7 अक्टूबर 2026
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क्योंझर में 154 हाथियों का संकट: डीएफओ धनराज ने कहा — पत्थर मत मारो, मुआवजा मिलेगा

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क्योंझर में 154 हाथियों का संकट: डीएफओ धनराज ने कहा — पत्थर मत मारो, मुआवजा मिलेगा

सारांश

क्योंझर में 154 हाथी 15 झुंडों में घूम रहे हैं और धान की तैयार फसल को नुकसान हो रहा है। डीएफओ धनराज ने साफ कहा: पत्थर मारना और शोर मचाना हाथियों को और आक्रामक बनाता है। सरकार 97-98% प्रभावितों को समय पर मुआवजा देती है।

मुख्य बातें

क्योंझर वन खंड में इस समय 154 हाथी , 15 झुंडों में विचरण कर रहे हैं।
36 हाथियों का एक बड़ा झुंड पिछले 3-4 दिनों से मैदान केला क्षेत्र में सक्रिय है और फसलों व घरों को नुकसान पहुँचा रहा है।
धनराज ने पत्थर मारने, आग जलाने और वाहनों से शोर मचाकर हाथियों को भगाने से मना किया है।
राज्य सरकार फसल या घर के नुकसान पर 97 से 98 प्रतिशत पीड़ितों को समय सीमा के भीतर रिवाइज्ड मुआवजा देती है।
घटते जंगल और सिकुड़ते आवास को मानव-हाथी संघर्ष की मूल वजह बताया गया है।

ओडिशा के क्योंझर वन खंड में इंसान और हाथियों के बीच टकराव तेज़ी से बढ़ रहा है। 7 अक्टूबर 2026 को क्योंझर के डीएफओ एच.डी. धनराज ने ग्रामीणों से अपील की कि वे हाथियों को पत्थर मारकर या शोर मचाकर न भगाएं, क्योंकि इससे टकराव और बढ़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फसल या घर को हुए नुकसान का मुआवजा राज्य सरकार समय सीमा के भीतर देती है।

मैदान केला में 36 हाथियों का झुंड सक्रिय

डीएफओ धनराज के अनुसार, क्योंझर वन खंड में इस समय 154 हाथी विचरण कर रहे हैं, जो 15 अलग-अलग झुंडों में बंटे हुए हैं। इनमें सबसे बड़ा झुंड — 36 हाथियों का — पिछले तीन-चार दिनों से टाउन सेक्शन के अंतर्गत मैदान केला क्षेत्र में सक्रिय है। उन्होंने बताया कि हाथियों का इस इलाके में आना-जाना प्राकृतिक है और हर साल होता है।

हालाँकि, इस बार धान की फसल तैयार होने के कारण नुकसान की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक हो गई हैं। स्थानीय किसान अपनी खड़ी फसल के नष्ट होने की आशंका से चिंतित हैं।

मुआवजे पर सरकार की स्थिति

डीएफओ धनराज ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा, 'जितना भी नुकसान होता है, उसकी भरपाई के लिए राज्य सरकार बढ़ी हुई, रिवाइज्ड राशि दे रही है। हम 97 से 98 प्रतिशत लोगों को समय सीमा के अंदर मुआवजा दे देते हैं, इसलिए किसान चिंता न करें।' उन्होंने यह भी कहा कि फसल या घर को नुकसान होने पर मुआवजा देना सरकार की जिम्मेदारी है और यह समय पर दिया जाता है।

हिंसक तरीकों से बढ़ता है खतरा

डीएफओ ने ग्रामीणों की उन आदतों पर गंभीर चिंता जताई जो टकराव को और भड़काती हैं। उन्होंने बताया कि कई बार लोग हाथियों को अपने गाँव से दूसरी ओर खदेड़ने के लिए पत्थर मारते हैं, आग जलाते हैं, तथा ट्रैक्टर, बड़े ट्रक और दोपहिया वाहनों से शोर मचाते हैं।

इन हरकतों से हाथी घबरा जाते हैं और आक्रामक हो जाते हैं। वे इंसानों को अपना दुश्मन समझने लगते हैं, जिसके कारण घरों को तोड़ने, फसलों को नष्ट करने और लोगों को गंभीर चोट पहुँचाने की घटनाएं बढ़ती हैं।

संघर्ष की वजह: सिकुड़ते जंगल

यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा सहित पूरे भारत में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। धनराज ने कहा कि घटते जंगल और हाथियों के प्राकृतिक आवास में कमी इस संघर्ष की मूल वजह है। जंगल सिकुड़ने से हाथी भोजन और पानी की तलाश में खेतों और बस्तियों में आने लगते हैं।

गौरतलब है कि यह समस्या केवल क्योंझर तक सीमित नहीं है — ओडिशा में ढेंकानाल, सुंदरगढ़ और मयूरभंज जैसे ज़िले भी मानव-हाथी टकराव से प्रभावित रहे हैं।

वन विभाग की अपील

डीएफओ धनराज ने ग्रामीणों से अनुरोध किया है कि वे वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि हिंसक तरीकों से हाथियों को भगाने से जन-धन दोनों को नुकसान होता है। आने वाले दिनों में वन विभाग स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सिकुड़ते वन आवरण का संकट। हाथियों को खेतों में आने से रोकने का एकमात्र दीर्घकालिक उपाय वन भूमि का संरक्षण और कॉरिडोर की बहाली है, लेकिन उस पर नीतिगत चर्चा कम, मुआवजे की घोषणाएं अधिक होती हैं। 97-98% मुआवजे का आँकड़ा उत्साहजनक है, पर यह सवाल बचा रहता है कि दावे का सत्यापन स्वतंत्र रूप से कैसे होता है। जब तक जंगल नहीं बचेंगे, हर साल धान पकने के मौसम में यही संकट दोहराया जाएगा।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्योंझर में हाथियों और इंसानों के बीच टकराव क्यों बढ़ रहा है?
डीएफओ एच.डी. धनराज के अनुसार, घटते जंगल और हाथियों के प्राकृतिक आवास में कमी इस संघर्ष की मुख्य वजह है। भोजन और पानी की तलाश में हाथी खेतों और बस्तियों में आ जाते हैं, और इस बार धान की फसल तैयार होने से टकराव की घटनाएं और बढ़ गई हैं।
क्योंझर में अभी कितने हाथी हैं और वे कहाँ हैं?
वन विभाग के अनुसार, क्योंझर वन खंड में इस समय 154 हाथी 15 अलग-अलग झुंडों में विचरण कर रहे हैं। इनमें से 36 हाथियों का एक बड़ा झुंड पिछले तीन-चार दिनों से टाउन सेक्शन के अंतर्गत मैदान केला क्षेत्र में सक्रिय है।
फसल या घर को हाथियों से नुकसान होने पर मुआवजा कैसे मिलेगा?
डीएफओ धनराज ने बताया कि राज्य सरकार रिवाइज्ड (बढ़ी हुई) दर पर मुआवजा देती है और 97 से 98 प्रतिशत प्रभावितों को समय सीमा के भीतर भुगतान किया जाता है। किसान वन विभाग से संपर्क कर नुकसान की जानकारी दर्ज करा सकते हैं।
हाथी सामने आ जाए तो क्या नहीं करना चाहिए?
वन विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि हाथियों को पत्थर मारना, आग जलाना, और ट्रैक्टर या ट्रक से शोर मचाना उन्हें आक्रामक बनाता है। इससे घरों, फसलों को अधिक नुकसान होता है और लोगों को गंभीर चोटें लग सकती हैं। हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और वन विभाग को तुरंत सूचित करें।
क्या ओडिशा के अन्य ज़िलों में भी मानव-हाथी संघर्ष की समस्या है?
हाँ, क्योंझर के अलावा ओडिशा के ढेंकानाल, सुंदरगढ़ और मयूरभंज जैसे ज़िले भी मानव-हाथी टकराव से प्रभावित रहे हैं। यह समस्या राज्य भर में वन क्षेत्र घटने से जुड़ी एक व्यापक चुनौती है।
राष्ट्र प्रेस
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