16 जुलाई 2026
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हमीरपुर: अंधेरे में मोबाइल फ्लैश की रोशनी में लगे टांके, सफाईकर्मी ने किया इलाज — UP स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा सवाल

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हमीरपुर: अंधेरे में मोबाइल फ्लैश की रोशनी में लगे टांके, सफाईकर्मी ने किया इलाज — UP स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा सवाल

सारांश

हमीरपुर के सुमेरपुर CHC में बिजली गुल रही, मोबाइल की रोशनी में सफाईकर्मी ने घायल महिला को टांके लगाए — वीडियो वायरल होते ही UP की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई। जाँच के आदेश तो मिले, लेकिन असली सवाल जवाबदेही का है।

मुख्य बातें

हमीरपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुमेरपुर का वीडियो 31 मई 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
अस्पताल में बिजली न होने के कारण मोबाइल फ्लैश लाइट की रोशनी में घायल महिला का इलाज किया गया।
पप्पू नामक सफाईकर्मी को घायल को टांके लगाते हुए वीडियो में दिखाया गया है।
घटना के समय कुछ पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद बताए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया; जाँच के आदेश दिए गए हैं।
विपक्ष ने ऊर्जा मंत्री एके सिंह पर बिजली संकट को लेकर सवाल उठाए हैं।

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) सुमेरपुर का एक वीडियो 31 मई 2026 को सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ, जिसमें एक घायल महिला को बिजली के अभाव में मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट की रोशनी में टांके लगाए जाते देखा जा सकता है। इस वीडियो ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

रिपोर्टों के अनुसार, लड़ाई-झगड़े में घायल हुई एक महिला को इलाज के लिए सुमेरपुर CHC लाया गया था। उस वक्त अस्पताल में बिजली आपूर्ति बाधित थी, जिसके चलते मोबाइल फोन की टॉर्च का उपयोग करना पड़ा। वीडियो में और भी चौंकाने वाली बात यह है कि पप्पू नाम के एक सफाईकर्मी को घायल महिला को टांके लगाते हुए दिखाया गया है — जो चिकित्सीय प्रशिक्षण के बिना एक गंभीर प्रक्रिया करने का मामला है। बताया जा रहा है कि इस दौरान कुछ पुलिस के जवान भी मौके पर मौजूद थे।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

इस घटना को मरीजों के उपचार में घोर लापरवाही और सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव का प्रतीक बताया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि जब एक CHC में न बिजली है, न प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी उपलब्ध हैं, तो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की वास्तविक स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की समस्याएँ पहले से चर्चा में हैं।

सरकार और विभाग की प्रतिक्रिया

वायरल वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार मामले की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। वहीं, बिजली संकट के मुद्दे पर विपक्ष ने ऊर्जा मंत्री एके सिंह पर निशाना साधा है। मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ है और खामियों को दूर किया जा रहा है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि ग्रामीण उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र अधिकांश गरीब और वंचित तबके की पहली और अंतिम उम्मीद होते हैं। जब इन केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएँ — बिजली, प्रशिक्षित कर्मचारी, उपकरण — तक उपलब्ध नहीं होतीं, तो सबसे अधिक नुकसान उन्हीं लोगों को उठाना पड़ता है जिनके पास निजी अस्पताल का विकल्प नहीं है। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

क्या होगा आगे

जाँच के आदेश मिलने के बाद यह देखना अहम होगा कि स्वास्थ्य विभाग किस स्तर पर जवाबदेही तय करता है — केवल सफाईकर्मी पर कार्रवाई होती है, या अस्पताल प्रशासन और बिजली आपूर्ति की विफलता की भी जिम्मेदारी निर्धारित की जाती है। यह मामला उत्तर प्रदेश की ग्रामीण स्वास्थ्य नीति की व्यापक समीक्षा की माँग को और तेज़ कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उत्तर प्रदेश के ग्रामीण स्वास्थ्य ढाँचे की उस पुरानी बीमारी का नया लक्षण है जहाँ बुनियादी ढाँचे की कमी और अप्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती वर्षों से चली आ रही है। असली सवाल यह नहीं कि सफाईकर्मी ने टांके क्यों लगाए — बल्कि यह है कि उस रात CHC में कोई प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी क्यों नहीं था और जनरेटर या वैकल्पिक बिजली व्यवस्था क्यों नहीं थी। जाँच के आदेश देना पर्याप्त नहीं है; जब तक ग्रामीण CHC में स्टाफिंग मानकों और बिजली आपूर्ति की जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसे वीडियो आते रहेंगे और जाँचें फाइलों में दबती रहेंगी।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हमीरपुर CHC सुमेरपुर में क्या हुआ?
31 मई 2026 को वायरल हुए एक वीडियो में सुमेरपुर CHC में बिजली न होने के कारण मोबाइल फ्लैश की रोशनी में एक घायल महिला को टांके लगाए गए। वीडियो में पप्पू नामक सफाईकर्मी यह प्रक्रिया करता दिख रहा है।
क्या इस मामले में कोई कार्रवाई हुई है?
रिपोर्टों के अनुसार मामले की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। हालाँकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अस्पताल में बिजली क्यों नहीं थी?
भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रहने की खबरें सामने आई हैं। घटना के समय सुमेरपुर CHC में भी बिजली गुल थी, जिसके कारण मोबाइल टॉर्च का उपयोग करना पड़ा।
UP में बिजली संकट पर सरकार का क्या कहना है?
ऊर्जा मंत्री एके सिंह ने विपक्ष के सवालों के जवाब में कहा है कि पिछले वर्षों की तुलना में बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ है और खामियों को दूर किया जा रहा है।
यह घटना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए क्यों चिंताजनक है?
ग्रामीण CHC गरीब तबके की प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा होते हैं। जब इन केंद्रों पर बिजली, प्रशिक्षित कर्मचारी और उपकरण जैसी बुनियादी सुविधाएँ नहीं होतीं, तो सबसे अधिक नुकसान उन्हीं लोगों को होता है जिनके पास निजी अस्पताल का विकल्प नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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