चंबा बस हादसा: अनियंत्रित बस खाई में गिरी, 7 की मौत, 11 घायल — दो महीनों में 25 से अधिक जानें गईं
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में शनिवार, 8 अगस्त की सुबह एक निजी बस के खाई में गिरने से चालक और परिचालक समेत 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य यात्री घायल हुए। चंबा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मृतकों और घायलों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। सभी घायलों को निकटवर्ती अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
हादसे का घटनाक्रम
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह निजी बस सुबह करीब 6:30 बजे बैरागढ़ से चंबा के लिए रवाना हुई थी। लगभग तीन किलोमीटर का सफर तय करने के बाद तीसा-बैरागढ़ मुख्य मार्ग पर देवीकोठी के निकट चालुज मोड़ पर बस अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे जा गिरी। बस में कुल 18 यात्री सवार थे।
दुर्घटना के तुरंत बाद कई यात्री बस के नीचे दब गए। स्थानीय निवासियों और राहगीरों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और फँसे यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। पुलिस को सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुँची और कड़ी मशक्कत के बाद सभी यात्रियों को बाहर निकाल कर घायलों को अस्पताल भेजा गया।
मृतकों और घायलों की पहचान
अधिकारियों के अनुसार, अब तक मृतकों और घायलों की आधिकारिक पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। हादसे के सटीक कारणों की भी जाँच जारी है। चंबा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थिति पर नज़र बनाए हुए है।
चंबा में बढ़ते सड़क हादसे
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब चंबा जिला पहले से ही लगातार सड़क दुर्घटनाओं की चपेट में है। पिछले दो महीनों में जिले में अलग-अलग बड़े हादसों में 25 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हाल ही में चंबा की सीमा के निकट भूस्खलन की चपेट में आने से एक टाटा सूमो में सवार 13 लोगों की मौत हुई थी।
इससे पहले 28 जुलाई को पठानकोट-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर लाहाड़ गाँव के पास एक वाहन गहरी खाई में जा गिरा था, जिसमें एक बच्चे समेत 5 लोगों की मौत हो गई थी। बताया गया कि वाहन में सवार सभी लोग किसी के उपचार के लिए जा रहे थे।
पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा का सवाल
गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश की पहाड़ी सड़कें, विशेषकर चंबा जिले के संकरे और घुमावदार मार्ग, मानसून के दौरान अत्यंत जोखिमभरे हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भूस्खलन, सड़कों की खराब स्थिति और ओवरलोडिंग इस क्षेत्र में दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। लगातार हो रहे हादसों के बीच पहाड़ी मार्गों पर वाहन सुरक्षा और नियमित निरीक्षण की माँग तेज़ हो रही है।
आगे जाँच में दुर्घटना के कारण और जिम्मेदारी स्पष्ट होने की उम्मीद है।