3 अगस्त 2026
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गुजरात पुलिस का GUJCTOC के तहत शराब तस्करी सिंडिकेट पर शिकंजा, दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार

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गुजरात पुलिस का GUJCTOC के तहत शराब तस्करी सिंडिकेट पर शिकंजा, दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार

सारांश

गुजरात पुलिस ने वलसाड में GUJCTOC 2015 के तहत छह सदस्यीय शराब तस्करी सिंडिकेट पर शिकंजा कसा। कथित सरगना नीलेश ठाकुर और सहयोगी किरण पटेल गिरफ्तार; अदालत ने पाँच दिन की रिमांड दी। आरोपी जमानत के बाद कथित तौर पर फिर से सक्रिय हो गए थे।

मुख्य बातें

गुजरात पुलिस ने 3 अगस्त 2026 को GUJCTOC 2015 की धाराओं 3(1)(2), 3(2) और 3(4) के तहत छह सदस्यीय शराब तस्करी गिरोह के विरुद्ध मामला दर्ज किया।
कथित सरगना नीलेश उर्फ निल्यो घोड़ो ठाकुर (मूल निवासी सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश ) और सहयोगी किरण उर्फ छनियो पटेल ( दमन ) गिरफ्तार।
मामला पारडी पुलिस स्टेशन में दर्ज; जांच की अगुवाई DSP बी.एन.
दवे ( वापी डिवीजन ) कर रहे हैं।
सूरत की स्पेशल डेजिग्नेटेड कोर्ट ने पुलिस को पाँच दिन की रिमांड दी।
आरोपियों पर पहले भी गुजरात के कई जिलों में मामले दर्ज हैं; जमानत के बाद कथित तौर पर अवैध गतिविधियाँ फिर शुरू कर दी थीं।
पुलिस अब तस्करी के स्रोत, नकली नंबर प्लेट, संपत्ति अर्जन और बाकी चार सदस्यों की पहचान की जांच कर रही है।

वलसाड जिले की पारडी पुलिस ने 3 अगस्त 2026 को 'गुजरात कंट्रोल ऑफ टेररिज्म एंड ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (GUJCTOC), 2015' की धाराओं 3(1)(2), 3(2) और 3(4) के तहत एक छह सदस्यीय कथित शराब तस्करी गिरोह के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की। जांचकर्ताओं के अनुसार यह सिंडिकेट कथित तौर पर वर्षों से गुजरात भर में अवैध शराब की ढुलाई और वितरण का एक सुव्यवस्थित नेटवर्क संचालित कर रहा था।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने कथित सरगना नीलेश उर्फ निल्यो घोड़ो ठाकुर — जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर का निवासी है और अब वलसाड जिले के ओरवाड में रह रहा था — तथा उसके कथित सहयोगी दमन निवासी किरण उर्फ छनियो पटेल को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को सूरत की स्पेशल डेजिग्नेटेड एवं प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने पुलिस को पाँच दिन की रिमांड प्रदान की।

मामला कैसे दर्ज हुआ

विशेष निर्देशों के आधार पर लोकल क्राइम ब्रांच के पुलिस इंस्पेक्टर ए.यू. रोज ने शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच की अगुवाई वापी डिवीजन के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस बी.एन. दवे कर रहे हैं। पुलिस के बयान के अनुसार, आरोपियों पर पड़ोसी राज्यों से भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) की बड़े पैमाने पर तस्करी करने और गुजरात में एक विस्तृत अवैध आपूर्ति शृंखला खड़ी करने का आरोप है।

आरोपियों का आपराधिक इतिहास

जांचकर्ताओं के अनुसार, इस गिरोह के सदस्यों पर गुजरात के विभिन्न जिलों के कई पुलिस स्टेशनों में पहले से ही मारपीट, आपराधिक धमकी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और अवैध शराब की आपूर्ति जैसे अपराधों के मामले दर्ज हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों को पूर्व में गिरफ्तार किया जा चुका था और अदालत में चार्जशीट भी दाखिल की गई थी, परंतु जमानत मिलने के बाद उन्होंने कथित तौर पर अपनी अवैध गतिविधियाँ फिर से शुरू कर दीं। यह तथ्य GUJCTOC जैसे सख्त कानून के प्रयोग की पृष्ठभूमि स्पष्ट करता है, जो संगठित अपराध के आदतन अपराधियों पर लागू होता है।

जांच के प्रमुख बिंदु

पुलिस अब कई पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही है — शराब की खेप के मूल स्रोत, वितरण नेटवर्क का पूरा ढाँचा, सिंडिकेट के शेष चार कथित सदस्यों और मददगारों की पहचान, ऑपरेशन में इस्तेमाल वाहनों और नकली नंबर प्लेटों की भूमिका, तथा यह कि क्या आरोपियों ने कथित अवैध कमाई से संपत्ति अर्जित की है।

आगे क्या होगा

पाँच दिन की पुलिस रिमांड के दौरान जांचकर्ता गिरोह के बाकी सदस्यों तक पहुँचने और तस्करी के पूरे नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश करेंगे। गुजरात में शराबबंदी कानून के तहत GUJCTOC का प्रयोग दर्शाता है कि राज्य पुलिस इस मामले को सामान्य तस्करी नहीं, बल्कि संगठित अपराध मानती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुव्यवस्थित आपराधिक उद्यम मानती है। परंतु असली सवाल यह है कि जमानत मिलने के बाद आरोपी दोबारा सक्रिय हो गए — यह न्यायिक निगरानी और पुलिस की खुफिया क्षमता दोनों पर सवाल उठाता है। गुजरात में शराबबंदी दशकों पुरानी है, फिर भी तस्करी नेटवर्क पड़ोसी राज्यों से निर्बाध आपूर्ति बनाए रखते हैं — यह नीतिगत विफलता की उतनी ही कहानी है जितनी कानून-व्यवस्था की। रिमांड अवधि में यदि बाकी चार सदस्यों और संपत्ति के सुराग नहीं मिले, तो यह कार्रवाई भी पिछले अनेक मामलों की तरह अधूरी साबित हो सकती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

GUJCTOC क्या है और इसे इस मामले में क्यों लगाया गया?
'गुजरात कंट्रोल ऑफ टेररिज्म एंड ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट, 2015' एक कड़ा राज्य कानून है जो संगठित आपराधिक गिरोहों पर लागू होता है और सामान्य IPC की तुलना में अधिक सख्त प्रावधान रखता है। इस मामले में इसे इसलिए लगाया गया क्योंकि जांचकर्ताओं के अनुसार आरोपी वर्षों से एक सुव्यवस्थित नेटवर्क चला रहे थे और जमानत के बाद भी अवैध गतिविधियाँ जारी रखी थीं।
इस मामले में किन्हें गिरफ्तार किया गया है?
पुलिस ने कथित सरगना नीलेश उर्फ निल्यो घोड़ो ठाकुर (मूल निवासी सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश; निवास वलसाड के ओरवाड में) और उसके कथित सहयोगी किरण उर्फ छनियो पटेल (दमन) को गिरफ्तार किया है। शेष चार सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी की जांच जारी है।
अदालत ने पुलिस को कितने दिन की रिमांड दी?
सूरत की स्पेशल डेजिग्नेटेड एवं प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट ने दोनों आरोपियों की पुलिस रिमांड पाँच दिनों के लिए मंजूर की है। इस दौरान जांचकर्ता तस्करी नेटवर्क, संपत्ति और शेष सदस्यों की जांच करेंगे।
इस गिरोह पर क्या-क्या आरोप हैं?
आरोपियों पर पड़ोसी राज्यों से गुजरात में भारतीय निर्मित विदेशी शराब की बड़े पैमाने पर तस्करी, नकली नंबर प्लेट का इस्तेमाल, जाली दस्तावेज, मारपीट, आपराधिक धमकी और अवैध आपूर्ति नेटवर्क संचालित करने के आरोप हैं। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या अवैध कमाई से संपत्ति बनाई गई।
इस मामले की जांच कौन कर रहा है?
मामले की जांच वापी डिवीजन के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस बी.एन. दवे की अगुवाई में हो रही है। शिकायत लोकल क्राइम ब्रांच के पुलिस इंस्पेक्टर ए.यू. रोज ने विशेष निर्देशों के आधार पर दर्ज कराई है।
राष्ट्र प्रेस
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