16 अक्टूबर 2026
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हरियाणा में धान-बाजरा खरीद संकट: हुड्डा का BJP सरकार पर बड़ा हमला, MSP से 800 रुपए कम दाम पर बिक रही फसल

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हरियाणा में धान-बाजरा खरीद संकट: हुड्डा का BJP सरकार पर बड़ा हमला, MSP से 800 रुपए कम दाम पर बिक रही फसल

सारांश

हरियाणा की मंडियों में लाखों टन धान बारिश में डूबा, बाजरा MSP से ₹800-₹900 कम पर बिक रहा — हुड्डा ने BJP सरकार पर खरीद में जानबूझकर ढिलाई और नमी मशीनों में छेड़छाड़ का आरोप लगाया। किसानों की तकलीफ अब विधानसभा की राजनीति का केंद्र बनती जा रही है।

मुख्य बातें

विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने 16 अक्टूबर 2026 को हरियाणा BJP सरकार पर धान-बाजरा खरीद में जानबूझकर देरी का आरोप लगाया।
राज्य की मंडियों में लाखों मीट्रिक टन धान दो दिनों की बारिश में भीग गया; समय पर ढुलाई न होने से नुकसान।
किसान धान MSP से ₹400 प्रति क्विंटल कम और बाजरा MSP से ₹800-₹900 प्रति क्विंटल कम पर बेचने को मजबूर।
हुड्डा ने नमी मापने वाली मशीनों में कथित छेड़छाड़ का आरोप लगाया — एक ही बैच की उपज में तीन अलग-अलग नमी रीडिंग।
माँग: ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद का वादा पूरा हो और बारिश से हुए नुकसान पर विशेष बोनस दिया जाए।

हरियाणा के विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि धान और बाजरा की खरीद में जानबूझकर ढिलाई बरती जा रही है, जिससे किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं। चंडीगढ़ में जारी एक बयान में हुड्डा ने कहा कि बारिश और सरकारी उदासीनता के मेल ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।

मंडियों में डूबा धान, किसानों को दोहरी मार

हुड्डा के अनुसार, दो दिनों की बारिश ने मंडियों में रखे लाखों मीट्रिक टन धान को जलमग्न कर दिया। उनका कहना है कि यदि सरकार ने समय पर खरीद और ढुलाई सुनिश्चित की होती, तो यह नुकसान टाला जा सकता था। खरीद केंद्रों से उत्पाद उठाने में देरी के चलते किसान और कमीशन एजेंट दोनों भारी आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने राज्य की कई मंडियों का व्यक्तिगत दौरा किया और किसानों व कमीशन एजेंटों से सीधी बात की। उनके अनुसार, कोई भी व्यक्ति सरकारी व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं मिला।

खरीद प्रक्रिया में अव्यवस्था और नमी मशीनों में कथित छेड़छाड़

हुड्डा ने आरोप लगाया कि मंडियों में किसानों को गेट पास, सत्यापन प्रक्रिया, खरीद सीमा, लंबे ट्रैफिक जाम और अत्यधिक प्रतीक्षा समय जैसी अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनके अनुसार, स्थिति इतनी गंभीर है कि नमी मापने वाली मशीनों में भी कथित तौर पर छेड़छाड़ पाई गई है।

उनका दावा है कि एक ही बैच की उपज को तीन अलग-अलग मशीनों से जाँचा गया तो नमी के दर्ज आँकड़े एकसमान नहीं थे — एक ऐसा विसंगति जो किसानों की उपज को अस्वीकार करने या कम दाम देने का आधार बन सकती है। हुड्डा ने इसे सरकार की 'सोची-समझी साजिश' करार दिया।

MSP से कितना कम मिल रहा है किसानों को

हुड्डा ने बताया कि सरकार जानबूझकर MSP पर खरीद से बचने की कोशिश कर रही है, जिसके चलते किसान अपनी फसल निजी एजेंसियों को कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उनके अनुसार, इस समय किसान:

धान: MSP से ₹400 प्रति क्विंटल कम पर बेचने को विवश हैं।
बाजरा: MSP से ₹800 से ₹900 प्रति क्विंटल कम पर बिक रहा है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब हरियाणा के किसान पहले से ही कृषि लागत और बाज़ार भाव के बीच की खाई से जूझ रहे हैं।

हुड्डा की माँगें

विपक्ष के नेता ने सरकार से माँग की है कि वह ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने के अपने पूर्व वादे को पूरा करे। साथ ही उन्होंने बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को विशेष बोनस देने का भी आग्रह किया।

आगे क्या होगा

हुड्डा के इस बयान से हरियाणा की राजनीति में कृषि मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यदि खरीद में तत्काल सुधार नहीं हुआ तो किसान संगठनों के विरोध प्रदर्शन तेज़ होने की आशंका है। खरीफ सीज़न की यह स्थिति आगामी दिनों में विधानसभा और ज़िला स्तर पर सियासी बहस का केंद्र बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उसे मंडी-वार खरीद आँकड़े सार्वजनिक करने होंगे — अन्यथा किसानों की पीड़ा अगले चुनाव तक राजनीतिक हथियार बनी रहेगी।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरियाणा में धान और बाजरा खरीद संकट क्या है?
हरियाणा की मंडियों में खरीफ सीज़न 2026 में धान और बाजरा की सरकारी खरीद समय पर नहीं हो पाई, जिससे बारिश में लाखों मीट्रिक टन धान भीग गया। किसान MSP से कम दाम पर निजी एजेंसियों को फसल बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।
किसानों को MSP से कितना कम दाम मिल रहा है?
हुड्डा के अनुसार, किसान धान को MSP से ₹400 प्रति क्विंटल कम पर और बाजरा को MSP से ₹800 से ₹900 प्रति क्विंटल कम पर बेचने को मजबूर हैं। यह अंतर सीधे निजी एजेंसियों के पक्ष में जाता है।
हुड्डा ने नमी मशीनों में छेड़छाड़ का आरोप क्यों लगाया?
हुड्डा ने आरोप लगाया कि एक ही बैच की उपज को तीन अलग-अलग नमी मापने वाली मशीनों से जाँचने पर अलग-अलग आँकड़े दर्ज किए गए। उनके अनुसार, यह किसानों की उपज को MSP पर खरीदने से बचने के लिए जानबूझकर की गई साजिश का हिस्सा है।
हुड्डा ने सरकार से क्या माँगें की हैं?
पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा ने माँग की है कि सरकार ₹3,100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने के अपने वादे को पूरा करे और बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को विशेष बोनस दे।
मंडियों में किसानों को किन व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
हुड्डा के मंडी दौरों के अनुसार, किसान गेट पास की जटिलता, सत्यापन प्रक्रिया में देरी, खरीद सीमाओं, लंबे ट्रैफिक जाम और अत्यधिक प्रतीक्षा समय जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। किसानों और कमीशन एजेंटों में सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक असंतोष है।
राष्ट्र प्रेस
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