31 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़: गेट और फुटबोर्ड पर जान जोखिम में डालकर सफर करते मजदूर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़: गेट और फुटबोर्ड पर जान जोखिम में डालकर सफर करते मजदूर

सारांश

हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर भीड़ का यह मंज़र सिर्फ असुविधा नहीं — यह बिहार के प्रवासी संकट का आईना है। गेट और फुटबोर्ड पर लटके मजदूर बता रहे हैं कि रोज़गार की तलाश में राज्य से पलायन आज भी जारी है, और रेलवे तंत्र इस दबाव को झेलने में नाकाम दिख रहा है।

मुख्य बातें

हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर 14 जून को यात्रियों की असाधारण भीड़, डिब्बों में खड़े होने तक की जगह नहीं।
यात्री दशरथ मंडल समेत कई मजदूर गेट और फुटबोर्ड पर लटककर अंबाला व अन्य राज्यों की ओर जाने को मजबूर।
यात्री मोहम्मद अमताभ ने रेलवे प्रशासन पर निशाना साधा — 'सरकार को यह परेशानी दिखाई नहीं दे रही।' यात्रियों ने अतिरिक्त कोच और विशेष ट्रेनों की माँग की; रेलवे की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।
फुटबोर्ड पर यात्रा रेलवे नियमों का उल्लंघन और जानलेवा जोखिम।

हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर 14 जून को यात्रियों की असाधारण भीड़ उमड़ी, जहाँ दर्जनों लोग ट्रेन के दरवाज़ों और फुटबोर्ड पर लटककर जान जोखिम में डालते हुए सफर करने को विवश नज़र आए। बिहार के इस प्रमुख रेलवे स्टेशन पर भीड़ का आलम यह था कि डिब्बों के भीतर खड़े होने तक की जगह नहीं बची, और यात्रियों ने रेलवे व्यवस्था के प्रति खुलकर रोष व्यक्त किया।

मजदूरों की दर्दभरी दास्तान

अंबाला जाने वाले यात्री दशरथ मंडल ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा, 'हम इसी तरह सफर करके आ रहे हैं। सीट नहीं मिली, इसलिए गेट पर बैठकर जा रहे हैं। यहाँ से अंबाला जाना है। हम मजदूर आदमी हैं, मजबूरी में ऐसे ही जाना पड़ता है। अंबाला में किसान के यहाँ काम करते हैं।' दशरथ मंडल जैसे अनेक प्रवासी मजदूर बेहतर रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं, लेकिन ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ उनकी यात्रा को जोखिम भरा बना रही है।

यात्रियों का रेलवे प्रशासन पर आरोप

एक अन्य यात्री मोहम्मद अमताभ ने रेलवे व्यवस्था पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'इतनी भीड़ है, लेकिन सरकार को यह परेशानी दिखाई नहीं दे रही है। ट्रेन के अंदर खड़े होने तक की जगह नहीं है। यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है।' एक तीसरे यात्री ने भी चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा कि जिस स्टेशन से ट्रेन खुलती है, वहीं से यात्रियों की संख्या और भीड़ का सटीक आकलन किया जा सकता है।

प्रवासी मजदूरों की समस्या और व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार से प्रवासी मजदूरों का पलायन एक सतत सामाजिक-आर्थिक वास्तविकता बनी हुई है। गर्मियों के मौसम में रोज़गार की तलाश में पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जाने वाले श्रमिकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, जिससे इन मार्गों पर ट्रेनों में भीड़ चरम पर पहुँच जाती है। गौरतलब है कि फुटबोर्ड और दरवाज़ों पर यात्रा करना न केवल रेलवे नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह यात्रियों की जान के लिए गंभीर खतरा भी है।

यात्रियों की माँग

हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने माँग की कि भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त कोच जोड़े जाएँ अथवा विशेष ट्रेनें चलाई जाएँ, ताकि प्रवासी श्रमिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा सुनिश्चित हो सके। रेलवे प्रशासन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार रेलवे की प्रतिक्रिया उतनी ही सुस्त रहती है। फुटबोर्ड पर लटककर सफर करना तकनीकी रूप से अवैध है, फिर भी प्रशासन इसे रोकने में असमर्थ दिखता है — यह व्यवस्थागत विफलता है, न कि महज़ भीड़ की समस्या। बिहार से प्रवासी पलायन की मूल वजह — राज्य में पर्याप्त रोज़गार का अभाव — को संबोधित किए बिना, अतिरिक्त कोच जोड़ना लक्षण का इलाज है, बीमारी का नहीं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर भीड़ की स्थिति कब और क्यों बिगड़ी?
14 जून को हाजीपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की असाधारण भीड़ उमड़ी। गर्मियों के मौसम में बिहार से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में काम की तलाश में जाने वाले प्रवासी मजदूरों की संख्या बढ़ने के कारण इन मार्गों पर ट्रेनों में अत्यधिक दबाव पड़ता है।
फुटबोर्ड पर यात्रा करना कितना खतरनाक है?
फुटबोर्ड और ट्रेन के दरवाज़ों पर लटककर यात्रा करना भारतीय रेलवे के नियमों का उल्लंघन है और यह जानलेवा हो सकता है। तेज़ रफ्तार ट्रेन में संतुलन बिगड़ने, किसी स्तंभ या दूसरी ट्रेन से टकराने पर गंभीर दुर्घटना का खतरा रहता है।
यात्रियों ने रेलवे से क्या माँग की है?
हाजीपुर स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से अतिरिक्त कोच जोड़ने और व्यस्त मार्गों पर विशेष ट्रेनें चलाने की माँग की है, ताकि प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित यात्रा मिल सके।
बिहार से प्रवासी मजदूरों का पलायन इतना अधिक क्यों है?
बिहार में पर्याप्त स्थानीय रोज़गार के अवसरों की कमी के कारण लाखों मजदूर हर साल कृषि कार्य, निर्माण और अन्य मौसमी रोज़गार के लिए पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में जाते हैं। दशरथ मंडल जैसे मजदूर हरियाणा में किसानों के यहाँ काम करने जाते हैं।
रेलवे प्रशासन ने इस भीड़ पर क्या कार्रवाई की?
14 जून को हाजीपुर स्टेशन पर उमड़ी भीड़ के बाद रेलवे प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या तत्काल राहत उपाय की घोषणा सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 महीने पहले
  2. 9 महीने पहले
  3. 9 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले