हीरा ग्रुप घोटाला: ईडी ने ₹15.03 करोड़ की 7 संपत्तियाँ नीलाम कीं, पीड़ित निवेशकों को मिलेगा मुआवज़ा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने हीरा ग्रुप धोखाधड़ी मामले में ₹15.03 करोड़ मूल्य की 7 अचल संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। 6 अक्टूबर 2026 को सफल एच-1 बोलीदाताओं के पक्ष में इन संपत्तियों का पंजीकरण किया गया, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत पीड़ित निवेशकों को मुआवज़ा दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
नीलाम संपत्तियों का विवरण
नीलाम की गई संपत्तियों में हैदराबाद के शेखपेट गाँव स्थित एच.एस. रॉयल परिसर के 6 फ्लैट और बंजारा हिल्स के रोड नंबर 12, एमएलए कॉलोनी में स्थित 1 मकान शामिल हैं। इन संपत्तियों की सेल डीड 27 जुलाई 2026 के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत तेलंगाना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा नियुक्त रजिस्ट्रार (प्रोटोकॉल) टी. वेंकटेश्वर राव के माध्यम से सफल बोलीदाताओं के नाम पंजीकृत की गई।
सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका
यह नीलामी पूरी तरह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप है। 5 मार्च 2025 के आदेश में शीर्ष अदालत ने ईडी की उस अर्जी को मंजूरी दी थी, जिसमें नोहेरा शेख, हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज और अन्य आरोपियों की अटैच संपत्तियों की नीलामी कर असली दावेदारों एवं पीड़ितों को अधिकतम मुआवज़ा दिलाने की माँग की गई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि नीलामी से प्राप्त धनराशि सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) को हस्तांतरित की जाएगी, जो इसे पीड़ित निवेशकों में वितरित करेगा।
घोटाले की पृष्ठभूमि
हीरा ग्रुप की मालकिन नोहेरा शेख पर आरोप है कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने आम जनता को सालाना 36 प्रतिशत से अधिक रिटर्न का वादा करके ₹5,978 करोड़ से अधिक का निवेश जुटाया। बाद में कंपनियों ने बड़ी संख्या में निवेशकों को न मूलधन लौटाया, न वादा किया गया रिटर्न। ईडी ने अलग-अलग राज्यों में दर्ज एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जाँच शुरू की। जाँच में खुलासा हुआ कि अवैध रूप से अर्जित धन से नोहेरा शेख, उनके रिश्तेदारों और सहयोगियों के नाम पर चल एवं अचल संपत्तियाँ खरीदी गई थीं।
गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई
ईडी के हैदराबाद जोनल ऑफिस ने अब तक पीएमएलए के अंतर्गत 5 प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी करते हुए ₹428.83 करोड़ की संपत्तियाँ कुर्क की हैं और विशेष अदालत में अभियोजन परिवाद (Prosecution Complaint) भी दाखिल किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने नोहेरा शेख के आचरण को गंभीरता से लेते हुए 8 अप्रैल 2026 को उनकी जमानत रद्द कर एक सप्ताह में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन न करने पर पीएमएलए कोर्ट ने 7 मई 2026 को उनके विरुद्ध गैर-जमानती वारंट जारी किया। अंततः खुफिया जानकारी के आधार पर ईडी और हरियाणा पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में 21 मई 2026 को गुरुग्राम से नोहेरा शेख को गिरफ्तार कर हैदराबाद लाया गया, जहाँ वे न्यायिक हिरासत में हैं।
आगे की प्रक्रिया
ईडी ने स्पष्ट किया है कि नीलामी से प्राप्त राशि SFIO को हस्तांतरित की जाएगी, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार इसे पीड़ित निवेशकों में वितरित करेगी। शेष कुर्क संपत्तियों की नीलामी प्रक्रिया भी जारी रहेगी। यह मामला उन लाखों निवेशकों के लिए न्याय की उम्मीद बनकर सामने आया है जिन्होंने ऊँचे रिटर्न के लालच में अपनी जमा-पूँजी गँवाई।