'अरावली' हेलीकॉप्टर इंजन: HAL और सफ्रान का 50:50 समझौता, 2032-33 तक विकास का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और फ्रांस की सफ्रान हेलीकॉप्टर इंजन्स ने भारत में पहली बार एक हाई-पावर हेलीकॉप्टर इंजन के संयुक्त डिजाइन और विकास के लिए ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों कंपनियों के 50:50 संयुक्त उपक्रम — सफल हेलीकॉप्टर इंजन्स प्राइवेट लिमिटेड — के तहत विकसित होने वाले इस अत्याधुनिक इंजन को 'अरावली' नाम दिया गया है। यह पहला अवसर होगा जब भारत की धरती पर इतनी उच्च क्षमता वाले हेलीकॉप्टर इंजन की डिजाइनिंग और विकास किया जाएगा।
इंजन की क्षमता और उपयोग
HAL द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, 'अरावली' इंजन की क्षमता 3,500 से 4,000 शाफ्ट हॉर्सपावर होगी। यह इंजन भारत के बहुप्रतीक्षित 13 टन इंडियन मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (IMRH) तथा उसके नौसैनिक संस्करण डेक-बेस्ड मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर (DBMRH) को शक्ति प्रदान करेगा। यह परियोजना केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी — भविष्य में अपतटीय परिवहन, उपयोगिता मिशनों और वीवीआईपी परिवहन जैसे नागरिक उड्डयन क्षेत्रों में भी इसके उपयोग की संभावना है।
तकनीकी हस्तांतरण और आत्मनिर्भरता
इस परियोजना के अंतर्गत HAL को हाई-प्रेशर कंप्रेसर, पावर टर्बाइन, फ्यूल और ऑयल सिस्टम, एक्सेसरी गियरबॉक्स तथा इंजन एक्सटर्नल सिस्टम जैसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों तक पहुँच मिलेगी। HAL और सफ्रान के इंजीनियर पूरे विकास कार्यक्रम के दौरान संयुक्त रूप से कार्य करेंगे, जिससे भारतीय इंजीनियरों को अंतरराष्ट्रीय डिजाइन प्रक्रियाओं, परीक्षण मानकों और प्रमाणन प्रणाली का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। HAL को इंजन डिजाइन से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकार (IP) और तकनीकी विशेषज्ञता भी प्राप्त होगी।
निर्माण स्थल और समयसीमा
'अरावली' इंजन का निर्माण कर्नाटक के तुमकुरु स्थित सफल संयंत्र में किया जाएगा। HAL के अनुसार, इंजन के डिजाइन और विकास का कार्य 2032-33 तक पूरा होने की उम्मीद है। उल्लेखनीय है कि IMRH और DBMRH परियोजनाएँ अभी भी रक्षा मंत्रालय की स्वीकृति और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं।
एयरोस्पेस इकोसिस्टम पर असर
HAL का कहना है कि यह कार्यक्रम भारत के समग्र एयरोस्पेस इकोसिस्टम को मजबूती देगा। उन्नत इंजन निर्माण, प्रिसिजन मशीनिंग, कास्टिंग, कच्चे माल की आपूर्ति और स्वदेशी MRO (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) क्षमताओं के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। यह पहल लाइसेंस-आधारित उत्पादन की परंपरागत सीमाओं से आगे बढ़कर सह-विकास की दिशा में भारत के एयरोस्पेस क्षेत्र का एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह समझौता ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा आयात-निर्भरता घटाने और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है। 'अरावली' परियोजना की सफलता भविष्य की स्वदेशी एयरो-इंजन परियोजनाओं की नींव रखेगी और भारत को वैश्विक हेलीकॉप्टर इंजन निर्माण के मानचित्र पर स्थापित कर सकती है।