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कोरबा में 11 हाथियों के झुंड का उत्पात, जड़गा रेंज में फसल और संपत्ति तबाह

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कोरबा में 11 हाथियों के झुंड का उत्पात, जड़गा रेंज में फसल और संपत्ति तबाह

सारांश

कोरबा की जड़गा रेंज में 11 हाथियों के झुंड ने खाड़ीपारा के खेतों में धान, मक्का और सब्ज़ी की फसलें रौंद डालीं, कृषि उपकरण भी तबाह किए। रेंज में अब 45 हाथियों की मौजूदगी ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंता और गहरा दी है। वन विभाग ने मुआवज़े की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन ग्रामीणों की माँग स्थायी समाधान की है।

मुख्य बातें

11 हाथियों के झुंड ने कटघोरा वनमंडल की जड़गा रेंज के खाड़ीपारा इलाके में उत्पात मचाया।
धान, मक्का और सब्ज़ी की फसलों के साथ दो किसानों के कृषि उपकरण भी नष्ट हुए।
जड़गा रेंज में फ़िलहाल अलग-अलग झुंडों में कुल 45 हाथी मौजूद बताए जा रहे हैं।
वन विभाग ने सर्वे के आधार पर मुआवज़े की प्रक्रिया शुरू की; रात में खेतों में अकेले न जाने की चेतावनी।
अधिकारियों के अनुसार जंगल में पानी और भोजन की कमी हाथियों के गाँवों की ओर रुख़ का प्रमुख कारण है।

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की कटघोरा वनमंडल स्थित जड़गा रेंज में 11 हाथियों के एक झुंड ने बासीन सेक्टर के खाड़ीपारा इलाके में जमकर उत्पात मचाते हुए किसानों की फसल और संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया। ग्रामीणों के अनुसार, दल अचानक खेतों में घुसा और धान, मक्का व सब्ज़ी की फसलों के साथ-साथ कृषि उपकरणों को भी रौंद डाला। यह घटना मानव-वन्यजीव संघर्ष की उस लंबी कड़ी में एक और कड़ी है, जो जिले में पिछले कई महीनों से लगातार सामने आ रही है।

मुख्य घटनाक्रम

स्थानीय किसानों के अनुसार, हाथियों का दल देर रात अचानक खाड़ीपारा के खेतों में दाख़िल हुआ। झुंड ने दो किसानों के खेतों में रखे कृषि उपकरण और छोटी-मोटी संपत्ति भी नष्ट कर दी। उत्पात के बाद हाथी वापस जड़गा के जंगल की ओर लौट गए।

वन विभाग की प्रतिक्रिया

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची और नुकसान का जायज़ा लेकर प्रभावित किसानों की शिकायत दर्ज की। अधिकारियों ने बताया कि दोनों किसानों को मुआवज़ा दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही राशि जारी की जाएगी। रेंज अधिकारियों के अनुसार, “हाथी प्राकृतिक रूप से भोजन की तलाश में गाँव की ओर आते हैं; जंगल में पानी और भोजन की कमी के कारण यह समस्या बढ़ रही है।”

जड़गा रेंज में हाथियों की मौजूदगी

वन विभाग के अनुसार, जड़गा रेंज में फ़िलहाल अलग-अलग झुंडों में कुल 45 हाथी मौजूद बताए जा रहे हैं, जिनकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और विशेष रूप से रात के समय खेतों में अकेले न जाने की चेतावनी जारी की गई है। पेट्रोलिंग टीमें क्षेत्र में सक्रिय हैं।

आम जनता पर असर

कोरबा के जंगली इलाकों में हाथियों का उत्पात कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ महीनों में कई गाँवों में फसलों को नुकसान पहुँचा है, जिससे किसानों में आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन विभाग को हाथियों को जंगल के भीतर ही रोकने के लिए अधिक प्रभावी कदम उठाने चाहिए, क्योंकि बार-बार के मुआवज़े उनकी आजीविका की भरपाई नहीं कर पाते।

क्या होगा आगे

वन विभाग की सर्वे रिपोर्ट के बाद मुआवज़ा राशि तय की जाएगी। साथ ही जड़गा रेंज में हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी और बढ़ाई जाएगी, ताकि आगे और गाँवों को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ जंगल सिकुड़ रहे हैं और कोयला-खनन गलियारों ने हाथियों के पारंपरिक रास्तों को बाधित किया है। मुआवज़ा एक प्रशासनिक राहत है, समाधान नहीं; जब तक चारा-पानी की उपलब्धता और कॉरिडोर बहाली पर ठोस काम नहीं होता, झुंड गाँवों की ओर बढ़ते रहेंगे। 45 हाथियों की एक ही रेंज में मौजूदगी अपने आप में एक चेतावनी है। असली परीक्षा यह है कि वन विभाग प्रतिक्रियात्मक पेट्रोलिंग से आगे बढ़कर आवास-प्रबंधन की दीर्घकालिक रणनीति कब अपनाता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोरबा में हाथियों के झुंड ने कहाँ उत्पात मचाया?
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कटघोरा वनमंडल की जड़गा रेंज के अंतर्गत बासीन सेक्टर के खाड़ीपारा इलाके में 11 हाथियों के झुंड ने किसानों की फसल और संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। उत्पात के बाद झुंड वापस जड़गा के जंगल की ओर लौट गया।
प्रभावित किसानों को मुआवज़ा कब मिलेगा?
वन विभाग ने दोनों प्रभावित किसानों की शिकायत दर्ज कर मुआवज़े की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही मुआवज़े की राशि जारी की जाएगी।
जड़गा रेंज में कुल कितने हाथी मौजूद हैं?
वन विभाग के अनुसार, जड़गा रेंज में फ़िलहाल अलग-अलग झुंडों में कुल 45 हाथी मौजूद बताए जा रहे हैं। टीम इनकी लगातार मॉनिटरिंग कर रही है।
हाथी बार-बार गाँवों की ओर क्यों आ रहे हैं?
वन विभाग के रेंज अधिकारियों के अनुसार, जंगल में पानी और भोजन की कमी के कारण हाथी प्राकृतिक रूप से भोजन की तलाश में गाँवों की ओर रुख़ कर रहे हैं। विभाग पेट्रोलिंग के साथ ग्रामीणों में जागरूकता भी फैला रहा है।
ग्रामीणों के लिए क्या चेतावनी जारी की गई है?
ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है और विशेष रूप से रात के समय खेतों में अकेले न जाने की चेतावनी जारी की गई है। वन विभाग की टीमें क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग कर रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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