क्योंझर में 154 हाथियों का संकट: डीएफओ धनराज ने कहा — पत्थर मत मारो, मुआवजा मिलेगा
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के क्योंझर वन खंड में इंसान और हाथियों के बीच टकराव तेज़ी से बढ़ रहा है। 7 अक्टूबर 2026 को क्योंझर के डीएफओ एच.डी. धनराज ने ग्रामीणों से अपील की कि वे हाथियों को पत्थर मारकर या शोर मचाकर न भगाएं, क्योंकि इससे टकराव और बढ़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फसल या घर को हुए नुकसान का मुआवजा राज्य सरकार समय सीमा के भीतर देती है।
मैदान केला में 36 हाथियों का झुंड सक्रिय
डीएफओ धनराज के अनुसार, क्योंझर वन खंड में इस समय 154 हाथी विचरण कर रहे हैं, जो 15 अलग-अलग झुंडों में बंटे हुए हैं। इनमें सबसे बड़ा झुंड — 36 हाथियों का — पिछले तीन-चार दिनों से टाउन सेक्शन के अंतर्गत मैदान केला क्षेत्र में सक्रिय है। उन्होंने बताया कि हाथियों का इस इलाके में आना-जाना प्राकृतिक है और हर साल होता है।
हालाँकि, इस बार धान की फसल तैयार होने के कारण नुकसान की घटनाएं अपेक्षाकृत अधिक हो गई हैं। स्थानीय किसान अपनी खड़ी फसल के नष्ट होने की आशंका से चिंतित हैं।
मुआवजे पर सरकार की स्थिति
डीएफओ धनराज ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा, 'जितना भी नुकसान होता है, उसकी भरपाई के लिए राज्य सरकार बढ़ी हुई, रिवाइज्ड राशि दे रही है। हम 97 से 98 प्रतिशत लोगों को समय सीमा के अंदर मुआवजा दे देते हैं, इसलिए किसान चिंता न करें।' उन्होंने यह भी कहा कि फसल या घर को नुकसान होने पर मुआवजा देना सरकार की जिम्मेदारी है और यह समय पर दिया जाता है।
हिंसक तरीकों से बढ़ता है खतरा
डीएफओ ने ग्रामीणों की उन आदतों पर गंभीर चिंता जताई जो टकराव को और भड़काती हैं। उन्होंने बताया कि कई बार लोग हाथियों को अपने गाँव से दूसरी ओर खदेड़ने के लिए पत्थर मारते हैं, आग जलाते हैं, तथा ट्रैक्टर, बड़े ट्रक और दोपहिया वाहनों से शोर मचाते हैं।
इन हरकतों से हाथी घबरा जाते हैं और आक्रामक हो जाते हैं। वे इंसानों को अपना दुश्मन समझने लगते हैं, जिसके कारण घरों को तोड़ने, फसलों को नष्ट करने और लोगों को गंभीर चोट पहुँचाने की घटनाएं बढ़ती हैं।
संघर्ष की वजह: सिकुड़ते जंगल
यह ऐसे समय में आया है जब ओडिशा सहित पूरे भारत में मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं। धनराज ने कहा कि घटते जंगल और हाथियों के प्राकृतिक आवास में कमी इस संघर्ष की मूल वजह है। जंगल सिकुड़ने से हाथी भोजन और पानी की तलाश में खेतों और बस्तियों में आने लगते हैं।
गौरतलब है कि यह समस्या केवल क्योंझर तक सीमित नहीं है — ओडिशा में ढेंकानाल, सुंदरगढ़ और मयूरभंज जैसे ज़िले भी मानव-हाथी टकराव से प्रभावित रहे हैं।
वन विभाग की अपील
डीएफओ धनराज ने ग्रामीणों से अनुरोध किया है कि वे वन विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि हिंसक तरीकों से हाथियों को भगाने से जन-धन दोनों को नुकसान होता है। आने वाले दिनों में वन विभाग स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रहा है।