गुजरात में बिजली मांग 36.6% उछली, 29,822 मेगावाट का रिकॉर्ड; केंद्र से 5,000 MW अतिरिक्त आवंटन की माँग
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में 16 अक्टूबर 2026 को बिजली की माँग ने नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया — राज्य में 29,822 मेगावाट की अब तक की सर्वाधिक माँग दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष अक्टूबर में दर्ज 21,822 मेगावाट की तुलना में 36.6 प्रतिशत अधिक है। इस असाधारण उछाल के मद्देनज़र राज्य सरकार ने कोयले की आपूर्ति बढ़ाने, बैटरी स्टोरेज का विस्तार करने और केंद्र से अतिरिक्त बिजली आवंटन की माँग की है।
रिकॉर्ड माँग के पीछे के कारण
सरकार ने बताया कि कमज़ोर मानसून के बाद भी उच्च तापमान बना रहा और 'अल नीनो' के प्रभाव से कूलिंग से जुड़ी बिजली खपत बढ़ गई। दीपावली से पहले औद्योगिक गतिविधियों में तेज़ी और कृषि क्षेत्र में खड़ी फसलों की सिंचाई के लिए बिजली आपूर्ति ने भी माँग को बढ़ाया। कृषि क्षेत्र का दैनिक लोड 12,000 मेगावाट के पीक स्तर तक पहुँच गया।
इसके अलावा, गुजरात और पड़ोसी राज्यों में कम बारिश से जलविद्युत उत्पादन घटा है, जबकि हवा की गति कम रहने से पवन ऊर्जा उत्पादन भी प्रभावित हुआ। सूर्यास्त के बाद सौर ऊर्जा का उत्पादन शून्य हो जाने से शाम 5 बजे से रात 11 बजे के पीक आवर्स में ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री की उच्च-स्तरीय बैठक
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री आवास, गांधीनगर में आयोजित उच्च-स्तरीय बैठक में ऊर्जा मंत्री ऋषिकेश पटेल, ऊर्जा राज्यमंत्री कौशिक वेकारिया और मुख्य सचिव मनोज कुमार दास सहित ऊर्जा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में किसानों, उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदमों की समीक्षा की गई। प्रस्तुति के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में सितंबर-अक्टूबर में बिजली माँग में लगभग 12 प्रतिशत यानी 4,000 मेगावाट की वृद्धि आँकी गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब 16 अक्टूबर को राज्य की दैनिक खपत बढ़कर 574 मिलियन यूनिट हो गई, जबकि पिछले वर्ष अक्टूबर में यह 457 मिलियन यूनिट थी — यानी लगभग 27 प्रतिशत की वृद्धि।
केंद्र से आपूर्ति और समझौते
कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने नई दिल्ली में उच्च-स्तरीय चर्चाएँ कीं, जिसके परिणामस्वरूप केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने गुजरात स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड (GSECL) को नवंबर तक प्रतिदिन 10 से 11 रेलवे रेक कोयला उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। नवंबर के बाद यह आपूर्ति बढ़कर 13 से 14 रेक प्रतिदिन हो जाएगी।
गुजरात ने नवंबर के लिए NTPC के फरक्का संयंत्र से 329 मेगावाट और असम के केंद्रीय बिजली आवंटन में हिस्से से दीर्घकालिक आधार पर 551 मेगावाट बिजली हासिल की है। NTPC के बरौनी-I और दादरी-I थर्मल पावर स्टेशनों से 716 मेगावाट बिजली खरीद के मौजूदा समझौते की अवधि मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है। राज्य ने केंद्र के 'अनएलोकेटेड पावर पूल' से अतिरिक्त 500 मेगावाट बिजली की भी माँग की है।
बैटरी स्टोरेज और नवीकरणीय ऊर्जा योजना
गुजरात में वर्तमान में 192 मेगावाट क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) कार्यरत है। इसके अतिरिक्त, 2,742 मेगावाट क्षमता और 5,517 मेगावाट-हॉवर स्टोरेज क्षमता वाली परियोजनाओं के लिए अनुबंध पूरे हो चुके हैं। दिन में उत्पादित लगभग 12,000 मेगावाट सौर ऊर्जा को स्टोर करके पीक आवर्स में इस्तेमाल करने की योजना है।
गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL) से उम्मीद है कि वह 'शक्ति' योजना के तहत 4,000 मेगावाट के लिए टेंडर जारी करेगा, जिससे 2030-31 से बिजली आपूर्ति शुरू हो सकती है।
दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा की राह
न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) के साथ 4,200 मेगावाट की परमाणु ऊर्जा परियोजना के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, जिसकी पहली इकाई के 2032 में चालू होने की संभावना है। गौरतलब है कि 'स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर' और बिजली वितरण कंपनियाँ ग्रिड की फ्रीक्वेंसी और संतुलन बनाए रखने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही हैं। बढ़ती माँग और ऊर्जा-मिश्रण की जटिलताओं के बीच गुजरात की ऊर्जा नीति की अगली परीक्षा आने वाले ग्रीष्मकाल में होगी।