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हैदराबाद पुलिस ने स्पीड पोस्ट से गांजा तस्करी करने वाले अंतर-राज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

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हैदराबाद पुलिस ने स्पीड पोस्ट से गांजा तस्करी करने वाले अंतर-राज्यीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

सारांश

स्पीड पोस्ट को नशे की आपूर्ति श्रृंखला बना देना — यही इस गिरोह की असली चालाकी थी। झारखंड से संचालित इस सिंडिकेट ने 21 राज्यों में रोज़ाना 80-100 ऑर्डर पूरे किए और सालाना ₹4-5 करोड़ का कारोबार किया। हैदराबाद में एक पार्सल पकड़े जाने से पूरे नेटवर्क की परतें उघड़ गईं।

मुख्य बातें

हैदराबाद नारकोटिक्स एनफोर्समेंट विंग ने 2 जुलाई को अंतर-राज्यीय गांजा तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया।
मुख्य आरोपी सत्यम मिश्रा ( गिरिडीह, झारखंड ) गिरफ्तार; भाई शुभम मिश्रा सहित 4 अन्य आरोपी फरार।
सिंडिकेट 21 राज्यों में स्पीड पोस्ट के ज़रिए गांजा भेजता था; पार्सल में 'दवाइयाँ' लिखकर डाक अधिकारियों को गुमराह किया जाता था।
प्रतिदिन 80-100 ऑर्डर , रोज़ाना ₹1 लाख की कमाई; अनुमानित सालाना टर्नओवर ₹4-5 करोड़ ।
मुंबई में 1,000 से अधिक नियमित ग्राहकों का अलग नेटवर्क भी संचालित था।
हैदराबाद में एक ग्राहक के पास पार्सल पकड़े जाने के बाद पूरी सप्लाई चेन का खुलासा हुआ।

हैदराबाद नारकोटिक्स एनफोर्समेंट विंग ने एक बड़े अंतर-राज्यीय गांजा तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो स्पीड पोस्ट और कूरियर सेवाओं की आड़ में देशभर के 21 राज्यों में नशीले पदार्थों की आपूर्ति कर रहा था। 2 जुलाई को पुलिस ने मुख्य आरोपी सत्यम मिश्रा को गिरफ्तार करने के बाद इस नेटवर्क की परतें उघाड़ीं, जो मुख्यतः झारखंड से संचालित हो रहा था।

गिरोह की पृष्ठभूमि और संरचना

झारखंड के गिरिडीह जिले के रहने वाले सत्यम मिश्रा पहले पेंटर और ट्रांसपोर्ट वाहन चालक के रूप में काम करते थे। 2018 में उन्हें गांजे की लत लग गई, जिसके बाद वे स्थानीय तस्करों के संपर्क में आए। जल्दी पैसा कमाने की चाहत में उन्होंने अपने बड़े भाई शुभम मिश्रा उर्फ 'शुभम दादा' के साथ मिलकर यह अवैध कारोबार शुरू किया।

बाद में इस गिरोह में राहुल झा उर्फ 'छोटे मिश्रा' (पार्सल बुकिंग और डिस्पैच एजेंट), सचिन मिश्रा (सत्यम मिश्रा का रिश्तेदार एवं मुंबई नेटवर्क समन्वयक) और संतोष पंडित (मुंबई नेटवर्क समन्वयक) को भी शामिल किया गया। पुलिस के अनुसार ये चारों आरोपी अभी भी फरार हैं।

तस्करी का तरीका: पोस्ट ऑफिस की आड़ में नशे का जाल

इस सिंडिकेट ने अपने पैतृक गाँव में गांजे की खेती करने के साथ-साथ झारखंड के अज्ञात स्थानीय स्रोतों से भी माल जुटाया। अवैध खेप भेजने के लिए झारखंड के इसरी बाजार और फुसरो बाजार पोस्ट ऑफिस का उपयोग किया गया। पोस्टल अधिकारियों को गुमराह करने के लिए पार्सल में 'दवाइयाँ' होने की झूठी जानकारी दी जाती थी।

जहाँ सत्यम मिश्रा और शुभम मिश्रा माल तैयार और पैक करते थे, वहीं राहुल झा बुकिंग और डिस्पैच का काम संभालता था। ऑर्डर लेने, डिलीवरी स्थान तय करने और डिजिटल भुगतान प्रोसेस करने के लिए गिरोह व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करता था।

कारोबार का पैमाना: रोज़ाना ₹1 लाख की कमाई

पुलिस के अनुसार यह सिंडिकेट प्रतिदिन 80 से 100 ऑर्डर पूरे करता था और रोज़ाना 8 से 10 खेप स्पीड पोस्ट के ज़रिए भेजता था। प्रत्येक पार्सल में आमतौर पर 50 से 250 ग्राम गांजा होता था, जिसे ग्राहकों को ₹1,500 से ₹8,000 प्रति ऑर्डर पर बेचा जाता था।

इस व्यवस्थित नेटवर्क से सिंडिकेट प्रतिदिन लगभग ₹1,00,000, मासिक ₹30 से 35 लाख और सालाना ₹4 से 5 करोड़ तक का कारोबार करता था। डाक सेवाओं के अलावा, गिरोह मुंबई में भी एक बड़ा नेटवर्क चला रहा था जिसमें 1,000 से अधिक नियमित ग्राहक थे। शुभम मिश्रा खुद ट्रेन से झारखंड से मुंबई भारी मात्रा में गांजा लाता था, जिसे सचिन मिश्रा और संतोष पंडित के घरों में संग्रहीत किया जाता था।

भंडाफोड़ कैसे हुआ

इस सिंडिकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब हैदराबाद पुलिस ने एक व्यक्ति को इसरी बाजार पोस्ट ऑफिस के ज़रिए भेजे गए गांजे के पार्सल के साथ पकड़ा। उस व्यक्ति से पूछताछ में पूरी सप्लाई चेन का खुलासा हुआ, जिसके बाद जाँच टीम ने मुख्य आरोपी सत्यम मिश्रा को गिरफ्तार किया।

गौरतलब है कि यह मामला डाक तंत्र के दुरुपयोग की उस बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है, जिसमें तस्कर पारंपरिक जाँच चौकियों से बचने के लिए सरकारी डाक सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जाँच आगे बढ़ रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल उठता है कि पोस्टल स्क्रीनिंग तंत्र कहाँ विफल रहा। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद चार प्रमुख आरोपियों का फरार रहना यह भी दर्शाता है कि सिंडिकेट की जड़ें अभी पूरी तरह नहीं कटी हैं। बिना व्यापक डाक निगरानी सुधार के, इस तरह के नेटवर्क फिर से सक्रिय हो सकते हैं।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हैदराबाद पुलिस ने किस गिरोह का भंडाफोड़ किया है?
हैदराबाद नारकोटिक्स एनफोर्समेंट विंग ने एक अंतर-राज्यीय गांजा तस्करी सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो झारखंड से स्पीड पोस्ट के ज़रिए देशभर के 21 राज्यों में गांजा पहुँचाता था। इस गिरोह का मुख्य आरोपी सत्यम मिश्रा गिरिडीह, झारखंड का रहने वाला है।
यह गिरोह गांजा भेजने के लिए स्पीड पोस्ट का इस्तेमाल कैसे करता था?
गिरोह झारखंड के इसरी बाजार और फुसरो बाजार पोस्ट ऑफिस से पार्सल बुक करता था और डाक अधिकारियों को गुमराह करने के लिए पार्सल में 'दवाइयाँ' होने की झूठी जानकारी देता था। हर पार्सल में 50 से 250 ग्राम गांजा होता था और ऑर्डर व्हाट्सएप के ज़रिए लिए जाते थे।
इस सिंडिकेट का सालाना कारोबार कितना था?
पुलिस के अनुसार यह सिंडिकेट रोज़ाना लगभग ₹1,00,000 कमाता था, जो मासिक ₹30 से 35 लाख और सालाना ₹4 से 5 करोड़ के बराबर है। गांजा ग्राहकों को ₹1,500 से ₹8,000 प्रति ऑर्डर पर बेचा जाता था।
इस मामले में कितने आरोपी हैं और कितने फरार हैं?
इस मामले में कुल पाँच प्रमुख आरोपी हैं। मुख्य आरोपी सत्यम मिश्रा गिरफ्तार है, जबकि शुभम मिश्रा उर्फ 'शुभम दादा', राहुल झा उर्फ 'छोटे मिश्रा', सचिन मिश्रा और संतोष पंडित अभी भी फरार हैं।
इस सिंडिकेट का भंडाफोड़ कैसे हुआ?
हैदराबाद पुलिस ने एक व्यक्ति को इसरी बाजार पोस्ट ऑफिस से भेजे गए गांजे के पार्सल के साथ पकड़ा। उस व्यक्ति से पूछताछ में पूरी सप्लाई चेन का खुलासा हुआ, जिससे मुख्य आरोपी सत्यम मिश्रा की गिरफ्तारी संभव हो सकी।
राष्ट्र प्रेस
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