गुजरात प्री-पीटीसी एडमिशन: आयु सीमा 30 साल, सीटें 62 और EWS-दिव्यांग कोटा लागू
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 8 अक्टूबर 2026 को प्री-पीटीसी (डीईसीईडी) कॉलेजों — जिन्हें बाल अध्यापन मंदिर भी कहा जाता है — में प्रवेश के नियमों में व्यापक बदलाव किए हैं। अधिकतम आयु सीमा 24 वर्ष से बढ़ाकर 30 वर्ष की गई है, प्रति कक्षा सीटें 50 से बढ़ाकर 62 कर दी गई हैं, और पहली बार आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग (EWS) तथा दिव्यांगजनों के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू किया गया है। ये सुधार प्री-प्राइमरी शिक्षा में प्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या बढ़ाने और अधिक वर्गों को इस क्षेत्र से जोड़ने के उद्देश्य से किए गए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में घोषित इन बदलावों की देखरेख शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा और शिक्षा राज्य मंत्री रिवाबा जडेजा कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, ये संशोधन राज्य की प्री-प्राइमरी शिक्षा नीति को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।
सीटों में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए कुल 62 सीटें प्रति कक्षा निर्धारित की गई हैं। इनमें से 17 सीटें सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) के लिए 27 प्रतिशत कोटे के तहत, 4 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए 7 प्रतिशत कोटे के तहत और 9 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए 15 प्रतिशत कोटे के तहत आरक्षित होंगी।
EWS और दिव्यांग आरक्षण का विवरण
खुली श्रेणी के लिए 26 सीटें निर्धारित की गई हैं, जबकि EWS उम्मीदवारों के लिए 10 प्रतिशत कोटे के तहत 6 सीटें आरक्षित रहेंगी। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की धारा 32 के अनुसार दिव्यांगों के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण का भी प्रावधान किया गया है।
दिव्यांग कोटे का आवंटन निर्धारित दिव्यांगता श्रेणियों के अनुसार होगा। दिव्यांग उम्मीदवारों का चयन मेरिट और उनकी प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा, बशर्ते उनकी दिव्यांगता उन्हें शिक्षण कार्य करने से न रोकती हो।
पात्रता शर्तें और छूट
प्रवेश चाहने वाले उम्मीदवारों के लिए 12वीं कक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे। यह पात्रता गुजरात माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अलावा गुजरात व अन्य राज्यों के मान्यता प्राप्त बोर्डों — जिनमें CBSE और ICSE शामिल हैं — से उत्तीर्ण छात्रों पर भी लागू होगी।
SC, ST, SEBC और EWS वर्ग के उम्मीदवारों के साथ-साथ दिव्यांगजनों को न्यूनतम अंक आवश्यकता में 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी। अधिकतम आयु सीमा में भी इन वर्गों को अतिरिक्त 5 वर्ष की छूट दी जाएगी, अर्थात् उनके लिए प्रभावी आयु सीमा 35 वर्ष होगी। संबंधित शैक्षणिक वर्ष की 1 जुलाई की तिथि को आयु की गणना की जाएगी।
शिक्षा माध्यम में लचीलापन
नए नियमों में शिक्षा माध्यम के चुनाव को लेकर भी अधिक लचीलापन दिया गया है। उम्मीदवार उस संस्थान में प्रवेश ले सकते हैं जो उस माध्यम में पढ़ाता है जिसमें उन्होंने 10वीं या 12वीं में अध्ययन किया हो। यदि किसी विशेष माध्यम में सीटें रिक्त रह जाती हैं, तो दूसरी भाषा में पढ़े उम्मीदवार भी अपनी पसंद के माध्यम में प्रवेश पा सकते हैं।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि प्री-प्राइमरी शिक्षा में प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी लंबे समय से एक चुनौती रही है। राज्य सरकार के अनुसार, इन बदलावों से न केवल प्रवेश के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि इस क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव-संसाधन की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शिशु शिक्षा (Early Childhood Care and Education) को प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले शैक्षणिक सत्र से ये नियम प्रभावी होने की उम्मीद है।