गुजरात स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने डॉ. गणेश बरैया को किया सम्मानित, युवाओं को दिया संघर्ष का संदेश

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गुजरात स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने डॉ. गणेश बरैया को किया सम्मानित, युवाओं को दिया संघर्ष का संदेश

सारांश

शारीरिक चुनौती, मेडिकल काउंसिल की अस्वीकृति और सर्वोच्च न्यायालय तक की लड़ाई — डॉ. गणेश बरैया की कहानी सिर्फ एक डॉक्टर की नहीं, एक योद्धा की है। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें सम्मानित कर युवाओं को संदेश दिया: असफलता अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है।

मुख्य बातें

गुजरात स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने 5 मई को गांधीनगर में डॉ.
गणेश बरैया को उनके असाधारण संघर्ष के लिए सम्मानित किया।
बरैया ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की अस्वीकृति के बाद सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़कर मेडिकल डिग्री हासिल की।
मंत्री ने युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं पर गहरी चिंता जताई और छात्रों से परिवार के साथ समय बिताने की अपील की।
मंत्री ने कहा कि सफलता केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना नहीं, बल्कि मानवीय मूल्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं।
बरैया ने अपने शिक्षक डॉ.
दलपत कटारिया को उनके अमूल्य सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने मंगलवार, 5 मई को गांधीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम में भावनगर सिविल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. गणेश बरैया को उनकी असाधारण जीवन-यात्रा के लिए सम्मानित किया। इस अवसर पर मंत्री ने छात्रों से आग्रह किया कि वे असफलता से भयभीत न हों और कठिनाइयों का दृढ़ता से सामना करें। उन्होंने युवाओं में बढ़ती आत्महत्या की घटनाओं पर गहरी चिंता भी व्यक्त की।

डॉ. बरैया का संघर्ष और सम्मान

डॉ. गणेश बरैया ने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है। उनकी राह आसान नहीं थी — मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने उन्हें कथित तौर पर अस्वीकार कर दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और सर्वोच्च न्यायालय तक कानूनी लड़ाई लड़कर अपनी मेडिकल डिग्री प्राप्त की। स्वास्थ्य मंत्री ने उनके इस संघर्ष को युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

मंत्री का युवाओं को संदेश

सभा को संबोधित करते हुए मंत्री पंशेरिया ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

यह प्रश्न उठाता है कि क्या मेडिकल काउंसिल के मानदंड समावेशिता की कसौटी पर खरे हैं। मंत्री का युवा आत्महत्या पर बयान सराहनीय है, लेकिन संस्थागत स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता के ठोस कदमों का उल्लेख न होना इस संदेश को अधूरा छोड़ता है। प्रेरणादायक कहानियाँ ज़रूरी हैं, पर नीतिगत बदलाव के बिना वे केवल भावनात्मक राहत बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. गणेश बरैया कौन हैं और उन्हें क्यों सम्मानित किया गया?
डॉ. गणेश बरैया भावनगर सिविल अस्पताल के चिकित्सक हैं, जिन्होंने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा अस्वीकृति के बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़कर अपनी डिग्री हासिल की, जिसके लिए गुजरात स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें 5 मई को गांधीनगर में सम्मानित किया।
गुजरात स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पंशेरिया ने छात्रों को क्या संदेश दिया?
मंत्री पंशेरिया ने छात्रों से कहा कि असफलता से न डरें और डॉ. बरैया की तरह योद्धा बनें। उन्होंने यह भी कहा कि सफलता केवल डॉक्टर या इंजीनियर बनना नहीं है, बल्कि मानवीय मूल्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं।
डॉ. बरैया को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने क्यों अस्वीकार किया था?
कार्यक्रम में डॉ. बरैया ने बताया कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने उन्हें अस्वीकार कर दिया था, हालांकि अस्वीकृति के विस्तृत कारणों का सार्वजनिक उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने हार न मानते हुए सर्वोच्च न्यायालय में अपील की और अंततः मेडिकल डिग्री प्राप्त करने में सफल रहे।
युवाओं में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं पर मंत्री ने क्या कहा?
मंत्री पंशेरिया ने कहा कि जब बेटा या बेटी आत्महत्या करते हैं, तो माता-पिता के सपने टूट जाते हैं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि निराशा के क्षण में अपने माता-पिता के दर्द के बारे में सोचें और परिवार के साथ समय बिताएँ।
डॉ. बरैया ने किसे धन्यवाद दिया और क्यों?
डॉ. बरैया ने अपने शिक्षक डॉ. दलपत कटारिया को धन्यवाद दिया, जिन्होंने सर्वोच्च न्यायालय तक उनकी कानूनी लड़ाई में सहयोग किया। मंत्री ने भी इस शिक्षक-छात्र संबंध की सराहना करते हुए मेडिकल कॉलेज के डीन और सुपरिंटेंडेंट के योगदान की प्रशंसा की।
राष्ट्र प्रेस
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