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एसआईआर पर चुनाव आयोग में मतभेद? गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने कांग्रेस के आरोप को बताया निराधार

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एसआईआर पर चुनाव आयोग में मतभेद? गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने कांग्रेस के आरोप को बताया निराधार

सारांश

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद के कांग्रेस के दावे को सीधे खारिज किया — तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए। साथ ही कांग्रेस पर चुनावी नतीजों के अनुसार आयोग पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने 27 सितंबर 2026 को गांधीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर SIR पर चुनाव आयोग में मतभेद के कांग्रेस के दावे को निराधार बताया।
चुनाव आयोग ने स्वयं स्पष्ट किया कि तीनों चुनाव आयुक्तों ने SIR संबंधी सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए।
सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस, CPI, CPI(M) और TMC की चुनौती के बाद SIR प्रक्रिया को उचित माना।
पटेल ने केरल का उदाहरण दिया जहाँ कांग्रेस ने खुद SIR को अपनी जीत में सहायक बताया था।
कांग्रेस पर आरोप: चुनाव जीतने पर आयोग की तारीफ, हारने पर 'वोट चोरी' के आरोप।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 27 सितंबर 2026 को गांधीनगर स्थित राज्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्पष्ट किया कि मतदाता सूची संशोधन (SIR) पर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद के कांग्रेस के आरोप पूरी तरह निराधार हैं। उन्होंने कहा कि स्वयं चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि तीनों चुनाव आयुक्तों ने SIR से जुड़े सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए।

मुख्यमंत्री पटेल का पक्ष

पटेल ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था है और देश में चुनाव पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संपन्न होते हैं। उनके अनुसार, तीनों चुनाव आयुक्तों के सर्वसम्मत निर्णय की पुष्टि खुद आयोग ने की है, जिससे कांग्रेस का 'मतभेद' वाला दावा स्वतः खारिज हो जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग इस बात को सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है कि सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज हों और वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

सर्वोच्च न्यायालय का संदर्भ

पटेल ने बताया कि कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), CPI(M) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उनके अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद SIR प्रक्रिया को उचित ठहराया।

गौरतलब है कि नए मतदाताओं के पंजीकरण के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय ने फॉर्म 6 को उपयुक्त माना था। चुनाव आयोग ने आश्वस्त किया था कि कोई भी पात्र नागरिक मताधिकार से वंचित नहीं रहेगा।

कांग्रेस पर दोहरे रवैये का आरोप

मुख्यमंत्री पटेल ने कांग्रेस पर चुनावी नतीजों के अनुसार चुनाव आयोग को लेकर अलग-अलग रुख अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जब कांग्रेस चुनाव जीतती है तब वह लोकतंत्र और चुनाव आयोग की निष्पक्षता की तारीफ करती है, लेकिन जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को जनादेश मिलता है, तब 'वोट चोरी' और अनियमितताओं के आरोप लगाए जाते हैं।

पटेल ने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ कांग्रेस ने खुद SIR को उचित माना था और यहाँ तक कहा था कि इस प्रक्रिया ने उसकी जीत में योगदान किया।

पश्चिम बंगाल और कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति

पटेल ने पश्चिम बंगाल की मतदाता सूचियों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि वहाँ अवैध रूप से जोड़े गए नामों को हटाया गया और फर्जी मतदाताओं का पर्दाफाश हुआ, जिसके बाद भाजपा ने चुनाव में बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने यह भी बताया कि TMC की माँग पर सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के चुनावों के लिए एक विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त किया था।

पटेल ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी से सवाल करते हुए कहा कि कांग्रेस पश्चिम बंगाल में लगभग 40 वर्षों से सत्ता से बाहर है और 1990 से उत्तर प्रदेश तथा बिहार में भी उसकी राजनीतिक उपस्थिति क्षीण हो चुकी है।

आगे की राजनीतिक तस्वीर

SIR को लेकर शुरू हुई यह बहस चुनावी पारदर्शिता और संस्थागत स्वायत्तता के व्यापक प्रश्नों को उठाती है। मुख्यमंत्री पटेल का यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे पात्र मतदाता सूची से न छूटें — यह बिंदु राजनीतिक बहस में अक्सर दब जाता है। संस्थागत विश्वसनीयता की लड़ाई अब मैदान से ज्यादा कोर्टरूम और प्रेस कॉन्फ्रेंस में लड़ी जा रही है।
RashtraPress
28 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मतदाता सूची संशोधन (SIR) क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR यानी Special Intensive Revision एक प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची की समीक्षा, सुधार और अद्यतन करता है। कांग्रेस और कुछ विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया पर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद थे, जिसे आयोग और CM पटेल दोनों ने खारिज किया है।
चुनाव आयोग ने SIR पर मतभेद के आरोपों पर क्या कहा?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR से संबंधित सभी निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से लिए थे। इसी स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने कांग्रेस के मतभेद वाले दावे को निराधार बताया।
सर्वोच्च न्यायालय ने SIR पर क्या निर्णय दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने कांग्रेस, CPI, CPI(M) और TMC की चुनौती को सुनने के बाद SIR प्रक्रिया को उचित ठहराया। साथ ही अदालत ने नए मतदाता पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 को उपयुक्त माना था।
CM पटेल ने केरल और पश्चिम बंगाल का उदाहरण क्यों दिया?
केरल के संदर्भ में पटेल ने कहा कि कांग्रेस ने खुद SIR को अपनी जीत में सहायक बताया था, जो उसकी वर्तमान आलोचना से विरोधाभासी है। पश्चिम बंगाल में उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध नाम हटाने के बाद भाजपा को चुनावी लाभ मिला।
कांग्रेस पर CM पटेल ने दोहरे रवैये का क्या आरोप लगाया?
पटेल के अनुसार कांग्रेस चुनाव जीतने पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता की तारीफ करती है, लेकिन PM मोदी के नेतृत्व में भाजपा को जनादेश मिलने पर 'वोट चोरी' और अनियमितताओं के आरोप लगाती है। यह वही दोहरा मानदंड है जिसे पटेल ने राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।
राष्ट्र प्रेस
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