16 अक्टूबर 2026
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गुरदासपुर में नशा तस्करों को रोकने गए तीन लोगों पर हमला, बिक्रमजीत सिंह की मौत; दो घायल

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गुरदासपुर में नशा तस्करों को रोकने गए तीन लोगों पर हमला, बिक्रमजीत सिंह की मौत; दो घायल

सारांश

पंजाब के गुरदासपुर में नशा तस्करों को रोकने गए तीन ग्रामीणों पर 10-15 हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला किया — एक की जान गई, दो गंभीर हैं। 13 अक्टूबर को परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद यह महज तीन दिनों में दूसरी बड़ी घटना है।

मुख्य बातें

16 अक्टूबर 2026 को गुरदासपुर के गाँव माड़ी पन्नवां में नशा तस्करों को रोकने गए तीन ग्रामीणों पर धारदार हथियारों से हमला।
बिक्रमजीत सिंह (40) की सीएचसी भाम में उपचार के दौरान मौत; निशान सिंह और गुरमुख सिंह गंभीर रूप से घायल।
सरपंच सुरिंदरपाल सिंह बाजवा के अनुसार 10 से 15 हमलावरों ने एकसाथ हमला किया।
एसएचओ सुखजिंदर सिंह ने जाँच शुरू होने की पुष्टि की; अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं।
इससे पहले 13 अक्टूबर को नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या की गई थी।

पंजाब के गुरदासपुर जिले के गाँव माड़ी पन्नवां में 16 अक्टूबर 2026 को नशीले पदार्थ बेचने वालों को रोकने गए तीन ग्रामीणों पर कथित तौर पर 10 से 15 हमलावरों ने धारदार हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में 40 वर्षीय बिक्रमजीत सिंह की मौत हो गई, जबकि निशान सिंह (35) और गुरमुख सिंह (35) गंभीर रूप से घायल हैं।

घटनाक्रम: कैसे हुआ हमला

गाँव के सरपंच सुरिंदरपाल सिंह बाजवा के अनुसार, निशान सिंह पुत्र अमरजीत सिंह, गुरमुख सिंह पुत्र परमजीत सिंह और बिक्रमजीत सिंह पुत्र तरसेम सिंह कथित तौर पर नशा तस्करों को रोकने के इरादे से गए थे। इसी दौरान एक बड़े समूह ने तीनों पर धारदार हथियारों से हमला बोल दिया, जिससे तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), भाम पहुँचाया गया। वहाँ इलाज के दौरान बिक्रमजीत सिंह ने दम तोड़ दिया। डॉ. अभिषेक ने पुष्टि की कि अन्य दोनों घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

पुलिस की प्रतिक्रिया

थाना श्री हरगोबिंदपुर के एसएचओ सुखजिंदर सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही जाँच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस जाँच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्य और आरोपों की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पृष्ठभूमि: पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं पर हमले

यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं पर हमलों का सिलसिला थम नहीं रहा। गौरतलब है कि इससे महज कुछ दिन पहले, 13 अक्टूबर को, नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। झोटा ने एक आरोपी के मेडिकल स्टोर से नशीले कैप्सूल खरीदते एक व्यक्ति को देखकर वीडियो बनाना शुरू किया था और पुलिस को कॉल किया था — लेकिन पुलिस समय पर नहीं पहुँची। इसी बीच आरोपी ने झोटा पर गोली चला दी।

उस घटना में झोटा के चार साथी — कुलविंदर सिंह, गोबिंद सिंह, बलतेज सिंह और हैप्पी — भी घायल हुए थे। माड़ी पन्नवां की घटना उसी खतरनाक प्रवृत्ति की अगली कड़ी प्रतीत होती है, जिसमें नशा तस्करी को चुनौती देने की कोशिश करने वाले आम नागरिकों को हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है।

आम जनता पर असर

घटना के बाद माड़ी पन्नवां और आसपास के इलाकों में भय और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि जब नशा तस्करों को सार्वजनिक रूप से रोकने की कोशिश करने पर भी जान का खतरा हो, तो आम नागरिक इस लड़ाई में कैसे भागीदार बनें।

क्या होगा आगे

पुलिस मामले की जाँच कर रही है और हमलावरों की पहचान की कोशिश जारी है। गुरदासपुर जिले में नशे के खिलाफ बढ़ते अपराध की यह घटना राज्य सरकार और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ाएगी। आने वाले दिनों में अभियुक्तों की गिरफ्तारी और जाँच की दिशा पर सबकी नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो दर्शाती है कि नशा तस्कर नेटवर्क अब आम नागरिकों की प्रतिरोध-क्षमता को कुचलने पर उतारू हैं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि झोटा ने पुलिस को कॉल किया और पुलिस समय पर नहीं पहुँची — यह जवाबदेही का वह सवाल है जिसका जवाब राज्य सरकार को देना होगा। जब नशा तस्करों को रोकने की नागरिक हिम्मत जान की कीमत पर खरीदी जाने लगे, तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने पर सीधा हमला है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरदासपुर के माड़ी पन्नवां में क्या हुआ?
16 अक्टूबर 2026 को गाँव माड़ी पन्नवां में नशीले पदार्थ बेचने वालों को रोकने गए तीन ग्रामीणों पर कथित तौर पर 10 से 15 हमलावरों ने धारदार हथियारों से हमला किया। इस हमले में 40 वर्षीय बिक्रमजीत सिंह की मौत हो गई और निशान सिंह व गुरमुख सिंह गंभीर रूप से घायल हैं।
पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं पर हाल ही में कौन-कौन सी घटनाएँ हुई हैं?
13 अक्टूबर 2026 को नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब उन्होंने एक मेडिकल स्टोर से नशीले कैप्सूल की बिक्री का वीडियो बनाया और पुलिस को सूचित करने की कोशिश की। उस घटना में उनके चार साथी भी घायल हुए थे। माड़ी पन्नवां की घटना उसी सिलसिले की अगली कड़ी है।
हमले में मारे गए और घायल लोग कौन हैं?
हमले में बिक्रमजीत सिंह पुत्र तरसेम सिंह (40 वर्ष) की मौत हुई। निशान सिंह पुत्र अमरजीत सिंह (35 वर्ष) और गुरमुख सिंह पुत्र परमजीत सिंह (35 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हैं और इलाज जारी है।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
थाना श्री हरगोबिंदपुर के एसएचओ सुखजिंदर सिंह ने पुष्टि की है कि मामले की जाँच शुरू कर दी गई है। हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है, लेकिन अब तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक जानकारी नहीं आई है।
क्या पंजाब में नशा तस्करों के खिलाफ बोलना खतरनाक हो गया है?
हाल की घटनाएँ यही संकेत देती हैं। परविंदर सिंह झोटा की हत्या और माड़ी पन्नवां का हमला दोनों उन आम नागरिकों पर हुए जो नशा तस्करी को उजागर करने या रोकने की कोशिश कर रहे थे। इससे स्थानीय समुदायों में भय का माहौल बना है और पुलिस की समय पर प्रतिक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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