2 अक्टूबर 2026
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कुमारस्वामी का कांग्रेस पर पलटवार: 'वोट चोरी का आरोप राक्षस के मुंह से गीता उपदेश जैसा'

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कुमारस्वामी का कांग्रेस पर पलटवार: 'वोट चोरी का आरोप राक्षस के मुंह से गीता उपदेश जैसा'

सारांश

केंद्रीय मंत्री कुमारस्वामी ने कांग्रेस के एसआईआर विरोध को 'राक्षस के मुंह से गीता उपदेश' बताकर पाखंड का आरोप लगाया। पलटवार में उन्होंने बेंगलुरु-मैसूर कॉरिडोर भ्रष्टाचार के आरोपों को ध्यान भटकाने की कोशिश बताया — कर्नाटक की राजनीति में नया तूफान।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने 2 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पर एसआईआर विरोध में पाखंड का आरोप लगाया।
कुमारस्वामी ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खुद मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान शादी हॉल, कम्युनिटी हॉल और घरों में लोगों को इकट्ठा कर अनियमितताएं की थीं।
जनता दल (सेक्युलर) और एनडीए ने पहले ही चुनाव आयोग में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिवकुमार ने गुरुवार को बेंगलुरु में चुनाव अधिकारी के दफ्तर के बाहर धरना देकर 'फॉर्म 7' के ज़रिए नाम हटाने की जाँच माँगी थी।
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि बेंगलुरु-मैसूर कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर कथित भ्रष्टाचार से ध्यान हटाने के लिए एसआईआर का मुद्दा उठाया गया।

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने 2 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में कर्नाटक की भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सरकार पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) की प्रक्रिया का विरोध कर पाखंड कर रही है, जबकि स्वयं उसके कार्यकर्ताओं ने इसी प्रक्रिया के शुरुआती चरणों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की थीं। कुमारस्वामी ने कांग्रेस के इस विरोध की तुलना 'राक्षस के मुंह से भगवद गीता का उपदेश सुनने' से की।

मुख्य आरोप और बयान

कुमारस्वामी ने एक लिखित बयान में कहा कि कांग्रेस पार्टी का एसआईआर में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ बोलना 'शर्मनाक' है। उनके अनुसार, कांग्रेस कार्यकर्ता मतदाता सूची सुधार की प्रक्रिया के दौरान शादी हॉल, कम्युनिटी हॉल, घरों और अन्य स्थानों पर लोगों को समूह में इकट्ठा करके सूची में बदलाव करवाते देखे गए थे। उन्होंने कहा, 'जनता दल (सेक्युलर) ने इसके विरुद्ध चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, और बाद में एनडीए गठबंधन के सभी नेताओं ने भी आयोग से संपर्क कर अपनी शिकायतें दर्ज कराई थीं।'

कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन पर निशाना

कुमारस्वामी ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और उनके कैबिनेट सहयोगियों की आलोचना करते हुए कहा कि वे कैबिनेट बैठक में उपस्थित होने के बजाय सड़कों पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना दिया था। उन्होंने माँग की थी कि 'फॉर्म 7' आवेदनों के माध्यम से योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की कथित साजिश की जाँच हो और इस मामले में आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।

कुमारस्वामी ने यह भी माँग की कि पुलिस उन कांग्रेस नेताओं के विरुद्ध तत्काल मुकदमा दर्ज करे, जिन्होंने विरोध-प्रदर्शन के दौरान ट्रैफिक जाम कर जनता को परेशान किया।

बेंगलुरु-मैसूर कॉरिडोर विवाद से जोड़ा

कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार ने बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए एसआईआर का मुद्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि तीन दिन पहले उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों पर एक कंपनी के साथ मिलीभगत करके कॉरिडोर प्रोजेक्ट की ज़मीन हासिल करने के कथित आरोपों के समर्थन में दस्तावेज पेश किए थे। कुमारस्वामी ने कहा, 'जब इस मुद्दे पर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा तेज हुई, तभी मुख्यमंत्री ने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए एसआईआर का मुद्दा सामने रख दिया।'

राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी दलों — विशेष रूप से जनता दल (सेक्युलर) — जेडीएस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) — के बीच मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। गौरतलब है कि एसआईआर प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की नियमित कवायद है, लेकिन इस बार इसने राज्य में जबरदस्त राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कुमारस्वामी के ये आरोप 'दिल्ली नेतृत्व के दबाव' में कांग्रेस की रणनीति पर भी सवाल खड़े करते हैं।

आगे क्या

एनडीए और जेडीएस द्वारा चुनाव आयोग में दर्ज शिकायतों पर आयोग की कार्रवाई अभी प्रतीक्षित है। बेंगलुरु-मैसूर कॉरिडोर प्रोजेक्ट से जुड़े आरोपों पर भी राजनीतिक और कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ने की संभावना है। कर्नाटक की राजनीति में यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य में आगामी चुनावी आख्यान को नियंत्रित करने पर है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह चूक जाती है कि जब दोनों पक्ष एक-दूसरे पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हैं, तो चुनाव आयोग की स्वतंत्र जाँच ही एकमात्र विश्वसनीय रास्ता है — और उसकी चुप्पी सबसे महत्वपूर्ण खबर बन जाती है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) क्या है और यह विवाद क्यों बना?
एसआईआर चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया है। कर्नाटक में इस बार यह विवादित बन गई क्योंकि विपक्षी दलों ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर सूची में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस ने 'फॉर्म 7' के जरिए वोटरों के नाम हटाने की साजिश का आरोप लगाया।
कुमारस्वामी ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने खुद एसआईआर प्रक्रिया के दौरान शादी हॉल, कम्युनिटी हॉल और घरों में लोगों को इकट्ठा कर मतदाता सूची में बदलाव करवाए थे। उन्होंने कहा कि जेडीएस और एनडीए ने तब ही चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन सरकार तब चुप रही।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने किस बात का विरोध किया?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने गुरुवार को बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने 'फॉर्म 7' आवेदनों के जरिए योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की कथित साजिश की जाँच और आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की माँग की।
बेंगलुरु-मैसूर कॉरिडोर प्रोजेक्ट विवाद का एसआईआर से क्या संबंध है?
कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि बेंगलुरु-मैसूर इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर प्रोजेक्ट में कथित भ्रष्टाचार पर उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मुख्यमंत्री शिवकुमार ने लोगों का ध्यान भटकाने के लिए एसआईआर का मुद्दा उठाया। दोनों मामले फिलहाल राजनीतिक रूप से आपस में उलझे हुए हैं।
इस विवाद में आगे क्या हो सकता है?
चुनाव आयोग में एनडीए और जेडीएस द्वारा दर्ज शिकायतों पर आयोग की कार्रवाई प्रतीक्षित है। कुमारस्वामी ने पुलिस से विरोध-प्रदर्शन में ट्रैफिक जाम करने वाले कांग्रेस नेताओं पर तत्काल मुकदमा दर्ज करने की माँग भी की है, जिस पर निर्णय होना बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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