गुरदासपुर में नशा तस्करों को रोकने गए तीन लोगों पर हमला, बिक्रमजीत सिंह की मौत; दो घायल
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के गुरदासपुर जिले के गाँव माड़ी पन्नवां में 16 अक्टूबर 2026 को नशीले पदार्थ बेचने वालों को रोकने गए तीन ग्रामीणों पर कथित तौर पर 10 से 15 हमलावरों ने धारदार हथियारों से जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में 40 वर्षीय बिक्रमजीत सिंह की मौत हो गई, जबकि निशान सिंह (35) और गुरमुख सिंह (35) गंभीर रूप से घायल हैं।
घटनाक्रम: कैसे हुआ हमला
गाँव के सरपंच सुरिंदरपाल सिंह बाजवा के अनुसार, निशान सिंह पुत्र अमरजीत सिंह, गुरमुख सिंह पुत्र परमजीत सिंह और बिक्रमजीत सिंह पुत्र तरसेम सिंह कथित तौर पर नशा तस्करों को रोकने के इरादे से गए थे। इसी दौरान एक बड़े समूह ने तीनों पर धारदार हथियारों से हमला बोल दिया, जिससे तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), भाम पहुँचाया गया। वहाँ इलाज के दौरान बिक्रमजीत सिंह ने दम तोड़ दिया। डॉ. अभिषेक ने पुष्टि की कि अन्य दोनों घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
पुलिस की प्रतिक्रिया
थाना श्री हरगोबिंदपुर के एसएचओ सुखजिंदर सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही जाँच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस जाँच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्य और आरोपों की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अब तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
पृष्ठभूमि: पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं पर हमले
यह ऐसे समय में आया है जब पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ताओं पर हमलों का सिलसिला थम नहीं रहा। गौरतलब है कि इससे महज कुछ दिन पहले, 13 अक्टूबर को, नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा को दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। झोटा ने एक आरोपी के मेडिकल स्टोर से नशीले कैप्सूल खरीदते एक व्यक्ति को देखकर वीडियो बनाना शुरू किया था और पुलिस को कॉल किया था — लेकिन पुलिस समय पर नहीं पहुँची। इसी बीच आरोपी ने झोटा पर गोली चला दी।
उस घटना में झोटा के चार साथी — कुलविंदर सिंह, गोबिंद सिंह, बलतेज सिंह और हैप्पी — भी घायल हुए थे। माड़ी पन्नवां की घटना उसी खतरनाक प्रवृत्ति की अगली कड़ी प्रतीत होती है, जिसमें नशा तस्करी को चुनौती देने की कोशिश करने वाले आम नागरिकों को हिंसा का शिकार बनाया जा रहा है।
आम जनता पर असर
घटना के बाद माड़ी पन्नवां और आसपास के इलाकों में भय और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि जब नशा तस्करों को सार्वजनिक रूप से रोकने की कोशिश करने पर भी जान का खतरा हो, तो आम नागरिक इस लड़ाई में कैसे भागीदार बनें।
क्या होगा आगे
पुलिस मामले की जाँच कर रही है और हमलावरों की पहचान की कोशिश जारी है। गुरदासपुर जिले में नशे के खिलाफ बढ़ते अपराध की यह घटना राज्य सरकार और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ाएगी। आने वाले दिनों में अभियुक्तों की गिरफ्तारी और जाँच की दिशा पर सबकी नज़रें टिकी हैं।