झारखंड: मोबाइल टॉर्च में डिलीवरी, मां-नवजात की मौत; प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. शिवलाल कुंकल निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रसव के दौरान मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी कराने के कथित प्रयास के बीच एक मां और उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। इस गंभीर लापरवाही के मामले में झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने 4 मई को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शिवलाल कुंकल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
क्या हुआ उस रात
हाथीसिरिंग गांव निवासी बिनीता बानरा, जो स्वयं एक प्रशिक्षित स्वास्थ्य सहिया थीं, को प्रसव के लिए राजनगर सीएचसी में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान अस्पताल की बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई और चिकित्साकर्मियों ने मोबाइल फोन की टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी कराने का प्रयास किया। परिजनों के अनुसार, न तो पर्याप्त चिकित्सा उपकरण उपलब्ध थे और न ही नर्सिंग स्टाफ ने समय पर आवश्यक संवेदनशीलता दिखाई, जिसके परिणामस्वरूप मां और नवजात बच्चे दोनों की मृत्यु हो गई।
सरकार की सख्त प्रतिक्रिया
विभाग के संयुक्त सचिव छवि रंजन की ओर से जारी निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया कि स्वास्थ्य सेवाओं में इस प्रकार की संवेदनहीनता और लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि राज्य के सभी सीएचसी को 'मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना' के तहत प्रतिवर्ष ₹10 लाख बिजली और बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव के लिए दिए जाते हैं। इसके बावजूद अस्पताल में मोबाइल टॉर्च की रोशनी में प्रसव कराने की नौबत आना विभाग के लिए अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है।
निलंबन की शर्तें
निलंबन की अवधि के दौरान डॉ. शिवलाल कुंकल का मुख्यालय चाईबासा निर्धारित किया गया है। उन्हें प्रतिदिन अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी और बिना विभागीय अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ना होगा। इसके अतिरिक्त, उन्हें एक स्व-घोषणा पत्र प्रस्तुत करना होगा जिसमें यह उल्लेख हो कि वे निलंबन अवधि में कहीं निजी प्रैक्टिस या व्यवसाय नहीं कर रहे — इसके बाद ही नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
स्थानीय आक्रोश और माँग
घटना के बाद राजनगर सीएचसी परिसर में आक्रोशित परिजनों और स्थानीय निवासियों ने जमकर हंगामा किया और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की माँग की। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब ग्रामीण स्वास्थ्य अवसंरचना की कमियाँ राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बनी हुई हैं। मृतका बिनीता बानरा का स्वयं स्वास्थ्य सहिया होना इस त्रासदी को और भी मार्मिक बनाता है — वह उसी व्यवस्था की शिकार हुईं जिसे मजबूत करने में वे खुद योगदान देती थीं।
आगे क्या
विभाग ने संकेत दिया है कि मामले की आगे जाँच जारी रहेगी और आवश्यकतानुसार अन्य जिम्मेदार कर्मियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। यह घटना झारखंड के दूरदराज़ के सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर गहरे सवाल खड़े करती है, जिनका जवाब केवल एक निलंबन से नहीं मिलेगा।