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राहुल गांधी की टिप्पणियों पर NDA का पलटवार: 'देश की संस्कृति के खिलाफ है यह व्यवहार'

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राहुल गांधी की टिप्पणियों पर NDA का पलटवार: 'देश की संस्कृति के खिलाफ है यह व्यवहार'

सारांश

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राहुल गांधी की टिप्पणियों ने नया सियासी तूफान खड़ा कर दिया। NDA के कई नेताओं ने पटना से एकसुर में निंदा की — मुद्दा सिर्फ बयानबाज़ी का नहीं, बल्कि विपक्ष के नेता की संसदीय परिपक्वता और एक विदेशी महिला राष्ट्राध्यक्ष के प्रति शिष्टाचार का भी है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक मंच पर PM मोदी और इटली की प्रधानमंत्री को लेकर विवादास्पद टिप्पणियाँ कीं।
NDA नेता संजय सरावगी ने टिप्पणियों को 'संस्कारहीन और अभद्र' बताया; कहा — RSS को राहुल का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव ने राहुल गांधी को 'दुनिया का सबसे कमज़ोर और गैर-जिम्मेदार विपक्ष नेता' बताया।
जदयू नेता श्याम रजक ने कहा — 'भारत की सभ्यता नारी का अपमान नहीं देखना चाहती।' जदयू नेता राजीव रंजन के अनुसार, 'इंडिया' ब्लॉक के सहयोगी भी राहुल गांधी के बयानों को अधिक महत्व नहीं देते।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री को लेकर की गई टिप्पणियों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने 14 अगस्त को तीखी प्रतिक्रिया दी। पटना से बोलते हुए NDA के कई वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी के बयानों को 'अमर्यादित', 'अपरिपक्व' और 'देश की संस्कृति के विरुद्ध' करार दिया।

मुख्य घटनाक्रम

राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक मंच पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के साथ इटली की प्रधानमंत्री को लेकर एक बातचीत को मज़ाकिया अंदाज़ में प्रस्तुत किया, जिसे NDA नेताओं ने एक महिला राष्ट्राध्यक्ष का अपमान बताया। साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पर की गई टिप्पणियों को भी 'अश्लील' और 'अभद्र' कहा गया।

NDA नेताओं की प्रतिक्रिया

NDA नेता संजय सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री की विदेश नीति को लेकर राहुल गांधी की ओर से जिस प्रकार की टिप्पणी की गई, वह उनके 'संस्कारहीन और अभद्र व्यवहार' को दर्शाती है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को राहुल गांधी के किसी प्रमाण-पत्र की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि RSS एक राष्ट्रभक्त संगठन है जो आपदाओं में निरंतर देशवासियों की सेवा करता है।

बिहार सरकार में मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा, 'कल खुले मंच पर राहुल गांधी और संदीप दीक्षित ने जैसा व्यवहार किया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, गंभीर और चिंता का विषय है। आप माननीय प्रधानमंत्री और NDA सरकार का विरोध कर सकते हैं; आप विपक्ष में हैं। दुनिया ने पहली बार इतना कमजोर और गैर-जिम्मेदार विपक्ष का नेता देखा है।' रामकृपाल यादव ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने एक महिला का मज़ाक उड़ाया, जो हमारे लिए 'सम्मान का स्वरूप' हैं।

जदयू नेताओं का रुख

जनता दल (यूनाइटेड) नेता श्याम रजक ने कहा कि राहुल गांधी का व्यवहार भारत की संस्कृति के खिलाफ है और इसकी जितनी निंदा की जाए, वह कम है। उन्होंने कहा, 'भारत की सभ्यता कभी भी नारी का अपमान नहीं देखना चाहती। उन्होंने जिस तरह से एक नारी का अपमान किया और प्रधानमंत्री को लेकर अपशब्द बोले, इसकी घोर निंदा करता हूं।'

जदयू नेता राजीव रंजन ने कहा, 'राहुल गांधी लंबे समय से सदन के सदस्य रहे हैं, लेकिन उनके व्यक्तित्व में एक सांसद से अपेक्षित गंभीरता की कमी है। जिस तरह से उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री के बारे में एक सहयोगी के साथ हुई बातचीत को मज़ाक में बदलने की कोशिश की, वह विपक्ष के नेता की अपरिपक्वता को दर्शाता है।' राजीव रंजन ने यह भी कहा कि यही कारण है कि 'इंडिया' ब्लॉक के कई सहयोगी दल भी राहुल गांधी के बयानों को अधिक महत्व नहीं देते।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राजनीतिक माहौल पहले से गरम था। गौरतलब है कि विपक्ष के नेता की टिप्पणियाँ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नेताओं को लेकर होने के कारण यह विवाद कूटनीतिक शिष्टाचार के सवाल भी उठाता है। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को लेकर इस तरह की टिप्पणियाँ संसदीय मर्यादा के अनुकूल नहीं हैं।

आगे क्या

कांग्रेस की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद संसद के मानसून सत्र के बाद की राजनीतिक बहस को और तेज़ कर सकता है, जिसमें विपक्ष के आचरण और संसदीय शिष्टाचार पर बहस केंद्रित रह सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब राष्ट्रवादी भावनाएँ चरम पर होती हैं। लेकिन ध्यान देने योग्य यह है कि NDA की प्रतिक्रिया टिप्पणी के वास्तविक कूटनीतिक या नीतिगत पहलुओं पर नहीं, बल्कि 'संस्कार' और 'नारी सम्मान' की भाषा पर केंद्रित है — जो राजनीतिक लामबंदी का एक परिचित फॉर्मूला है। यह भी उल्लेखनीय है कि मुख्यधारा की कवरेज राहुल गांधी की मूल टिप्पणी के संदर्भ को पर्याप्त रूप से सामने नहीं रख रही, जिससे प्रतिक्रिया की तुलना में मूल घटना धुंधली पड़ जाती है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी ने PM मोदी और इटली की प्रधानमंत्री को लेकर क्या कहा था?
राहुल गांधी ने एक सार्वजनिक मंच पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के साथ इटली की प्रधानमंत्री को लेकर हुई एक बातचीत को मज़ाकिया अंदाज़ में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने PM मोदी की विदेश नीति पर भी टिप्पणी की, जिसे NDA नेताओं ने 'अश्लील' और 'अभद्र' बताया।
NDA नेताओं ने राहुल गांधी की टिप्पणियों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
NDA के कई नेताओं — जिनमें संजय सरावगी, रामकृपाल यादव, श्याम रजक और राजीव रंजन शामिल हैं — ने राहुल गांधी की टिप्पणियों को 'देश की संस्कृति के खिलाफ', 'अमर्यादित' और 'अपरिपक्व' बताते हुए कड़ी निंदा की।
इस विवाद में RSS का ज़िक्र क्यों आया?
NDA नेता संजय सरावगी ने कहा कि राहुल गांधी RSS की आलोचना करने से पहले भारत को ठीक से समझें। उन्होंने कहा कि RSS एक राष्ट्रभक्त सामाजिक संगठन है जो आपदाओं में देशवासियों की सेवा करता है और उसे राहुल गांधी के किसी प्रमाण-पत्र की ज़रूरत नहीं।
बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
रामकृपाल यादव ने कहा कि राहुल गांधी और संदीप दीक्षित ने खुले मंच पर जो व्यवहार किया, वह 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' है। उन्होंने राहुल गांधी को 'दुनिया का सबसे कमज़ोर और गैर-जिम्मेदार विपक्ष नेता' बताया और कहा कि उन्होंने एक महिला का मज़ाक उड़ाया।
क्या 'इंडिया' ब्लॉक के सहयोगी भी राहुल गांधी से असहमत हैं?
जदयू नेता राजीव रंजन के अनुसार, 'इंडिया' ब्लॉक और उसके सहयोगी दलों के कई नेता भी राहुल गांधी के बयानों को अधिक महत्व नहीं देते। हालाँकि यह जदयू का दृष्टिकोण है; 'इंडिया' ब्लॉक की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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