खड़गे की टिप्पणी का जवाब: बनासकांठा में 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे' के नारों से गूंजा गुजरात
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के बनासकांठा में 30 अक्टूबर 2026 को आयोजित एक बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे' का नारा जोरदार तरीके से गूंजा। यह नारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की उस विवादित टिप्पणी के सीधे राजनीतिक जवाब के रूप में उभरा, जो उन्होंने 25 अक्टूबर को पटना में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर कही थी। प्रधानमंत्री मोदी के जिले के दौरे के अवसर पर गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस नारे को जनसमर्थन की अभिव्यक्ति बनाया।
विवाद की पृष्ठभूमि
25 अक्टूबर को पटना में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं पर बोलते हुए दर्शकों में से एक व्यक्ति ने कहा था कि 'मोदी कहीं नहीं जाएंगे।' इस पर कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने कथित तौर पर जवाब दिया था, 'मोदी का बाप भी जाएगा।' इस बयान को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता का अपमान करार दिया और कड़ी आपत्ति जताई। तब से यह विवाद राष्ट्रीय राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है।
भिलड़ी कार्यक्रम में संघवी का संबोधन
भिलड़ी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री संघवी ने कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे से पहले बनासकांठा के गांवों में स्वच्छता अभियानों और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान भी यही नारा सुनाई दे रहा था। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से भी यह नारा दोहराने की अपील की। संघवी ने कहा, 'जब तक भारत आत्मनिर्भर नहीं बन जाता और दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं बन जाता, मोदी कहीं नहीं जाएंगे। जब तक हर गरीब परिवार को पक्का मकान नहीं मिल जाता, गरीबी खत्म नहीं हो जाती, लखपति दीदियों की संख्या नहीं बढ़ जाती और दूरदराज के इलाकों तक विकास नहीं पहुंच जाता, मोदी कहीं नहीं जाएंगे।' उन्होंने परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति समाप्त करने के लक्ष्य को भी इसी नारे से जोड़ा।
बनासकांठा के विकास की कहानी
विधानसभा अध्यक्ष और बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी ने बनासकांठा के विकास में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि सुजलाम सुफलाम नहर नेटवर्क, चौबीसों घंटे बिजली और गोवर्धन योजना ने किसानों व पशुपालकों की जीवनशैली बदल दी है। चौधरी के अनुसार गोवर्धन योजना से पशुओं के गोबर को आर्थिक संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पशुपालक सालाना ₹100 करोड़ से अधिक की कमाई कर रहे हैं। उन्होंने नवनिर्मित भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर का भी उल्लेख किया, जिसका लक्ष्य दूध उत्पादन क्षमता बढ़ाना है।
उपमुख्यमंत्री संघवी ने व्यक्तिगत संदर्भ देते हुए बताया कि उनका परिवार लगभग 50 साल पहले पानी और बिजली की कमी के कारण बनासकांठा से सूरत पलायन कर गया था। उन्होंने कहा कि नर्मदा का पानी, सुजलाम सुफलाम योजना और ड्रिप सिंचाई जैसी पहलों ने जिले की तस्वीर बदल दी है। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि बनास डेयरी के माध्यम से पशुपालकों को मिलने वाला सालाना लाभ 2003 में करीब ₹30 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1,400 करोड़ हो गया है।
मुख्यमंत्री पटेल और प्रधानमंत्री का दौरा
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने अपने संबोधन में पीएम-किसान योजना की 24वीं किस्त के वितरण, बोवाइन ब्रीडिंग सेंटर, बनास डेयरी की परियोजनाओं, रेल-सड़क संपर्क में सुधार और आंगनवाड़ी से जुड़े कार्यों के उद्घाटन का उल्लेख किया। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा उनके गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहले शपथ ग्रहण के 25 साल पूरे होने के अवसर से भी जुड़ा है — उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
राजनीतिक संदेश और आगे की दिशा
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब BJP और कांग्रेस के बीच बयानबाज़ी का स्तर तीखा होता जा रहा है। संघवी ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक एकसुर में उठने वाले समर्थन का दावा करते हुए कहा कि देशभर में लोगों की प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री के प्रति उनके अटूट समर्थन को दर्शाती है। खड़गे के बयान पर BJP की आपत्ति और जवाबी राजनीतिक प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि यह विवाद आने वाले दिनों में भी राष्ट्रीय राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाता रहेगा।