असम के तिनसुकिया में हाथियों का कहर: 5 घर क्षतिग्रस्त, फसलें बर्बाद; हाथी गलियारों पर अतिक्रमण बना संकट
सारांश
मुख्य बातें
असम के तिनसुकिया जिले के सादिया क्षेत्र में 14 जून को मानव-हाथी संघर्ष की एक गंभीर घटना सामने आई, जब भाबला बालिजान गाँव में जंगली हाथियों के झुंड ने 5 घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया, किसानों की खड़ी फसलें रौंद डालीं और बड़ी संख्या में मूल्यवान खैर के पेड़ उखाड़ दिए। क्षेत्रीय वन अधिकारी लकी दत्ता ने बताया कि हाल के दिनों में इस तरह की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
वन अधिकारी लकी दत्ता के अनुसार, इस घटना में कुल पाँच घर क्षतिग्रस्त हुए और खेतों में खड़ी अनेक फसलों को भारी नुकसान पहुँचा। हाथियों के झुंड ने न केवल आवासीय ढाँचों को तोड़ा, बल्कि कृषि भूमि को भी रौंद दिया, जिससे प्रभावित परिवारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। यह ऐसे समय में आया है जब सादिया क्षेत्र में मानव-हाथी टकराव की आवृत्ति पहले से ही चिंताजनक स्तर पर पहुँच चुकी है।
हाथी गलियारों पर अतिक्रमण — असली समस्या
वन विभाग की फील्ड स्टडी में पाया गया है कि गुरुमुरा नदी और लोहित नदी के आसपास तीन प्रमुख हाथी गलियारों की पहचान की गई है। इन गलियारों को सरकारी अधिसूचना के लिए पहले ही प्रस्तावित किया जा चुका है। लेकिन दत्ता ने बताया कि स्थानीय लोग अब इन्हीं संवेदनशील क्षेत्रों में मक्का, आलू और अन्य मौसमी फसलों की खेती करने लगे हैं, जिससे हाथियों की स्वाभाविक आवाजाही बाधित हो रही है।
गौरतलब है कि हाथी गलियारों पर अतिक्रमण भारत में मानव-हाथी संघर्ष का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। सरकारी भूमि और सपोरी क्षेत्रों में हुए अतिक्रमण को हटाना ज़रूरी बताते हुए दत्ता ने कहा कि जब तक हाथियों को उनके प्राकृतिक रास्तों पर स्वतंत्र आवागमन नहीं मिलता, ऐसी घटनाएँ रुकना मुश्किल होगा।
वन विभाग की तात्कालिक प्रतिक्रिया
वन विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त जारी है। ग्रामीणों को सहायता के रूप में टॉर्च और पटाखे वितरित किए जा रहे हैं ताकि हाथियों को आबादी वाले इलाकों से दूर भगाया जा सके। विभाग ने प्रशासन के साथ मिलकर जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाने की भी योजना बनाई है, जिसमें ग्रामीणों को यह समझाया जाएगा कि हाथी के सामने पड़ने पर क्या करें और क्या न करें।
दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम
स्थायी समाधान के लिए स्थानीय गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के सहयोग से रिज़र्व फॉरेस्ट के आसपास के गाँवों में सोलर फेंसिंग लगाने की पहल की जा रही है। इसके अलावा जैविक बाड़ के रूप में नींबू के पौधे लगाने को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जो हाथियों को खेतों से प्राकृतिक रूप से दूर रखने में सहायक माने जाते हैं।
क्षेत्रवासियों से अपील
वन अधिकारी लकी दत्ता ने सादिया क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथी गलियारों और सपोरी क्षेत्रों में मक्का तथा अन्य आकर्षक फसलों की खेती से बचें। उनका कहना है कि इस एहतियात से संघर्ष की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। आने वाले दिनों में वन विभाग इन इलाकों में निगरानी और सामुदायिक संवाद और तेज़ करेगा।