कुमारस्वामी का कांग्रेस पर पलटवार: 'वोट चोरी का आरोप राक्षस के मुंह से गीता उपदेश जैसा'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 2 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कर्नाटक की भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सरकार पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) की प्रक्रिया का विरोध कर पाखंड कर रही है, जबकि स्वयं उसके कार्यकर्ताओं ने इसी प्रक्रिया के शुरुआती चरणों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की थीं। कुमारस्वामी ने कांग्रेस के इस विरोध की तुलना 'राक्षस के मुंह से भगवद गीता का उपदेश सुनने' से की।
मुख्य आरोप और बयान
कुमारस्वामी ने एक लिखित बयान में कहा कि कांग्रेस पार्टी का एसआईआर में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बोलना 'शर्मनाक' है। उनके अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता मतदाता सूची सुधार की प्रक्रिया के दौरान शादी हॉल, कम्युनिटी हॉल, घरों और अन्य स्थानों पर लोगों को समूह में इकट्ठा करके सूची में बदलाव करवाते देखे गए थे। उन्होंने कहा, 'जनता दल (सेक्युलर) ने इसके विरुद्ध चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, और बाद में एनडीए गठबंधन के सभी नेताओं ने भी आयोग से संपर्क कर अपनी शिकायतें दर्ज कराई थीं।'
कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन पर निशाना
कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके कैबिनेट सहयोगियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे कैबिनेट बैठक में उपस्थित होने के बजाय सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना दिया था। उन्होंने माँग की थी कि 'फॉर्म 7' आवेदनों के माध्यम से योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की कथित साजिश की जाँच हो और इस मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।
कुमारस्वामी ने यह भी माँग की कि पुलिस उन कांग्रेस नेताओं के विरुद्ध तत्काल मुकदमा दर्ज करे, जिन्होंने विरोध-प्रदर्शन के दौरान ट्रैफिक जाम कर जनता को परेशान किया।
बेंगलुरु-मैसूर कॉरिडोर विवाद से जोड़ा
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए एसआईआर का मुद्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों पर एक कंपनी के साथ मिलीभगत करके कॉरिडोर प्रोजेक्ट की ज़मीन हासिल करने के कथित आरोपों के समर्थन में दस्तावेज पेश किए थे। कुमारस्वामी ने कहा, 'जब इस मुद्दे पर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा तेज हुई, तभी मुख्यमंत्री ने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए एसआईआर का मुद्दा सामने रख दिया।'
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी दलों — विशेष रूप से जनता दल (सेक्युलर) — जेडीएस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) — के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की नियमित कवायद है, लेकिन इस बार इसने राज्य में जबरदस्त राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कुमारस्वामी के ये आरोप 'दिल्ली नेतृत्व के दबाव' में कांग्रेस की रणनीति पर भी सवाल खड़े करते हैं।
आगे क्या
एनडीए और जेडीएस द्वारा चुनाव आयोग में दर्ज शिकायतों पर आयोग की कार्रवाई अभी प्रतीक्षित है। बेंगलुरु-मैसूर कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़े आरोपों पर भी राजनीतिक और कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ने की संभावना है। कर्नाटक की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।