HAL कोरापुट ने दिया 2,000वाँ एयरो-इंजन, राजनाथ सिंह ने रखा 10 हज़ार इंजनों का अगला लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के कोरापुट संभाग ने 6 अक्टूबर 2026 को भारत के एयरो-इंजन निर्माण इतिहास में एक निर्णायक मील का पत्थर पार किया — रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में 2,000वें एयरो-इंजन की औपचारिक डिलीवरी संपन्न हुई। इसी कार्यक्रम में हेलीकॉप्टरों के लिए उपयोग होने वाले शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन का भी उद्घाटन किया गया, जिसमें ₹218 करोड़ का निवेश किया गया है।
ऐतिहासिक यात्रा: 1964 से 2,000 इंजन तक
HAL कोरापुट की स्थापना 1964 में हुई थी और तब से यह संभाग भारत की एयरो-इंजन क्षमता का एक अहम केंद्र बन चुका है। यहाँ निर्मित और रखरखाव किए गए इंजनों ने मिग-21, मिग-27, मिग-29 और सुखोई-30 MKI जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को शक्ति दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक संख्या नहीं, बल्कि 'भारत की एयरोस्पेस यात्रा और सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता में 2,000 महत्वपूर्ण योगदान का प्रतीक है।' उन्होंने कहा कि इन इंजनों के पीछे 'कई पीढ़ियों के इंजीनियरों, तकनीशियनों, पर्यवेक्षकों, वैज्ञानिकों और कुशल कामगारों की प्रतिबद्धता और कर्तव्यनिष्ठा है।'
शक्ति इंजन की दूसरी उत्पादन लाइन: स्वदेशी हेलीकॉप्टरों को मिलेगी रफ़्तार
कोरापुट में स्थापित शक्ति इंजन की नई उत्पादन लाइन पर ₹218 करोड़ खर्च किए गए हैं। यह अतिरिक्त क्षमता उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (ALH) और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (LCH) जैसे पूर्णतः स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए तैयार की गई है। गौरतलब है कि ये दोनों हेलीकॉप्टर सशस्त्र बलों में तेज़ी से तैनात हो रहे हैं और उनके इंजनों की समय पर आपूर्ति राष्ट्रीय रक्षा तैयारी के लिए अनिवार्य है।
AL-31FP इंजन: समयसीमा से पहले डिलीवरी
राजनाथ सिंह ने सुखोई-30 MKI के लिए उपयोग होने वाले AL-31FP इंजन के उत्पादन में HAL कोरापुट की टीम की सराहना की। उन्होंने बताया कि 2024 में भारत सरकार ने HAL को 240 AL-31FP इंजनों का आदेश दिया था। वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और कच्चे माल की चुनौतियों के बावजूद पहला इंजन निर्धारित समय से पहले तैयार किया गया। रक्षा मंत्री के अनुसार, दूसरे वर्ष के अंत तक 60 इंजनों के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 63 इंजन वितरित किए जा चुके हैं — लक्ष्य से तीन अधिक। अब HAL अपनी वार्षिक AL-31FP उत्पादन क्षमता 30 से बढ़ाकर 50 इंजन प्रतिवर्ष करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसके लिए ₹335 करोड़ का निवेश किया जा रहा है।
₹5,000 करोड़ का निवेश और कच्चे माल का स्वदेशीकरण
रक्षा मंत्री ने बताया कि लगभग ₹5,000 करोड़ के निवेश की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने मिश्र धातु निगम लिमिटेड के साथ साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया, जो रक्षा क्षेत्र में उपयोग होने वाले कच्चे माल के स्वदेशीकरण में सहायक है। राजनाथ सिंह ने कहा कि एयरो-इंजन निर्माण में आत्मनिर्भरता केवल इंजन तैयार करने तक सीमित नहीं — आवश्यक कच्चे माल और कलपुर्जों की आपूर्ति में भी देश को अपनी क्षमता मज़बूत करनी होगी।
अगला लक्ष्य: 10 हज़ार, फिर 1 लाख इंजन
रक्षा मंत्री ने इस उपलब्धि को भविष्य के बड़े संकल्प की शुरुआत बताते हुए कहा, 'आज के 2,000वें इंजन की डिलीवरी को हम केवल एक मील का पत्थर न लें, बल्कि अगले 10 हज़ार, अगले 1 लाख और एक ऐसी भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के निर्माण के संकल्प के रूप में लें, जो दुनिया की सबसे उन्नत प्रणोदन प्रणालियों को डिज़ाइन, विकसित, निर्मित और उनका समर्थन करने में सक्षम हो।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एयरो-इंजन पर महारत हासिल करना आधुनिक उद्योग की सर्वोच्च तकनीकी दक्षताओं में से एक है और विश्व में गिने-चुने देश ही यह क्षमता रखते हैं — भारत अब उस सूची में है। यह इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का संकेत है।