हीरा ग्रुप घोटाला: ईडी ने ₹103.26 करोड़ की नौ संपत्तियों का पंजीकरण पूरा किया, पीड़ितों को मिलेगा पैसा
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नोहेरा शेख और हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े बहुचर्चित निवेश घोटाले में 16 अक्टूबर 2026 को एक अहम कार्रवाई करते हुए ₹103.26 करोड़ मूल्य की नौ नीलाम संपत्तियों का पंजीकरण पूर्ण कर लिया। यह पूरी प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत संपन्न हुई, जिसका उद्देश्य नीलामी से प्राप्त धनराशि को वास्तविक पीड़ितों और दावेदारों तक पहुँचाना है।
मुख्य घटनाक्रम
ईडी के हैदराबाद जोनल कार्यालय के अनुसार, 16 अक्टूबर को हैदराबाद के बंजारा हिल्स में स्थित दो अचल संपत्तियों — 'कार्वी सेंटर' और 'नैना टावर्स' — का पंजीकरण पूरा किया गया। इन दोनों की सम्मिलित बिक्री कीमत लगभग ₹88.23 करोड़ रही।
इससे पहले 5 अक्टूबर को सात अन्य संपत्तियों का पंजीकरण किया जा चुका था। इन दोनों चरणों को मिलाकर अब कुल नौ संपत्तियों का पंजीकरण पूर्ण हो गया है, जिनकी संयुक्त कीमत ₹103.26 करोड़ है।
घोटाले की पृष्ठभूमि
प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के अंतर्गत ईडी की जाँच में सामने आया है कि आरोपी संस्थाओं ने निवेशकों को 36 प्रतिशत से अधिक वार्षिक रिटर्न का प्रलोभन देकर ₹5,978 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई थी। यह ऐसे समय में आया है जब देश में पोंजी स्कीमों के खिलाफ नियामक सख्ती लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि उक्त संस्थाएँ बाद में निवेशकों का पैसा लौटाने में विफल रहीं।
जाँच एजेंसी अब तक ₹428.83 करोड़ की संपत्तियाँ जब्त करने के लिए पाँच प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी कर चुकी है। इसके अलावा, हैदराबाद स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायतें भी दाखिल की गई हैं।
नोहेरा शेख की गिरफ्तारी और कानूनी स्थिति
ईडी के अनुसार, नोहेरा शेख को 21 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। उनकी जमानत पहले ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द की जा चुकी है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। यह मामला वर्षों से हजारों निवेशकों के लिए न्याय की प्रतीक्षा का प्रतीक बना हुआ है।
पीड़ितों तक धन पहुँचाने की प्रक्रिया
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, नीलामी से प्राप्त समस्त धनराशि सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) को हस्तांतरित की जाएगी। इसके पश्चात एसएफआईओ इस राशि को सत्यापित पीड़ितों और दावेदारों के बीच वितरित करेगा।
आगे क्या होगा
₹5,978 करोड़ से अधिक के इस घोटाले में अब तक जब्त और नीलाम संपत्तियों का आँकड़ा कुल देनदारी के सामने अभी भी काफी कम है। ईडी की जाँच जारी है और आने वाले महीनों में और अटैचमेंट ऑर्डर एवं नीलामियाँ संभव हैं, क्योंकि अदालत पीड़ितों के हित में त्वरित कार्रवाई पर जोर दे रही है।