हमीरपुर: अंधेरे में मोबाइल फ्लैश की रोशनी में लगे टांके, सफाईकर्मी ने किया इलाज — UP स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा सवाल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) सुमेरपुर का एक वीडियो 31 मई 2026 को सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हुआ, जिसमें एक घायल महिला को बिजली के अभाव में मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट की रोशनी में टांके लगाए जाते देखा जा सकता है। इस वीडियो ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियादी स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्टों के अनुसार, लड़ाई-झगड़े में घायल हुई एक महिला को इलाज के लिए सुमेरपुर CHC लाया गया था। उस वक्त अस्पताल में बिजली आपूर्ति बाधित थी, जिसके चलते मोबाइल फोन की टॉर्च का उपयोग करना पड़ा। वीडियो में और भी चौंकाने वाली बात यह है कि पप्पू नाम के एक सफाईकर्मी को घायल महिला को टांके लगाते हुए दिखाया गया है — जो चिकित्सीय प्रशिक्षण के बिना एक गंभीर प्रक्रिया करने का मामला है। बताया जा रहा है कि इस दौरान कुछ पुलिस के जवान भी मौके पर मौजूद थे।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इस घटना को मरीजों के उपचार में घोर लापरवाही और सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं के अभाव का प्रतीक बताया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि जब एक CHC में न बिजली है, न प्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी उपलब्ध हैं, तो ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की वास्तविक स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की समस्याएँ पहले से चर्चा में हैं।
सरकार और विभाग की प्रतिक्रिया
वायरल वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार मामले की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। वहीं, बिजली संकट के मुद्दे पर विपक्ष ने ऊर्जा मंत्री एके सिंह पर निशाना साधा है। मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ है और खामियों को दूर किया जा रहा है।
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि ग्रामीण उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र अधिकांश गरीब और वंचित तबके की पहली और अंतिम उम्मीद होते हैं। जब इन केंद्रों पर बुनियादी सुविधाएँ — बिजली, प्रशिक्षित कर्मचारी, उपकरण — तक उपलब्ध नहीं होतीं, तो सबसे अधिक नुकसान उन्हीं लोगों को उठाना पड़ता है जिनके पास निजी अस्पताल का विकल्प नहीं है। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना की निष्पक्ष जाँच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
क्या होगा आगे
जाँच के आदेश मिलने के बाद यह देखना अहम होगा कि स्वास्थ्य विभाग किस स्तर पर जवाबदेही तय करता है — केवल सफाईकर्मी पर कार्रवाई होती है, या अस्पताल प्रशासन और बिजली आपूर्ति की विफलता की भी जिम्मेदारी निर्धारित की जाती है। यह मामला उत्तर प्रदेश की ग्रामीण स्वास्थ्य नीति की व्यापक समीक्षा की माँग को और तेज़ कर सकता है।