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BJP नेताओं का पलटवार: 'PM मोदी कहीं नहीं जाएंगे', विपक्षी रैली में कम भीड़ पर भी कसा तंज

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BJP नेताओं का पलटवार: 'PM मोदी कहीं नहीं जाएंगे', विपक्षी रैली में कम भीड़ पर भी कसा तंज

सारांश

राहुल गांधी के PM मोदी पर दिए बयान के बाद BJP-NDA नेताओं ने एकजुट होकर पलटवार किया — शाहनवाज हुसैन ने कहा 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे', अग्रवाल ने नेशनल हेराल्ड मामले का जिक्र किया, और शिवसेना के दुबे ने विपक्षी रैली में कम भीड़ को जनता की 'जागरूकता' बताया।

मुख्य बातें

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, 'PM मोदी कहीं नहीं जा रहे — वे देश की सेवा के लिए समर्पित हैं।' BJP सांसद दामोदरदास अग्रवाल ने आरोप लगाया कि नेशनल हेराल्ड मामले की आशंका के कारण राहुल गांधी PM पर टिप्पणी कर रहे हैं।
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने विपक्षी रैली में कम भीड़ को जनता द्वारा विपक्ष की 'असली प्राथमिकताओं' की पहचान बताया।
अग्रवाल ने 1 नवंबर 1984 के सिख नरसंहार का हवाला देते हुए कांग्रेस से इस तारीख पर रैली करने की बजाय सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की।
अग्रवाल ने अमित शाह के इंडी ब्लॉक रैली पर दिए बयान का भी समर्थन किया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई नेताओं ने 2 नवंबर 2026 को कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबंधी बयान पर कड़ा पलटवार किया। BJP सांसद दामोदरदास अग्रवाल, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन और शिवसेना नेता आनंद दुबे ने एकजुट होकर न केवल राहुल गांधी की टिप्पणी का जवाब दिया, बल्कि विपक्षी रैली में अपेक्षा के अनुरूप भीड़ न जुटने पर भी विपक्ष को घेरा।

राहुल गांधी के बयान पर BJP का पलटवार

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जा रहे। उनके अनुसार, मोदी ऐसे नेता हैं जो भारत की सेवा के लिए पूर्णतः समर्पित हैं, देश को विकास की राह पर आगे ले जा रहे हैं और वैश्विक मंच पर भारत की छवि को सुदृढ़ कर रहे हैं। हुसैन ने कहा, 'प्रधानमंत्री मोदी भारत माता के ऐसे सपूत हैं, जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र-सेवा के लिए समर्पित कर दिया है।'

BJP सांसद दामोदरदास अग्रवाल ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि देश की जनता के मन में वास्तव में राहुल गांधी के अपने राजनीतिक भविष्य और उनके खिलाफ लंबित मामलों को लेकर सवाल हैं। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी पराजय के बाद राहुल गांधी को यह आशंका सता रही है कि नेशनल हेराल्ड मामले के चलते कहीं उन्हें देश छोड़ना न पड़े — और इसी भय के कारण वे प्रधानमंत्री के बारे में ऐसी टिप्पणी करने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं।

अग्रवाल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इसी मिट्टी में जन्मे और पले-बढ़े हैं, और उन्होंने अपनी अंतिम सांस तक देश की सेवा का संकल्प लिया है।

विपक्षी रैली में कम भीड़ पर निशाना

शिवसेना नेता आनंद दुबे ने विपक्षी रैली में उम्मीद के मुताबिक भीड़ न जुटने को लेकर विपक्ष पर सीधे सवाल दागे। उनके अनुसार, आम जनता अब यह समझ चुकी है कि विपक्षी नेताओं की असली प्राथमिकता लोकतंत्र की रक्षा नहीं, बल्कि अपने परिवार, संपत्ति और राजनीतिक अस्तित्व को बचाना है।

दुबे ने कहा, 'उम्मीद के मुताबिक भीड़ क्यों नहीं जुटी? लोगों को समझ आ गया है कि ये नेता लोकतंत्र को बचाना नहीं चाहते। उन्हें केवल अपने परिवार, अपनी संपत्ति और अपने राजनीतिक अस्तित्व की चिंता है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्ष अपनी सामूहिक राजनीतिक प्रासंगिकता स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

1984 सिख नरसंहार और रैली की तारीख पर सवाल

BJP सांसद दामोदरदास अग्रवाल ने विपक्षी रैली के आयोजन की तारीख को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने 1 नवंबर 1984 के सिख नरसंहार का उल्लेख करते हुए कहा कि वे उस दिन व्यावसायिक कार्य के सिलसिले में उपस्थित थे और उन्होंने सिख समुदाय के लोगों पर हुए हमले अपनी आँखों से देखे थे।

अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उस समय कांग्रेस से जुड़े लोगों ने सिखों को निशाना बनाकर उनकी निर्मम हत्या की। उनका कहना था कि 1 नवंबर जैसी संवेदनशील तारीख पर राजनीतिक रैली आयोजित करना सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करने के समान है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को इस तारीख पर रैली करने के बजाय 1984 की घटनाओं के लिए देश और सिख समुदाय से सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए थी।

राजनीतिक परिदृश्य: आरोप-प्रत्यारोप का दौर

गौरतलब है कि NDA और विपक्षी गठबंधन के बीच यह बयानबाज़ी उस व्यापक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की एक कड़ी है जो देश में लगातार जारी है। विपक्षी गठजोड़ की रैलियों की भीड़ और प्रभाव को लेकर सत्ता पक्ष का यह पहला बड़ा पलटवार नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इंडी ब्लॉक की रैली पर दिए बयान पर भी BJP सांसद अग्रवाल ने समर्थन जताया।

आलोचकों का कहना है कि इस तरह की बयानबाज़ी मुद्दों पर आधारित राजनीतिक बहस को व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप में बदल देती है। दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएँ आने वाले दिनों में और तीखी होने के आसार हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह खुद सत्ता पक्ष को उस दौर की जवाबदेही की माँग को भी पुनर्जीवित करता है। असली राजनीतिक प्रश्न यह है कि क्या दोनों पक्ष नीतिगत बहस की बजाय केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहेंगे।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP नेताओं ने राहुल गांधी के किस बयान पर पलटवार किया?
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने PM नरेंद्र मोदी के बारे में एक टिप्पणी की थी, जिस पर BJP सांसद दामोदरदास अग्रवाल और राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने 2 नवंबर 2026 को तीखा पलटवार किया। स्रोत में राहुल गांधी के बयान का सटीक उद्धरण नहीं दिया गया है।
शाहनवाज हुसैन ने PM मोदी के बारे में क्या कहा?
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि PM मोदी कहीं नहीं जा रहे — वे देश की सेवा के लिए पूर्णतः समर्पित हैं और वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने मोदी को 'भारत माता का सपूत' बताया जिन्होंने अपना जीवन राष्ट्र-सेवा को दिया है।
BJP सांसद दामोदरदास अग्रवाल ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाया?
अग्रवाल ने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी पराजय और नेशनल हेराल्ड मामले की कानूनी आशंका के कारण राहुल गांधी PM मोदी पर टिप्पणी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनता राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य को लेकर खुद सवाल कर रही है।
विपक्षी रैली की तारीख पर NDA नेताओं ने क्या आपत्ति जताई?
BJP सांसद दामोदरदास अग्रवाल ने कहा कि 1 नवंबर 1984 के सिख नरसंहार की संवेदनशील तारीख के आसपास राजनीतिक रैली आयोजित करना सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाना है। उन्होंने माँग की कि कांग्रेस को इस तारीख पर रैली करने की बजाय 1984 की घटनाओं के लिए सार्वजनिक माफी माँगनी चाहिए थी।
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने विपक्षी रैली में कम भीड़ को लेकर क्या कहा?
शिवसेना नेता आनंद दुबे ने कहा कि जनता अब समझ चुकी है कि विपक्षी नेताओं की प्राथमिकता लोकतंत्र बचाना नहीं, बल्कि अपने परिवार, संपत्ति और राजनीतिक अस्तित्व की रक्षा करना है। उनके अनुसार यही कारण है कि विपक्षी रैली में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटी।
राष्ट्र प्रेस
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