एसआईआर विवाद: भाजपा का कांग्रेस पर पलटवार — '2027 गुजरात चुनाव से पहले ही हार मान ली'
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात की राजनीति में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उठे विवाद ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को नया मोड़ लिया, जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अहमदाबाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के आरोपों पर तीखा पलटवार किया। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस ने 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव में अपनी हार पहले ही मान ली है और वह राजनीतिक भ्रम में जी रही है।
भाजपा का पलटवार
राज्य भाजपा के मुख्य प्रवक्ता अनिल पटेल ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को सपने देखना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि पार्टी राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक हो चुकी है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा को तीन दशकों से अधिक समय से गुजरात की जनता का समर्थन मिलता रहा है और पार्टी का मजबूत जमीनी नेटवर्क उसे अगले विधानसभा चुनावों में भारी बहुमत दिलाएगा।
पटेल ने आरोप लगाया कि 'कांग्रेस ने एक तरह से 2027 में अपनी हार पहले ही मान ली है।' उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा नेतृत्व की दूरदर्शी सोच के कारण लोग लगातार पार्टी से जुड़ रहे हैं।
कांग्रेस का सड़क पर विरोध
भाजपा का यह पलटवार उस समय आया जब गुजरात कांग्रेस ने चुनाव आयोग के विरुद्ध अपना आंदोलन तेज कर दिया। काले कपड़े पहने पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पतंग होटल से सरदार बाग तक मार्च निकाला और धरना दिया। इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की गई।
गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा और कांग्रेस विधायक दल के नेता तुषार चौधरी ने इस प्रदर्शन की अगुवाई की। यह प्रदर्शन वोटर लिस्ट से बड़े पैमाने पर नाम हटाने के आरोपों और एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस के बड़े अभियान का हिस्सा था।
कांग्रेस के आरोप
चावड़ा ने आरोप लगाया कि 'वोट की चोरी लोगों के वोट देने के अधिकार के साथ धोखा है।' उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग कथित तौर पर मोदी सरकार के दबाव में काम कर रहा है। उनके अनुसार, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी 2023 से ही प्रेस कॉन्फ्रेंस, यात्राओं, विरोध प्रदर्शनों, हस्ताक्षर अभियानों, ज्ञापनों और संसद में हस्तक्षेप के ज़रिए वोट चोरी की चिंता जताते रहे हैं।
चावड़ा के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मुख्य चिंताएँ असली मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाने और वोटर लिस्ट में फर्जी नाम जोड़ने के आरोपों के रूप में सामने आई हैं। उन्होंने माँग की कि चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष एवं कानूनसम्मत जाँच हो।
हाशिये पर आने वाले वर्गों की चिंता
तुषार चौधरी ने विशेष रूप से कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के कारण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, बख्शीपंच समुदाय और आदिवासी इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के असली मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने इस प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग करते हुए कहा कि किसी भी गड़बड़ी के साबित होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
आगे क्या
गौरतलब है कि यह विवाद तब और गहरा हो रहा है जब 2027 के गुजरात विधानसभा चुनाव अभी से राजनीतिक दलों के एजेंडे पर हैं। दोनों दलों के बीच एसआईआर और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर यह टकराव आने वाले महीनों में और तीव्र होने की संभावना है, क्योंकि कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में इसी मुद्दे पर अभियान छेड़ने का संकेत दिया है।