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केरल पीएससी पर दोहरी मार: DSP भर्ती में नई शिकायत, SIT जांच भी जारी

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केरल पीएससी पर दोहरी मार: DSP भर्ती में नई शिकायत, SIT जांच भी जारी

सारांश

केरल लोक सेवा आयोग एक साथ दो मोर्चों पर घिरा है — योजना बोर्ड भर्ती मामले में SIT अध्यक्ष डॉ. बैजू समेत 16 सदस्यों से पूछताछ कर रही है, और अब DSP विशेष भर्ती में 'जल्दबाजी' व 'आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार' को पहली रैंक मिलने का नया आरोप सामने आया है।

मुख्य बातें

केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) को अब पुलिस उपाधीक्षक (DSP) भर्ती में अनियमितता की नई शिकायत का सामना करना पड़ रहा है।
'सेव यूनिवर्सिटी कैंपेन कमेटी' के अध्यक्ष आरएस शशिकुमार ने मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के सामने यह मामला उठाया है।
DSP परीक्षा दिसंबर में हुई, मई में रैंक सूची और जून में नियुक्ति आदेश — शिकायतकर्ता इसे असामान्य रूप से तेज प्रक्रिया बताते हैं।
एमआर बैजू और तीन सदस्यों से पूछताछ हो चुकी; शेष 12 सदस्यों से सोमवार से पूछताछ होनी है।
आयोग के सभी 16 सदस्य पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के 10 वर्षीय कार्यकाल में नियुक्त हुए थे।
संबंधित उम्मीदवार ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए शिकायत को नियुक्ति रोकने की साजिश बताया है।

केरल लोक सेवा आयोग (KPSC) एक साथ दो मोर्चों पर घिर गया है — एक तरफ राज्य योजना बोर्ड में वरिष्ठ पद पर कथित अनियमित भर्ती को लेकर विशेष जांच दल (SIT) की पड़ताल जारी है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस उपाधीक्षक (DSP) पद की विशेष भर्ती प्रक्रिया पर अब एक नई शिकायत दर्ज हुई है। 2 नवंबर 2026 को यह मामला तिरुवनंतपुरम में सार्वजनिक हुआ, जिसने आयोग की विश्वसनीयता पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।

नई शिकायत: DSP भर्ती में जल्दबाजी के आरोप

'सेव यूनिवर्सिटी कैंपेन कमेटी' के अध्यक्ष आरएस शशिकुमार ने यह शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि पुलिस उपाधीक्षक पद के लिए विशेष भर्ती प्रक्रिया असामान्य रूप से तेज रफ्तार से पूरी की गई। लिखित परीक्षा पिछले साल दिसंबर में आयोजित हुई, मई के पहले सप्ताह में रैंक सूची जारी की गई और जून में नियुक्ति आदेश दे दिए गए।

शशिकुमार ने आरोप लगाया है कि प्रथम रैंक प्राप्त उम्मीदवार छात्र संगठन एसएफआई का नेता है और उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने यह मामला मुख्यमंत्री वीडी सतीशन के संज्ञान में लाते हुए स्वतंत्र जांच की माँग की है।

हालाँकि, संबंधित उम्मीदवार ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। उसका कहना है कि वह पीएससी की अन्य परीक्षाओं की रैंक सूची में भी शामिल है, और यह शिकायत उसकी नियुक्ति को रोकने के इरादे से दायर की गई है।

SIT जांच: पीएससी के शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ

गौरतलब है कि यह नया विवाद ऐसे समय में उभरा है जब KPSC पहले से ही एक बड़े मामले में जांच के घेरे में है। सतीशन सरकार के मई में सत्ता में आते ही क्राइम ब्रांच की SIT का गठन किया गया था, जो राज्य योजना बोर्ड के वरिष्ठ पद पर हुई भर्ती में कथित धाँधली की जांच कर रही है।

अब तक पीएससी अध्यक्ष डॉ. एमआर बैजू और तीन अन्य सदस्यों से पूछताछ हो चुकी है। शेष 12 सदस्यों से सोमवार से पूछताछ शुरू होनी है। पीएससी सचिव साजू जॉर्ज भी सोमवार को लगातार दूसरे दिन SIT के सामने पेश होंगे।

पिछली सरकार की छाया

वर्तमान KPSC के सभी 16 सदस्य पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सरकार के 10 वर्षीय कार्यकाल के दौरान नियुक्त किए गए थे, जो इस वर्ष मई में समाप्त हुआ। यह तथ्य मौजूदा सरकार की जांच को राजनीतिक परिप्रेक्ष्य देता है, क्योंकि आलोचकों का कहना है कि आयोग में पिछली सरकार के दौर की नियुक्तियों की विरासत अब भी बनी हुई है।

यह ऐसे समय में आया है जब केरल में सार्वजनिक भर्ती संस्थाओं की पारदर्शिता एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

सरकार का रुख

सरकार का कहना है कि SIT जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या भर्ती प्रक्रियाओं में जानबूझकर हेरफेर किया गया और राज्य की सबसे बड़ी भर्ती एजेंसी की साख को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई। जांच के नतीजे न केवल KPSC की कार्यशैली पर, बल्कि केरल की पूरी भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी निर्णायक असर डाल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक दशक तक सत्ता में रही सरकार की संस्थागत विरासत की परीक्षा है। सतीशन सरकार की SIT जांच सियासी रूप से फायदेमंद लग सकती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या जांच का दायरा केवल 'चुनिंदा मामलों' तक सीमित रहेगा या पूरी भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। DSP भर्ती में 'तेज प्रक्रिया' का आरोप अपने आप में निर्णायक नहीं है — असल मुद्दा यह है कि क्या गति के साथ प्रक्रियागत मानकों का पालन हुआ। बिना स्वतंत्र ऑडिट तंत्र के, हर भर्ती राजनीतिक संदेह के घेरे में आती रहेगी।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल पीएससी पर DSP भर्ती में क्या आरोप लगे हैं?
आरोप है कि KPSC ने पुलिस उपाधीक्षक की विशेष भर्ती प्रक्रिया असामान्य तेजी से पूरी की — दिसंबर में परीक्षा, मई में रैंक सूची और जून में नियुक्ति आदेश। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि प्रथम रैंक प्राप्त उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
KPSC की SIT जांच किस मामले में चल रही है?
SIT जांच राज्य योजना बोर्ड के एक वरिष्ठ पद पर हुई कथित अनियमित भर्ती से जुड़े आरोपों की पड़ताल कर रही है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन की सरकार ने मई में सत्ता में आते ही क्राइम ब्रांच की SIT गठित की थी।
KPSC के कितने सदस्यों से पूछताछ हो चुकी है?
अब तक KPSC अध्यक्ष डॉ. एमआर बैजू और तीन अन्य सदस्यों से SIT पूछताछ कर चुकी है। शेष 12 सदस्यों से सोमवार से पूछताछ शुरू होनी है, और सचिव साजू जॉर्ज लगातार दूसरे दिन SIT के सामने पेश होंगे।
वर्तमान KPSC सदस्य किसके कार्यकाल में नियुक्त हुए थे?
KPSC के सभी 16 वर्तमान सदस्य पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की सरकार के 10 वर्षीय कार्यकाल के दौरान नियुक्त किए गए थे, जो इस वर्ष मई में समाप्त हुआ।
प्रथम रैंक प्राप्त उम्मीदवार ने आरोपों पर क्या कहा?
उम्मीदवार ने सभी आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि वह KPSC की अन्य परीक्षाओं की रैंक सूची में भी शामिल है। उसने दावा किया कि यह शिकायत उसकी नियुक्ति को रोकने के इरादे से दायर की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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