22 अक्टूबर 2026
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हामिद अंसारी के बयान पर NDA का पलटवार: 'प्रदर्शन के नाम पर अराजकता बर्दाश्त नहीं'

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हामिद अंसारी के बयान पर NDA का पलटवार: 'प्रदर्शन के नाम पर अराजकता बर्दाश्त नहीं'

सारांश

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का 'देश ऐसे ही चलता है' वाला बयान NDA के लिए बड़ा निशाना बन गया। BJP और जदयू दोनों ने प्रतिक्रिया दी — लेकिन अलग-अलग सुर में। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग के बीच यह बयान संस्थाओं की स्वायत्तता और विरोध के अधिकार पर बड़ी बहस को हवा दे रहा है।

मुख्य बातें

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि 'देश ऐसे ही चलता रहा है और प्रदर्शन करने वाले हमारे अपने ही लोग हैं।' बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने बयान को 'विभाजनकारी और निराशावादी' करार दिया।
BJP राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा — 'प्रदर्शन के नाम पर अराजकता बर्दाश्त नहीं।' जदयू महासचिव श्याम रजक ने अंसारी के बयान की अलग व्याख्या पेश करते हुए देश की प्रगति का हवाला दिया।
विवाद की पृष्ठभूमि में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और कथित 'रिजीम चेंज' की माँग को लेकर देशव्यापी प्रदर्शन हैं।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के उस बयान पर तीखी सियासी बहस छिड़ गई है, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर देशभर में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों पर कहा था कि 'अपना देश ऐसे ही चलता रहा है और प्रदर्शन करने वाले भी हमारे अपने ही लोग हैं।' 22 अक्टूबर 2026 को उनके इस वक्तव्य के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने एकजुट होकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

भाजपा की कड़ी आपत्ति

बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने अंसारी के बयान को 'विभाजनकारी और निराशावादी' करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'देश के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद पर दशकों तक सत्ता का सुख भोगने वाले व्यक्ति द्वारा भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव पर तंज कसना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।'

सरावगी ने स्पष्ट किया कि 'आज का भारत किसी तुष्टिकरण की लचर व्यवस्था से नहीं चल रहा, बल्कि कानून के इकबाल, बाबा साहब अंबेडकर के संविधान और राष्ट्र प्रथम की भावना से चल रहा है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'संवैधानिक पदों से सेवानिवृत्त होने के बाद देश की व्यवस्था को नीचा दिखाने का यह दौर अब बंद होना चाहिए।'

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता का पलटवार

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने अंसारी के बयान पर सीधा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को 'अपनी जनता' स्वीकार करने से कोई इनकार नहीं, लेकिन 'बॉन्ड पर हस्ताक्षर करके उसकी मर्यादा का उल्लंघन करने और कानून तोड़ने पर कार्रवाई अपरिहार्य है।'

पासवान ने आगे कहा, 'यह नहीं हो सकता कि हमारी माँगें पूरी हों, चाहे जो मजबूरी हो। हर चीज का एक तरीका होता है। कानून और संविधान की अपनी मर्यादा और अपना दायरा है, और सभी को उसी के अंतर्गत काम करना होता है।' उनका यह वक्तव्य स्पष्ट करता है कि NDA लोकतांत्रिक विरोध और 'अराजकता' के बीच रेखा खींचने पर ज़ोर दे रहा है।

जदयू की अलग राय

हालाँकि NDA की सहयोगी जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने अंसारी के बयान की एक अलग व्याख्या पेश की। रजक ने कहा, 'उन्होंने ठीक ही कहा है — जो चल रहा है, उसे चलने दो। देश विकास कर रहा है, लोगों को रोज़गार मिल रहा है और देश में निवेश हो रहा है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि 2047 तक भारत विश्वगुरु बनने की राह पर है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कथित तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और 'रिजीम चेंज' की माँग को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन हो रहे हैं। गौरतलब है कि अंसारी पहले भी कई बार ऐसे बयानों के कारण सत्तारूढ़ गठबंधन की आलोचना के केंद्र में रहे हैं। उनके ताज़ा वक्तव्य को NDA नेताओं ने विपक्ष के 'संस्थाओं को कमज़ोर करने के प्रयास' के रूप में देखा है।

आगे क्या

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस निकट भविष्य में और तेज़ हो सकती है, क्योंकि चुनाव आयोग की स्वायत्तता और प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े सवाल संसदीय बहस में भी उठने की संभावना है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर अपनी-अपनी कथा को स्थापित करने में लगे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे NDA ने जिस तेज़ी से 'संस्था-विरोधी' रंग दिया, वह बताता है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता का मुद्दा अब सीधे राजनीतिक ध्रुवीकरण का हथियार बन चुका है। जदयू का अलग सुर — जो अंसारी के बयान में प्रगति की पुष्टि देखता है — NDA की आंतरिक विविधता को भी उजागर करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक रही है, वह यह है कि असली सवाल अंसारी के शब्दों का नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता और उसे लेकर चल रहे प्रदर्शनों की वैधता का है — जिस पर दोनों पक्ष बहस से बच रहे हैं।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हामिद अंसारी ने क्या बयान दिया जिससे विवाद हुआ?
पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर हो रहे देशव्यापी प्रदर्शनों पर कहा था कि 'अपना देश ऐसे ही चलता रहा है और प्रदर्शन करने वाले भी हमारे अपने ही लोग हैं।' इस बयान को NDA नेताओं ने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर तंज के रूप में देखा।
BJP ने हामिद अंसारी के बयान पर क्या कहा?
बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने बयान को 'विभाजनकारी और निराशावादी' बताया और कहा कि संवैधानिक पदों से सेवानिवृत्त होने के बाद देश की व्यवस्था को नीचा दिखाना बंद होना चाहिए। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश पासवान ने कहा कि बॉन्ड की मर्यादा तोड़ने और कानून उल्लंघन पर कार्रवाई अपरिहार्य है।
जदयू ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
जदयू के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने अंसारी के बयान की एक अलग और सकारात्मक व्याख्या पेश की। उन्होंने कहा कि देश विकास कर रहा है, लोगों को रोज़गार मिल रहा है और 2047 तक भारत विश्वगुरु बनने की राह पर है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग क्यों उठ रही है?
स्रोत के अनुसार कथित तौर पर 'रिजीम चेंज' के इरादे से देशभर में प्रदर्शन हो रहे हैं जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग शामिल है। इन प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि और विस्तृत कारण अभी भी विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच विवाद का विषय बने हुए हैं।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार चुनाव आयोग की स्वायत्तता और प्रदर्शन के अधिकार पर यह बहस संसदीय बहस तक भी पहुँच सकती है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी कथा स्थापित करने में जुटे हैं, जिससे निकट भविष्य में यह विवाद और तेज़ होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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