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अल नीनो की आशंका: CM भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में की हाई-लेवल समीक्षा, नर्मदा पाइपलाइन दायरा 7 KM तक बढ़ा

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अल नीनो की आशंका: CM भूपेंद्र पटेल ने गांधीनगर में की हाई-लेवल समीक्षा, नर्मदा पाइपलाइन दायरा 7 KM तक बढ़ा

सारांश

अल नीनो की आशंका के बीच गुजरात सरकार ने नर्मदा पाइपलाइन का दायरा 3 से 7 किलोमीटर बढ़ाया, उत्तर गुजरात में 300 से अधिक झीलें भरने का निर्देश दिया और 50 लाख किसानों को AI प्लेटफॉर्म से जोड़ा। CM भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई यह समीक्षा बैठक राज्य की बहु-विभागीय आपदा-पूर्व तैयारी की झलक देती है।

मुख्य बातें

CM भूपेंद्र पटेल ने 18 जून 2026 को गांधीनगर में अल नीनो से निपटने की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की।
नर्मदा पाइपलाइन से झीलें भरने का दायरा 3 किलोमीटर से बढ़ाकर 7 किलोमीटर किया गया।
उत्तर गुजरात में 300 से अधिक झीलें भरने और सौराष्ट्र में SAUNI योजना के तहत जलाशय भरने के निर्देश।
50 लाख से अधिक किसानों को एआई-सक्षम 'कृषि प्रगति' प्लेटफॉर्म से SMS के जरिए मौसम अपडेट मिल रहे हैं।
पशुधन के लिए चारे का बफर स्टॉक दो वर्षों तक पर्याप्त बताया गया।
ऐतिहासिक आँकड़ों के अनुसार 2006 और 2023 में मजबूत अल नीनो के बावजूद गुजरात में 117% वर्षा दर्ज हुई थी।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 18 जून 2026 को गांधीनगर में एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें अल नीनो के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए गुजरात सरकार की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में पेयजल सुरक्षा, कृषि आकस्मिक योजना और पशुधन प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा अल नीनो की संभावना जताए जाने के बाद राज्य प्रशासन ने यह समन्वित कदम उठाया है।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

इस समीक्षा बैठक में कृषि, सिंचाई, जलापूर्ति, नर्मदा, वन और राजस्व विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य के प्रवक्ता एवं कृषि मंत्री जीतू वाघाणी ने बताया कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में सभी विभागों के बीच समन्वित माइक्रो-लेवल प्लानिंग लागू की गई है। उन्होंने कहा, "बारिश में उतार-चढ़ाव से जुड़े संभावित जोखिमों से निपटने के लिए सभी विभागों में एकीकृत सूक्ष्म-स्तरीय योजना लागू की गई है।"

नर्मदा पाइपलाइन का दायरा बढ़ाया गया

बैठक में लिए गए सबसे अहम फैसलों में से एक यह रहा कि नर्मदा पाइपलाइन के जरिए गाँवों और तालुकाओं की झीलों को भरने की सीमा 3 किलोमीटर से बढ़ाकर 7 किलोमीटर कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, उत्तर गुजरात में 300 से अधिक झीलों को मौजूदा जल प्रबंधन व्यवस्था के तहत भरने और सौराष्ट्र में जलाशयों को SAUNI योजना के अंतर्गत भरने के निर्देश दिए गए हैं। सरदार सरोवर बांध सहित राज्यभर के जलाशयों की स्थिति की भी समीक्षा की गई और जलापूर्ति कार्यों को नर्मदा नेटवर्क से बेहतर ढंग से जोड़ने के निर्देश दिए गए।

किसानों के लिए आपातकालीन फसल योजना

खरीफ 2026 सीजन के लिए बीज और उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। किसानों को कम समय में तैयार होने वाली और कम पानी की खपत वाली फसलें अपनाने के लिए प्रेरित करने हेतु एक आपातकालीन फसल योजना तैयार की गई है, जिसमें कृषि विभागों और विश्वविद्यालयों की वैज्ञानिक सलाहें शामिल हैं। कृषि विभाग मिट्टी की नमी और फसल की सेहत पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट-आधारित निगरानी का उपयोग कर रहा है। इसके अलावा, 50 लाख से अधिक किसानों को एआई-सक्षम 'कृषि प्रगति' प्लेटफॉर्म के जरिए मौसम अपडेट और कृषि सलाहें SMS के माध्यम से मिल रही हैं।

पशुधन और राजस्व प्रबंधन

राज्य ने संबंधित विभागों को पशुओं के लिए पर्याप्त चारे का भंडार बनाए रखने और खराब मौसम की स्थिति के लिए पूर्व-तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा बफर स्टॉक दो वर्षों तक के लिए पर्याप्त है। राजस्व विभाग को जिला प्रशासन के साथ चौबीसों घंटे समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।

ऐतिहासिक डेटा से मिली राहत

सरकार ने ऐतिहासिक आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 2000 और 2026 के बीच गुजरात में आठ खरीफ सीजन अल नीनो वाले वर्षों में रहे, लेकिन हर बार वर्षा सामान्य से कम नहीं हुई। अधिकारियों ने 2006 और 2023 का उदाहरण दिया, जब मजबूत अल नीनो स्थितियों के बावजूद राज्य में 117 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई थी। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि वे घबराएँ नहीं, आधिकारिक निर्देशों का पालन करें और भ्रामक सूचनाओं से बचें। आने वाले हफ्तों में मानसून की प्रगति के साथ राज्य की तैयारियों की निरंतर निगरानी जारी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — विशेषकर तब जब मानसून का मौसम पहले ही दस्तक दे चुका है। नर्मदा पाइपलाइन का दायरा बढ़ाना एक ठोस कदम है, परंतु 300 से अधिक झीलें भरने की समयसीमा और वास्तविक जल उपलब्धता पर सरकार ने अभी स्पष्टता नहीं दी है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ऐतिहासिक डेटा का हवाला देकर नागरिकों को आश्वस्त करना एक सकारात्मक संदेश है, लेकिन 2009 जैसे वर्षों में जब अल नीनो ने गुजरात को वास्तव में प्रभावित किया था, उन उदाहरणों की चर्चा से बचना एकांगी तस्वीर पेश करता है। 50 लाख किसानों तक AI-आधारित सलाह पहुँचाने का दावा महत्वाकांक्षी है — इसकी जमीनी पहुँच और प्रभावशीलता की स्वतंत्र जाँच जरूरी होगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में अल नीनो की तैयारी के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
CM भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में 18 जून 2026 को हुई समीक्षा बैठक में पेयजल सुरक्षा, आपातकालीन फसल योजना और पशुधन प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया गया। नर्मदा पाइपलाइन का दायरा बढ़ाया गया, सैटेलाइट निगरानी शुरू की गई और किसानों को AI प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया।
नर्मदा पाइपलाइन का दायरा क्यों बढ़ाया गया?
पहले केवल पाइपलाइन से 3 किलोमीटर के दायरे में आने वाली झीलें भरने के लिए पात्र थीं; अल नीनो की आशंका को देखते हुए यह सीमा बढ़ाकर 7 किलोमीटर कर दी गई है। इससे अधिक गाँवों और तालुकाओं की जल संरचनाओं को पानी मिल सकेगा।
क्या अल नीनो वाले सालों में गुजरात में हमेशा सूखा पड़ता है?
नहीं, सरकारी आँकड़ों के अनुसार 2000 से 2026 के बीच आठ खरीफ सीजन अल नीनो वाले वर्षों में रहे, लेकिन हर बार वर्षा सामान्य से कम नहीं हुई। 2006 और 2023 में मजबूत अल नीनो के बावजूद गुजरात में 117 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई थी।
'कृषि प्रगति' प्लेटफॉर्म क्या है और इससे किसानों को कैसे फायदा होगा?
'कृषि प्रगति' एक एआई-सक्षम डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसके जरिए 50 लाख से अधिक किसानों को मौसम की ताजा जानकारी और कृषि सलाहें SMS के माध्यम से मोबाइल फोन पर मिल रही हैं। इसका उद्देश्य किसानों को समय पर सटीक जानकारी देकर फसल नुकसान कम करना है।
गुजरात में पशुधन के लिए चारे की क्या व्यवस्था है?
अधिकारियों के अनुसार, राज्य में मौजूदा बफर स्टॉक दो वर्षों तक के लिए पर्याप्त है। संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे चारे का पर्याप्त भंडार बनाए रखें और खराब मौसम की स्थिति के लिए पहले से तैयार रहें।
राष्ट्र प्रेस
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