्षा थी। सात दिन, पाँच स्थल, 361 कारीगर और 23,542 मिट्टी की गणेश मूर्तियाँ — ₹5 करोड़ की कमाई के साथ यह मेला POP के खिलाफ राज्य की मुहिम की अब तक की सबसे ठोस सफलता बनकर उभरा।

मुख्य बातें

माटी मूर्ति मेला-2026 का आयोजन 8 से 14 सितंबर 2026 के बीच अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत की पाँच जगहों पर हुआ।
361 रजिस्टर्ड कारीगरों ने 23,542 मिट्टी की गणेश मूर्तियाँ बेचकर लगभग ₹5 करोड़ की कमाई की।
सर्वाधिक राजस्व अहमदाबाद हाट, वस्त्रपुर से — ₹1.91 करोड़ ; सर्वाधिक मूर्तियाँ सूरत के अदाजन में बिकीं — 7,920 मूर्तियाँ ।
राज्य सरकार ने कारीगरों को 186 टन मिट्टी और 100% सब्सिडी पर मुफ्त स्टॉल उपलब्ध कराए।
10 जिलों के 302 स्कूलों के 84,500 से ज़्यादा छात्रों ने लाइव डेमो और गतिविधियों में हिस्सा लिया।
यह योजना 2015-16 में शुरू हुई थी, जब गुजरात में 90% गणेश मूर्तियाँ POP से बनती थीं।

गुजरात माटीकाम कलाकारी और ग्रामीण प्रौद्योगिकी संस्थान ने 21 सितंबर 2026 को बताया कि राज्य सरकार के सहयोग से 8 से 14 सितंबर के बीच आयोजित सात दिवसीय 'माटी मूर्ति मेला-2026' में 361 रजिस्टर्ड कारीगरों ने अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत की पाँच जगहों पर 23,542 पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की गणेश मूर्तियाँ बेचीं और लगभग ₹5 करोड़ की सामूहिक कमाई की। यह मेला प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों के हानिकारक पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने की राज्य सरकार की दीर्घकालिक मुहिम का हिस्सा है।

मेले का आयोजन और स्वरूप

कॉटेज और ग्रामीण उद्योग विभाग के अंतर्गत संचालित इस संस्थान ने मेले का संचालन पाँच अलग-अलग स्थलों पर किया। राज्य सरकार ने भाग लेने वाले कारीगरों को 186 टन 'इस्तेमाल के लिए तैयार' मिट्टी प्रदान की और 100 प्रतिशत सब्सिडी के तहत मुफ्त बिक्री स्टॉल उपलब्ध कराए। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक कारीगर को मेले के दौरान प्रतिदिन ₹1,000 की आर्थिक सहायता भी दी गई।

स्थान-वार बिक्री का ब्यौरा

पाँच स्थलों में सबसे अधिक राजस्व अहमदाबाद के वस्त्रपुर स्थित अहमदाबाद हाट से आया, जहाँ बिक्री ₹1.91 करोड़ से अधिक रही। मूर्तियों की सर्वाधिक संख्या सूरत के अदाजन में बिकी, जहाँ 7,920 मूर्तियों की बिक्री से ₹1.11 करोड़ से ज़्यादा की आमदनी हुई।

वडोदरा के पारसी अगियारी मैदान में 79 स्टॉलों पर ₹85.77 लाख की बिक्री दर्ज की गई। साबरमती रिवरफ्रंट पर 124 स्टॉलों से ₹77.99 लाख और अहमदाबाद के बोपल हस्तकला हाट में 30 स्टॉलों के ज़रिए ₹32.55 लाख की बिक्री हुई।

POP मूर्तियों के विकल्प की दशकभर की मुहिम

राज्य सरकार के अनुसार, 2014-15 तक गुजरात में गणेश की लगभग 90 प्रतिशत मूर्तियाँ POP से बनती थीं। चूँकि POP पानी में नहीं घुलता और जलीय जीवन तथा जल स्रोतों को नुकसान पहुँचाता है, इसलिए सरकार ने 2015-16 में 'मिट्टी की मूर्ति बनाने वालों के लिए प्रोत्साहन योजना' की शुरुआत की। इस योजना के अंतर्गत रजिस्टर्ड कारीगरों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर तैयार मिट्टी, मुफ्त बिक्री स्टॉल और दैनिक आर्थिक सहायता मिलती है। सरकार का कहना है कि पिछले एक दशक में इन उपायों से पूरे राज्य में POP मूर्तियों के उपयोग में उल्लेखनीय कमी आई है।

शिक्षा और महिला सशक्तिकरण का आयाम

इस पहल में एक शैक्षिक घटक भी जोड़ा गया था, जिसके तहत 10 जिलों के 302 स्कूलों के 84,500 से ज़्यादा छात्रों ने मिट्टी की मूर्ति बनाने के लाइव डेमो और स्वयं करके सीखने वाली गतिविधियों में भाग लिया। ये कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किए गए। संस्थान के अनुसार, इस कार्यक्रम से कारीगर परिवारों की महिलाओं के लिए भी रोज़गार के अवसर पैदा हुए, जो घर पर मूर्तियाँ बनाने और सजाने का काम करती हैं।

आगे की योजना

संस्थान ने स्पष्ट किया कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है — इसका दीर्घकालिक उद्देश्य पारंपरिक हस्तकला को संरक्षित करना, पर्यावरण की रक्षा करना और ग्रामीण आजीविका को मज़बूत करना है। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में भी इस तरह के मेलों का आयोजन जारी रहेगा, जिससे 'आत्मनिर्भर गुजरात' के ज़रिए 'आत्मनिर्भर भारत' के लक्ष्य को गति मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 361 कारीगरों की यह सफलता गुजरात के लाखों मिट्टी-शिल्पकारों तक पहुँच पाई है जो अभी भी मुख्यधारा से बाहर हैं। 2015-16 की प्रोत्साहन योजना के बाद POP का उपयोग घटा है, यह सकारात्मक है — पर सरकार ने अभी तक कोई सत्यापन-योग्य आँकड़ा नहीं दिया कि POP मूर्तियों की हिस्सेदारी अब वास्तव में कितनी रह गई है। इसके अलावा, 186 टन सब्सिडी वाली मिट्टी और मुफ्त स्टॉल की व्यवस्था सरकारी संरक्षण पर टिकी है — बिना बाज़ार-आधारित स्थिरता के यह मॉडल दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ है या नहीं, यह एक अनुत्तरित प्रश्न है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माटी मूर्ति मेला-2026 क्या था और कहाँ आयोजित हुआ?
यह गुजरात माटीकाम कलाकारी और ग्रामीण प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा 8 से 14 सितंबर 2026 के बीच आयोजित सात दिवसीय मेला था, जो अहमदाबाद, वडोदरा और सूरत की पाँच जगहों पर हुआ। इसका उद्देश्य POP गणेश मूर्तियों के स्थान पर पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की मूर्तियों को बढ़ावा देना था।
इस मेले में कारीगरों ने कितनी कमाई की?
361 रजिस्टर्ड कारीगरों ने 23,542 मिट्टी की गणेश मूर्तियाँ बेचकर लगभग ₹5 करोड़ की सामूहिक कमाई की। सर्वाधिक राजस्व अहमदाबाद के वस्त्रपुर स्थित अहमदाबाद हाट से ₹1.91 करोड़ आया।
गुजरात सरकार ने कारीगरों को क्या सुविधाएँ दीं?
राज्य सरकार ने 186 टन 'इस्तेमाल के लिए तैयार' मिट्टी उपलब्ध कराई और 100 प्रतिशत सब्सिडी के तहत मुफ्त बिक्री स्टॉल दिए। इसके अलावा, प्रत्येक कारीगर को मेले के दौरान प्रतिदिन ₹1,000 की आर्थिक सहायता भी प्रदान की गई।
गुजरात में POP गणेश मूर्तियों के विरुद्ध यह मुहिम कब शुरू हुई थी?
यह मुहिम 2015-16 में शुरू हुई, जब राज्य सरकार ने 'मिट्टी की मूर्ति बनाने वालों के लिए प्रोत्साहन योजना' लागू की। उस समय गुजरात में लगभग 90 प्रतिशत गणेश मूर्तियाँ POP से बनती थीं, जो पानी में नहीं घुलता और जलीय जीवन को नुकसान पहुँचाता है।
इस पहल का छात्रों और महिलाओं पर क्या प्रभाव पड़ा?
10 जिलों के 302 स्कूलों के 84,500 से अधिक छात्रों ने मिट्टी की मूर्ति बनाने के लाइव डेमो और गतिविधियों में भाग लिया। साथ ही, कारीगर परिवारों की महिलाओं को घर पर मूर्तियाँ बनाने और सजाने के ज़रिए रोज़गार के नए अवसर भी मिले।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले