9 जुलाई 2026
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महासमुंद पुलिस का तमिलनाडु में ऑपरेशन: 1,700 किमी दूर से गांजा तस्करी के मुख्य सप्लायर गिरफ्तार

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महासमुंद पुलिस का तमिलनाडु में ऑपरेशन: 1,700 किमी दूर से गांजा तस्करी के मुख्य सप्लायर गिरफ्तार

सारांश

महासमुंद पुलिस ने साइबर ट्रैकिंग के दम पर 1,700 किमी दूर तमिलनाडु से फरार गांजा सप्लायर को धर दबोचा — चार महीने की मशक्कत, एक अंतर-राज्यीय नेटवर्क और एनडीपीएस एक्ट के तहत तीसरी गिरफ्तारी।

मुख्य बातें

महासमुंद पुलिस ने 9 जुलाई 2026 को मुख्य आरोपी बसंता सुना को तमिलनाडु के तिरुपुर से गिरफ्तार किया।
आरोपी करीब चार महीने से फरार था और लगातार ठिकाने बदल रहा था।
पहले की कार्रवाई में 23.790 किलोग्राम गांजा , एक मोटरसाइकिल और दो मोबाइल सहित ₹12.60 लाख की संपत्ति ज़ब्त हुई थी।
मामला थाना खल्लारी , अपराध क्रमांक 19/2026 , धारा 20(ख) एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज है।
साइबर टीम की मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग से 1,700 किमी दूर तिरुपुर के वीरापंडी क्षेत्र में आरोपी का पता चला।
इस मामले में अब तक कुल तीन आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

छत्तीसगढ़ की महासमुंद पुलिस ने मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 9 जुलाई 2026 को ओडिशा के एक फरार गांजा सप्लायर को राज्य से करीब 1,700 किलोमीटर दूर तमिलनाडु के तिरुपुर से गिरफ्तार किया। यह आरोपी पिछले करीब चार महीनों से फरार था और लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को चकमा देने की कोशिश कर रहा था।

मामले की पृष्ठभूमि

17 फरवरी 2026 को मुखबिर की सूचना पर थाना खल्लारी पुलिस ने एनएच-353 स्थित जोरातराई मोड़ पर नाकेबंदी की। ओडिशा की ओर से खल्लारी आ रही एक मोटरसाइकिल को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें सवार अभिषेक यादव (उम्र 22 वर्ष, निवासी अंजोरा, जिला दुर्ग) और दीपक चंदन (उम्र 22 वर्ष, निवासी कोहका, जिला दुर्ग) के पास से नौ पैकेटों में 23 किलो 790 ग्राम गांजा बरामद हुआ। दोनों को तत्काल गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया और उनके कब्जे से एक मोटरसाइकिल व दो मोबाइल फोन सहित कुल ₹12.60 लाख की संपत्ति जब्त की गई।

मुख्य आरोपी की तलाश और गिरफ्तारी

पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को पता चला कि गांजा उपलब्ध कराने वाला मुख्य आरोपी बसंता सुना (उम्र 30 वर्ष, निवासी भरूवामुंडा, थाना बेलपड़ा, जिला बलांगीर, ओडिशा) घटना के बाद फरार हो गया था। पुलिस ने पहले उसके ओडिशा स्थित घर पर दबिश दी, परंतु वह वहाँ नहीं मिला।

इसके बाद साइबर टीम ने मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और तकनीकी विश्लेषण के ज़रिए उसकी मौजूदगी तमिलनाडु के तिरुपुर सिटी के वीरापंडी क्षेत्र में चिह्नित की। महासमुंद से रवाना हुई पुलिस टीम ने वहाँ दबिश देकर 7 जुलाई 2026 को बसंता सुना को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने अपराध में अपनी संलिप्तता स्वीकार की।

कानूनी कार्रवाई

यह समूचा प्रकरण थाना खल्लारी के अपराध क्रमांक 19/2026, धारा 20(ख) एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज है। बसंता सुना को ट्रांजिट रिमांड पर महासमुंद लाया गया और 9 जुलाई 2026 को विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) न्यायालय में पेश किया गया। इस मामले में अब तक कुल तीन आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

ऑपरेशन का महत्व

यह गिरफ्तारी महासमुंद पुलिस और साइबर टीम की एंड-टू-एंड जांच क्षमता का प्रमाण है। गौरतलब है कि तमिलनाडु से छत्तीसगढ़ तक फैले इस तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए पुलिस को राज्य की सीमाओं से बाहर जाकर अभियान चलाना पड़ा। आलोचकों का कहना है कि ऐसे अंतर-राज्यीय नेटवर्क तब तक पूरी तरह नहीं टूटते जब तक आपूर्ति श्रृंखला के हर कड़ी की पहचान न हो जाए।

पुलिस की इस कार्रवाई से संकेत मिलता है कि छत्तीसगढ़ में गांजे की आपूर्ति ओडिशा के रास्ते तमिलनाडु से जुड़े नेटवर्क से होती रही है। आगे की जांच में इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी की संभावना बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

700 किलोमीटर दूर तक पीछा करना और साइबर टीम के ज़रिए आरोपी को ट्रेस करना, राज्य पुलिस की तकनीकी क्षमता में बढ़ोतरी का संकेत देता है। लेकिन असली सवाल यह है कि ओडिशा से तमिलनाडु तक फैला यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसकी आपूर्ति श्रृंखला में और कितने लोग शामिल हैं। तीन गिरफ्तारियाँ एक शुरुआत हैं, पर अंत नहीं — जब तक स्रोत और वितरण तंत्र दोनों पर एक साथ प्रहार न हो, ऐसे नेटवर्क नए चेहरों के साथ फिर उभर आते हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महासमुंद पुलिस ने तमिलनाडु से किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
महासमुंद पुलिस ने ओडिशा के जिला बलांगीर निवासी बसंता सुना को तमिलनाडु के तिरुपुर से गिरफ्तार किया। वह फरवरी 2026 में हुई गांजा तस्करी का मुख्य सप्लायर है और घटना के बाद से फरार था।
इस मामले में कितना गांजा बरामद हुआ और पहले किन्हें पकड़ा गया था?
पहली कार्रवाई में 23 किलो 790 ग्राम गांजा नौ पैकेटों में बरामद हुआ था। उस समय अभिषेक यादव और दीपक चंदन — दोनों जिला दुर्ग निवासी — को गिरफ्तार किया गया था और उनके पास से ₹12.60 लाख की संपत्ति जब्त हुई थी।
पुलिस ने 1,700 किमी दूर तमिलनाडु में आरोपी का पता कैसे लगाया?
थाना खल्लारी की साइबर टीम ने मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग और तकनीकी विश्लेषण के ज़रिए आरोपी को तिरुपुर के वीरापंडी क्षेत्र में चिह्नित किया। इसके बाद महासमुंद से पुलिस टीम रवाना हुई और वहाँ दबिश देकर गिरफ्तारी की।
यह मामला किस कानून के तहत दर्ज है और आरोपी को कहाँ पेश किया गया?
यह मामला एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(ख) के तहत थाना खल्लारी, अपराध क्रमांक 19/2026 में दर्ज है। बसंता सुना को 9 जुलाई 2026 को विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) न्यायालय, महासमुंद में पेश किया गया।
इस तस्करी नेटवर्क में कौन-कौन से राज्य शामिल हैं?
जांच के अनुसार यह नेटवर्क तमिलनाडु (आपूर्ति स्रोत), ओडिशा (मुख्य सप्लायर का आधार) और छत्तीसगढ़ (वितरण क्षेत्र) तक फैला है। पुलिस के अनुसार आगे की जांच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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