29 सितंबर 2026
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बरदा में एशियाई शेरों की वापसी के बाद गुजरात ने पोरबंदर वन डिवीजन का पुनर्गठन किया

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बरदा में एशियाई शेरों की वापसी के बाद गुजरात ने पोरबंदर वन डिवीजन का पुनर्गठन किया

सारांश

143 साल बाद एशियाई शेरों की बरदा में वापसी ने गुजरात सरकार को हरकत में ला दिया। पोरबंदर वन डिवीजन को 7 रेंज, 2 नए असिस्टेंट कंजर्वेटर पदों और भूमि हस्तांतरण के साथ पूरी तरह नए सिरे से ढाला गया है — यह गिर से परे शेरों के आवास-विस्तार की दिशा में राज्य की सबसे बड़ी प्रशासनिक तैयारी है।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने 29 सितंबर 2026 को पोरबंदर वन डिवीजन का व्यापक पुनर्गठन किया।
यह कदम 143 वर्षों के अंतराल के बाद एशियाई शेरों के बरदा वन्यजीव अभयारण्य में प्राकृतिक रूप से लौटने के बाद उठाया गया।
पुनर्गठित डिवीजन में कुल 7 रेंज होंगी; पोरबंदर रेंज में 6,840.84 हेक्टेयर और 80 गाँव , राणावाव रेंज में 13,051.25 हेक्टेयर और 27 गाँव शामिल।
जामनगर वन डिवीजन की भाटिया रेंज से 305.94 हेक्टेयर भूमि पोरबंदर डिवीजन में स्थानांतरित की जाएगी।
बढ़े हुए प्रशासनिक ढाँचे के लिए दो असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट पदों का प्रावधान किया गया।
डिवीजन जूनागढ़ वाइल्डलाइफ सर्कल के अधीन कार्य करता रहेगा।

गुजरात सरकार ने 29 सितंबर 2026 को पोरबंदर वन डिवीजन का व्यापक पुनर्गठन किया है, जिसमें रेंज और बीट संरचना में बदलाव शामिल हैं। वन एवं पर्यावरण विभाग के अनुसार, यह कदम बरदा वन्यजीव अभयारण्य में 143 वर्षों के अंतराल के बाद एशियाई शेरों की प्राकृतिक वापसी के मद्देनज़र फील्ड-स्तरीय प्रशासन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से उठाया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में स्वीकृत इस पुनर्गठन से पोरबंदर जिले में वन प्रबंधन, विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन और वन-पर्यावरण संबंधी मुद्दों के समाधान में प्रशासनिक नियंत्रण अधिक प्रभावी होगा।

पुनर्गठन की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि एशियाई शेर दशकों से केवल गिर वन तक सीमित रहे थे। बरदा वन्यजीव अभयारण्य में उनकी स्वाभाविक वापसी — जो 143 वर्षों में पहली बार हुई है — वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से ऐतिहासिक मानी जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब शेरों की बढ़ती आबादी के कारण उनके आवास-विस्तार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नई संरचना का मुख्य उद्देश्य बरदा में वन संरक्षण, वन्यजीव प्रबंधन और शेरों के पुनर्वास को प्रशासनिक समर्थन देना है।

नई प्रशासनिक संरचना

पुनर्गठित ढाँचे के अंतर्गत पोरबंदर रेंज में 6,840.84 हेक्टेयर भूमि और 80 गाँव शामिल होंगे। इसे पोरबंदर शहर, गोसाबारा, मोकर, विसावाड़ा, कांटेला, माधवपुर और सतिया जैसी बीटों में विभाजित किया जाएगा, और प्रत्येक बीट को निर्धारित क्षेत्र एवं गाँव आवंटित किए जाएँगे।

राणावाव रेंज में 13,051.25 हेक्टेयर भूमि और 27 गाँव शामिल होंगे, जिसमें गोदाना, बिलेश्वर, सावदीवादार और राणावाव जैसे क्षेत्रों को अलग-अलग बीटों में बाँटा जाएगा। इसके अतिरिक्त, जामनगर वन डिवीजन की आरएफडब्ल्यू भाटिया रेंज से 305.94 हेक्टेयर भूमि पोरबंदर वन डिवीजन की भानवड़ रेंज में स्थानांतरित की जाएगी।

स्थानांतरित क्षेत्र में देवभूमि द्वारका जिले के भानवड़ तालुका के चार गाँव — कंदरडा जोगना, सजदियाला, जूना और जांबुसर — शामिल हैं, जिनका प्रशासनिक कामकाज अब पोरबंदर वन डिवीजन के अधीन होगा।

विस्तारित डिवीजन और अधिकारी व्यवस्था

कुतियाना रेंज, पोरबंदर सोशल फॉरेस्ट्री रेंज और राणावाव सोशल फॉरेस्ट्री रेंज को भी इसी डिवीजन के अंतर्गत लाया जाएगा, जिससे कुल मिलाकर इस डिवीजन में सात रेंज हो जाएँगी। बढ़े हुए प्रशासनिक भार को सँभालने के लिए दो असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट का प्रावधान किया गया है।

असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट-1 पोरबंदर, पोरबंदर सोशल फॉरेस्ट और राणावाव सोशल फॉरेस्ट रेंज की देखरेख करेंगे, जबकि असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट-2 राणावाव, भानवड़, कुटियाना रेंज और मोबाइल स्क्वाड रेंज का प्रबंधन करेंगे। केवड़िया में स्वीकृत दो असिस्टेंट कंजर्वेटर पदों में से एक रिक्त पद पोरबंदर फॉरेस्ट डिवीजन को हस्तांतरित किया जाएगा।

पोरबंदर फॉरेस्ट डिवीजन जूनागढ़ वाइल्डलाइफ सर्कल के अधीन कार्य करता रहेगा, जहाँ डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट डिवीजन की निगरानी करेंगे और दोनों असिस्टेंट कंजर्वेटर अपनी-अपनी रेंज का संचालन देखेंगे।

संसाधनों का पुनर्वितरण

इस पुनर्गठन में स्टाफ और संसाधनों का स्थानांतरण या पुनर्वितरण भी शामिल है। इसमें वाहन, हथियार, वॉकी-टॉकी, वायरलेस उपकरण, अभिलेख, कंप्यूटर, फर्नीचर और विभाग की अन्य सम्पत्तियाँ शामिल हैं। रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर मोबाइल स्क्वाड के संचालन के लिए भी उत्तरदायी होंगे और इसे नई प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत लाएँगे।

आगे की राह

सरकारी आदेश के अनुसार, इन बदलावों का अंतिम लक्ष्य फील्ड स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करना और बरदा में शेरों के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए ठोस प्रशासनिक आधार तैयार करना है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुनर्गठन शेरों की बढ़ती आबादी और उनके विस्तारित आवास-क्षेत्र की प्रबंधन आवश्यकताओं को देखते हुए एक आवश्यक कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली चुनौती कागज़ पर बनाई गई रेंज और बीट संरचना को ज़मीन पर उतारने की होगी। एशियाई शेरों का गिर से बाहर फैलना दशकों की संरक्षण सफलता का प्रमाण है, लेकिन नए इलाकों में मानव-शेर संघर्ष की संभावना भी उतनी ही वास्तविक है। सवाल यह है कि क्या नए असिस्टेंट कंजर्वेटर पदों और भूमि हस्तांतरण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को विश्वास में लेने की कोई ठोस रणनीति भी तैयार की गई है — जो अक्सर ऐसे आदेशों में अनुपस्थित रहती है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात सरकार ने पोरबंदर वन डिवीजन का पुनर्गठन क्यों किया?
यह पुनर्गठन 143 वर्षों के अंतराल के बाद एशियाई शेरों के बरदा वन्यजीव अभयारण्य में प्राकृतिक रूप से लौटने के बाद किया गया है। फील्ड-स्तरीय प्रशासन को सुदृढ़ करने और शेरों के संरक्षण व पुनर्वास को प्रशासनिक समर्थन देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अगुवाई में यह निर्णय लिया गया।
पुनर्गठित पोरबंदर वन डिवीजन में कितनी रेंज होंगी?
पुनर्गठन के बाद पोरबंदर वन डिवीजन में कुल 7 रेंज होंगी। इनमें पोरबंदर, राणावाव, भानवड़, कुटियाना, पोरबंदर सोशल फॉरेस्ट्री, राणावाव सोशल फॉरेस्ट्री और मोबाइल स्क्वाड रेंज शामिल हैं।
बरदा अभयारण्य में एशियाई शेर कब लौटे?
एशियाई शेर 143 वर्षों के अंतराल के बाद प्राकृतिक रूप से बरदा वन्यजीव अभयारण्य में लौटे हैं। यह वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक घटना मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले ये शेर मुख्यतः गिर वन तक ही सीमित थे।
नए प्रशासनिक ढाँचे में अधिकारियों की व्यवस्था कैसी होगी?
दो असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट नियुक्त किए जाएँगे। ACF-1 पोरबंदर, पोरबंदर सोशल फॉरेस्ट और राणावाव सोशल फॉरेस्ट रेंज की देखरेख करेंगे, जबकि ACF-2 राणावाव, भानवड़, कुटियाना और मोबाइल स्क्वाड रेंज का प्रबंधन देखेंगे। पूरा डिवीजन जूनागढ़ वाइल्डलाइफ सर्कल के अधीन रहेगा।
जामनगर वन डिवीजन से पोरबंदर को कितनी भूमि मिलेगी?
जामनगर वन डिवीजन की आरएफडब्ल्यू भाटिया रेंज से 305.94 हेक्टेयर भूमि पोरबंदर वन डिवीजन की भानवड़ रेंज में स्थानांतरित की जाएगी। इसमें देवभूमि द्वारका जिले के भानवड़ तालुका के चार गाँव — कंदरडा जोगना, सजदियाला, जूना और जांबुसर — शामिल हैं।
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